आपके 'अपने' ही बन रहे हैं तलाक का कारण, हो जाएं सावधान

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Feb 21, 2018
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Quick Bites

  • स्मार्ट फोन है जो अब आपके रिश्ते की गर्माहट चुरा रहा है।
  • ओल्डर जनरेशन भी इस बीमारी का शिकार हो गई है।
  • बुजुर्गों ने भी खुद को बिजी रखने के लिए इसका सहारा लिया है।

टेक्नो-फ्रेंड्ली होना आज की जरूरत है और इसी चक्कर में अक्सर हम भूल जाते हैं कि यह टेक्नोलॉजी हमारे बेडरूम में घुसकर दांपत्य जीवन के हसीन पलों की कातिल बनती जा रही है। जब तक इसका एहसास होता है रिश्तों में खट्टास बढ़ जाती है। हम अपने रिश्तों का बनाए रखने के लिए क्या-क्या नहीं करते। एक दूसरे के साथ वक्त बिताते हैं और छोटी-छोटी चीजों में खुशी ढूंढते हैं लेकिन जब आमने-सामने होकर भी एक दूसरे से बात करने का मन न करे, दोनों अपनी-अपनी दुनिया में मग्न हों तो समझ लीजिए कि आपके बीच किसी तीसरे ने जगह बना ली है और यह तीसरा और कोई नहीं आपका स्मार्ट फोन है जो अब आपके रिश्ते की गर्माहट चुरा रहा है।

पति-पत्नी और फोन

किसी भी कपल के बीच 'वो' की एंट्री होने लगे तो रिश्ते के तार कमजोर पड़ने लगते हैं और इन दिनों स्मार्ट फोन रिलेशंस में तीसरा कोण बना हुआ है। लोगों पर इसका नशा इतना चढ़ चुका है कि पार्टनर की मौजूदगी में भी वे उससे बात करने की बजाय अपने फोन पर व्यस्त रहते हैं। एक स्टडी में बताया गया है कि जो कपल साथ वक्त बिताने के दौरान भी स्मार्टफोन यूज करते हैं उनके बीच विश्वास और गलतफहमियों पर हमेशा लड़ाई रहती है। ऐसे में कपल के बीच आई कॉन्टैक्ट भी कम होता है। जिससे भरोसा कमजोर पड़ता है। किसी भी रिलेशन की सफलता के लिए रिश्तों में एहसास का होना जरूरी होता है। इसके लिए स्पर्श, एक दूसरे से आई कॉन्टैक्ट बनाना जरूरी है और स्मार्टफोन यही चीजें हम से छीन लेता है।

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टेक्नोलॉजी ने बिगाड़े संबंध

एक बार अपना फोन चेक करें और देखें कि आखिरी बार पार्टनर को कॉल कब की थी। अब उस कॉल से लेकर अभी तक उसे किए गए मेसेज चेक करें। शायद आपको अपने बीच बढ़ती अनबन की वजह पता लग गई होगी। जब आप दोनों आपस में बात ही नहीं करेंगे और कुछ लिखे शब्दों के सहारे अपने रिलेशन को बढ़ाने का प्रयास करेंगे तो बात बनेगी कैसे! जरूरी नहीं कि जिस अर्थ के साथ आपने वह मेसेज भेजा हो, उसे वैसे ही समझ आए। झगड़ा हो तो मेसेज करने के बजाय मिलने का प्लैन करें या फोन पर बात करें। बात को जल्दी और आसानी से सुलझता देखकर आप भी हैरान हो जाएंगे।

रिश्तों पर भारी एप्स

स्मार्टफोन पर उपलब्ध अनगिनत एप्स के चलते पूरी दुनिया से कनेक्टिविटी बनी रहती है और हमेशा यह जानने का क्रेज रहता है कि उस फ्रेंड ने क्या पोस्ट डाली, कौन ऑनलाइन है, हमारी पोस्ट पर कितने लाइक्स आए। ऑनलाइन की इस दुनिया से हटकर हम असल जिंदगी के रिश्ते को कहां तक खो रहे होते हैं, इस का हमें पता ही नहीं चलता। नींद तब खुलती है जब रिश्तों में अलगाव की एक लंबी खाई बन जाती है।

