उच्च रक्‍तचाप के प्रभाव जो गर्भावस्था के दौरान हो सकते हैं खतरनाक

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 03, 2013
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Quick Bites

  • महिलाओं में प्रेग्‍नेंसी के हाई ब्‍लड प्रेशर की समस्‍या बहुत देखी जाती है।
  • प्रेग्‍नेंसी के दौरान हाई ब्‍लड प्रेशर तीन प्रकार का होता है। 
  • गर्भावस्‍था के दौरान उच्‍च रक्‍तचाप के कारण बच्‍चे का विकास बाधित हो सकता है।
  • गर्भावस्‍था के दौरान हाई ब्‍लड प्रेशर से समय से पूर्व डिलीवरी होने की संभावना बढ़ जाती है।

गर्भावस्‍था में उच्‍च रक्‍तचाप सबसे आम समस्‍या है। प्रेग्‍नेंसी के दौरान हाई ब्‍लड प्रेशर का सीधा असर महिला और भ्रूण के स्‍वास्‍थ्‍य पर पड़ता है।

ब्‍लड प्रेशर की जांच कराती महिलागर्भावस्‍था के दौरान उच्‍च रक्‍तचाप की समस्‍या महिलाओं के लिए कई बार खतरनाक साबित हो सकती है। गर्भावस्‍था के दौरान ब्‍लड प्रेशर के लिए सबसे ज्‍यादा जिम्‍मेदार कारक है अवसाद और तनाव।

आमतौर पर देखा जाता है कि गर्भावस्था में महिलाओं में उच्च रक्तचाप अगर मां बनने के बाद ठीक हो जाए तो इसका कोई दीर्घकालिक प्रभाव नहीं होता है। आइए हम आपको गर्भावस्‍था के दौरान हाई ब्‍लड प्रेशर के खतरों के बारे में जानकारी देते हैं।

 

[इसे भी पढ़ें : गर्भावस्‍था में जोड़ों में दर्द]


गर्भावस्‍था में उच्‍च रक्‍तचाप

गर्भावस्‍था में यदि हाई ब्‍लड प्रेशर की समस्‍या लंबे समय से हो तो यह दीर्घकालिक उच्च रक्तचाप या क्रॉनिक हाइपरटेंशन कहलाता है। यदि हाई ब्‍लड प्रेशर की समस्‍या प्रेग्‍नेंसी के 20 सप्ताह बाद, प्रसव में या प्रसव के 48 घंटे के भीतर होता है तो यह प्रेग्नेंसी इड्यूस्ड हाइपरटेंशन कहलाता है। इस दौरान यदि रक्तचाप 140/90 या इससे अधिक है तो महिला और बच्‍चे दोनों को परेशानी हो सकती है। इससे मरीज एक्‍लेंप्शिया में पहुंच सकता है, यह एक प्रकार की जटिलता है जिसमें महिला को झटके आने शुरू हो जाते हैं।

महिलाओं में प्रेग्‍नेंसी के हाई ब्‍लड प्रेशर की समस्‍या बहुत देखी जाती है। भ्रूण के विकास के साथ यह समस्‍या गंभीर होती जाती है। प्रेग्‍नेंसी के दौरान यदि भोजन में पौष्टिक खाद्य पदार्थों का अभाव है तो महिलायें रक्ताल्पता की शिकार होती हैं। शरीर में ब्‍लड की कमी से फीटस का विकास रुक जाता है। इससे मिसकैरेज होने की संभावना भी बनी रहती है।

प्रेग्‍नेंसी के दौरान हाई ब्‍लड प्रेशर तीन प्रकार का होता है- क्रोनिक हाइपरटेंशन, गेस्‍टेशनल हाइपरटेंशन और प्रीक्‍लेंप्शिया।

 

[इसे भी पढ़ें : गर्भावस्‍था में कैसे करें सीजोफ्रेनिया का इलाज]

 

गर्भावस्‍था में हाई ब्‍लड प्रेशर के खतरे

  • गर्भावस्‍था के दौरान उच्‍च रक्‍तचाप के कारण बच्‍चे का विकास बाधित हो सकता है। बच्‍चे के लिए जरूरी विटामिन और प्रोटीन नही मिल पाता। इसका असर होने वाले बच्‍चे के वजन पर भी पड़ता है।
  • हाइपरटेंशन के कारण गर्भनाल को नुकसान हो सकता है। कुछ मामलों में गर्भनाल गर्भाशय से अलग हो जाता है। इसके कारण बच्‍चे की ऑक्‍सीजन की आपूर्ति बाधित होती है। महिला को रक्‍तस्राव भी हो सकता है।
  • गर्भावस्‍था के दौरान हाई ब्‍लड प्रेशर से समय से पूर्व डिलीवरी होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • यदि महिला को गर्भावस्‍था के दौरान हाई ब्‍लड प्रेशर की समस्‍या है तो प्रसव के 20 सप्‍ताह बाद हृदय की बीमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है।

 

गर्भावस्‍था के दौरान उचित खानपान और नियमित चेकअप के जरिए इसकी जटिलताओं को कम किया जा सकता है। यदि आपको इस दौरान हाइपरटेंशन के लक्षण दिखें तो चिकित्‍सक से तुरंत संपर्क कीजिए।

 

 

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