आप बीती लिखिए जल्‍दी भरेंगे जख्‍म

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 22, 2013
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लिखता हुआ आदमी

कहते हैं अपना गम किसी से कह देने से वह हल्‍का हो जाता है। वैज्ञानिक तो यह भी मानते हैं कि जब आप गहरे अवसाद में हों तो भीतर दबी सभी भावनाओं को किसी कागज पर उतार देना चाहिए। ऐसा करने से भीतर सब कुछ खाली हो जाता है और मानसिक रूप से हल्‍का महसूस करते हैं। अब अपने विचलित करने वाले अनुभव लिखने का एक और फायदा सामने आया है। इसमें बताया गया है कि कैसे लिखने से आपकी त्‍वचा जल्‍दी ठीक हो जाती है।

 

अपनी समस्‍याओं के बारे मे लिखने से आपका प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत हो सकता है और आपके जख्‍म तेजी से भर सकते हैं। एक नये अध्‍ययन में यह दावा किया गया है ।

 

ऑकलैंड यूनिवर्सिटी द्वारा कराये गए एक अध्‍ययन में कहा गया है कि जिन लोगों ने अपने जीवन के दर्दनाक अनुभवों को लिखा उनकी त्‍वचा ऐसा नहीं करने वालों के मुकाबले तीन गुना तेजी से ठीक हुई। शोधकर्ताओं ने यह दावा 50 प्रतिभागियों का अध्‍ययन करने के बाद किया है। इन प्रतिभागियों में महिला और पुरुष दोनों शामिल थे। इनसे लगातार तीन दिनों तक, रोजाना बीस मिनट अपने अनुभव लिखने को कहा गया था।

 

प्रतिभागियों में से आधे ने अपने विचलित करने वाले अनुभव लिखे और अपनी गहनतम भावनाएं जाहिर कीं। जबकि बाकी आधे ने अगले दिन के लिए योजनाबद्ध गतिविधियों को दर्ज किया और अपनी भावनाएं जाहिर नहीं कीं। इन सभी प्रतिभागियों की बांह की त्‍वचा पर बायोप्‍सी करने से बने जख्‍म थे।

 

दो सप्‍ताह बाद इस जख्‍म के ठीक होने की दर की जांच की गई और दोनों समूहों की तुलना की गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन प्रतिभागियों ने अपने विचलित करने वाले अनुभव लिखे थे, उनकी जख्‍म भरने की दर 76 फीसदी थी। प्रमुख शोधकर्ता डॉक्‍टर एलिजाबेथ बॉर्डबेंड ने कहा, हमारा अध्‍ययन शरीर और मस्तिष्‍क के रिश्‍ते को दिखाता है। यह बतलाता है कि शारीरिक नतीजों की बेहतरी के लिए हम किस तरह हस्‍तक्षेप कर सकते हैं।



 

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