टाइम फैक्टर

घर और ऑफिस की तमाम जिम्मेदारियों के बीच आप दोनों को वैसे ही साथ बिताने का व$क्त कम मिलता होगा और जो मिलता है उसे आप फोन पर बिता देते हैं। तो बताएं कि रिलेशन में $करीबी और अपनेपन का एहसास कैसे आएगा? जब ऐसी भावनाएं ही नहीं उमड़ेंगी तो रिश्ते को मजबूती कैसे मिलेगी? इसलिए जब भी साथ हों तो कुछ देर के लिए फोन से ब्रेक ले लें। वरना हो सकता है कि कुछ समय बाद साथ में सिर्फ मोबाइल रहे और आप समय पर रिलेशन न संभालने के लिए पछताते रहें।

नेट सर्फिंग एक बीमारी

ज्य़ादातर समय सोशल साइट पर सर्फिंग करते रहने से अकसर दूसरों की लाइफस्टाइल, उनके वेकेशन के फोटोज से हम अपनी लाइफ को कंपेयर करने लगते हैं और जब दूसरों की जिंदगी से खुद की तुलना करते हैं तो लगता है कि रिश्ते में कुछ कमियां हैं जिसके हम हकदार हैं वो हमें नहीं मिल रहा है और जब ये भावना मन में घर कर जाती है तो रिश्तों में खटास आ जाती है। इस खटास की शुरुआत होती है उलहाना से लेकिन बाद में यह गंभीर झगड़ों में बदल जाती है और कई बार तो इसके परिणाम इससे भी घातक होते हैं। रिश्ते टूटने के कगार पर पहुंच जाते हैं।

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दादा-दादी का साथी

मोबाइल पति-पत्नी में सिर्फ यंग जनरेशन ही नहीं ओल्डर जनरेशन भी मोबाइल नाम की इस बीमारी का शिकार हो गई है। एक वक्त था जब घर के बुजुर्ग अपने नाती-पोतों के साथ समय बिताते थे लेकिन अब न तो उनके पास समय है न बच्चों के पास। बुजुर्गों ने भी खुद को बिजी रखने के लिए वर्चुअल वल्र्ड का सहारा ले लिया है। सोशल नेटवर्किंग साइट पर अकाउंट बना कर वो अपने रिश्तेदारों, पुराने दोस्तों यहां तक कि अपनी क्लोज फैमिली से भी इसी के सहारे जुड़े रहते हैं।

छोटे बच्चे और मोबाइल

स्मार्टफोन सिर्फ दंपति का नहीं उनके बच्चों के लिए भी एक लत बन गया है। मां-बाप की देखादेखी बच्चा भी मोबाइल फोन की डिमांड करता है। उसे मोबाइल पर फोटो देखना, गेम खेलना अच्छा लगता है जिसके कारण उसकी आउटडोर एक्टिविटी पूरी तरह से खत्म हो जाती है। वह हर वक्त मोबाइल फोन में लगा रहता है। इससे बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास पर गहरा असर पड़ता है। बच्चे चिड़चिड़े और जिद्दी हो जाते हैं। बच्चे के विकास के लिए उसका फिलीकली एक्टिव होना जरूरी है लेकिन स्मार्टफोन उससे यह एक्टिविटी छीन रहा है।

सेहत का दुश्मन मोबाइल

काउसिल ऑफ यूरोप की एक रिसर्च में पाया गया है कि वायरलेस उपकरणों से निकलने वाली इलैक्ट्रोमैग्नेटिक किरणें कैैंसर पैदा कर सकती हैं साथ ही इनका मस्तिष्क के विकास पर बुरा असर होता है। मोबाइल के ज्य़ादा इस्तेमाल से सिरदर्द, थकान और त्वचा में जलन जैसी छोटी-छोटी बीमारियों का भी खतरा हो सकता है। मोबाइल से बार-बार सेल्फी लेना एक मनोरोग है, जिसका आदमी की पर्सनैलिटी पर नेगेटिव इफेक्ट पड़ता है।

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