क्या करें वजन घटता ही नहीं

By  ,  सखी
Jan 15, 2014
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Quick Bites

  • कार्बोहाइड्रेट्स का सेवन बिल्‍कुल ही बंद करना सही नहीं।
  • जरूरी है कि आप गुड बौर बैड फैट के अंतर को समझें।
  • नियमित व्‍यायाम करें इससे आपको काफी लाभ होगा।
  • कैलोरीज की सही गणना करके भी वजन करें काबू।

बहुत लोग इस फिक्र में जी रहे हैं कि कोशिशों के बावजूद वजन नहीं घटता। लेकिन आदर्श वजन हासिल करना इतना मुश्किल भी नहीं है। जानें, इस राह में हम क्‍या गलतियां करते हैं और कैसे एक सही बॉडी शेप पाया जा सकता है।

weight loss tips घंटो वॉक की, जिम गए, पसीना बहाया, एक्‍सरसाइज की, डायटिंग की, मगर वजन था कि टस से मस न हुआ...। आखिर 2-3 किलो वजन घटाना भी इतना मुश्किल कैसे हो जाता है?


स्लिम-ट्रिम होन किसे नहीं भाता। लेकिन, छरहरापन अब नॉस्‍टैल्जिया बन चुका है। वो भी क्‍या दिन थे जब दुबले पतले हुआ करते थे। 40 की उम्र पार करते ही 28 इंच की कमर को कमरा बनने में दरे नहीं लगती। सैलयुलाइट अपनी परते दिखा-दिखाकर चिढ़ाने को उतावला रहता है और वेइंग मशीन की सुई आगे बढ़ती जाती है। क्‍यों होता है ऐसा ? कहां गलती करते हैं हम ? आइए जानें वे कौन से सवाल हैं जो वजन घटाने की प्रक्रिया में हमारे मन में उठते हैं और इनके सही जवाब क्‍या हैं।

सवाल 1 - घटता नहीं वजन

डायटिंग के शुरुआती दौर में तात्‍कालिक लाभ होता है। वजन घटताहै तो खुशी का आलम नहीं रहता, लेकिन यह इसी पर टिका नहीं रहता। थेड़ी हेर-फेर होते ही यह फिर बढ़ जाता है। इसका एक कारण यह है कि डायटिंग के दौरान लोग अकसर कैलोरीज बहुत घटा देते हैं और इससे तुरंत वजन घटता है।

शुरुआत में यह फूड रिजेक्‍शन अच्‍छा लगता है, लेकिन जल्‍दी ही शरीर में किसी न किसी तत्त्‍व की कमी होने लगती है, जिसका नतीजा होता है डिप्रेशन, थकान और फटीग। आखिर व्‍यक्ति को फिर अपने पुराने शेड्यूल में लौटना पड़ता है। वजन घटाने में विफल होने पर इसका भावनात्‍मक प्रभाव भी गहरा होता है। यह इमोशनल मेंटल स्‍टेज व्‍यक्ति को ज्‍यादा खाने के लिए प्रेरित करती है, व्‍यक्ति जाने-अनजाने ज्‍यादा खाने लगता है और फिर अपने पुराने बॉडी शेप में वापस आ जाता है।

सवाल 2 - कैलोरीज का मेल


कितनी कैलोरीज ठीक है... यह सवाल हर डायटिंग करने वाले के मन में उठता है। सामान्‍य तौर पर एक व्‍यस्‍क पुरुष के लिए 1800 और स्त्रियों के लिए 1500 कैलोरीज ठीक समझी जाती है। डायटिंग के दौरान लगभग 500 कैलोरीज तक घटा दी जाती है। शोध बताते हैं कि डायटिंग में आमतौर पर लोग जिमिंग या एक्‍सरसाइजिंग के दौरान बर्न की गई कैलोरीज़ की गलत गणना करते हैं। जैसे, लोग मान लेते हैं कि जंक फूड से भरे संडे की एक शाम के लिए एक घंटा जिम में पसीना बहा लेना काफी है, जबकि ऐसा नहीं होता।


सवाल 3 -कार्बोहाइड्रेट्स का खेल

शरीर को ऊर्जा प्रदान करने के लिए कार्ब जरूरी है। 55 से 65 फीसदी कुल कैलोरीज हमें कार्बोहाइड्रेट से मिलती है। ये शरीर के लिए ईंधन की तरह हैं। डाइटिंग के दौरान कार्ब कम करने से ग्‍लाइकोजन स्‍तर घट जाता है और शरीर ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत अमीनो एसिड की ओर बढ़ता है। इससे मसल टिश्‍यू को हानि पहुंचती है। कार्ब कम करने से ज्‍यादा जरूरी मसल टिश्‍यूज को बचाना है। मेटाबॉलिज्‍म के लिए भी कार्ब अनिवार्य है। लैप्टिन और अन्‍य फैट बर्निंग हॉर्मोंस बॉडी फैट से सीधे जुड़े होते हैं। कार्ब बढ़ने पर लैप्टिन का स्‍तर बढ़ता है और शरीर का मेटाबॉल्जिम बढ़ता है। शरीर को कार्ब की उतनी ही जरूरत है जितनी कि किसी अन्‍य न्‍यूट्रीरंट्स की। इसलिए डाइटिंग में कार्ब को पूरी तरह कट न करें, लेकिन अपनी डाइट में रिफाइंड कार्ब जैसे मैदा और इसके प्रोडक्‍ट्स, शुगर, सफेद चावल के बजाय फल और सब्जियों की मात्रा बढ़ाएं ताकि कार्बोहाइड्रेट पर्याप्‍त मात्रा में मिलता रहे।

सवाल चार - फैट्स की मार


वजन घटाने का नियम यह है कि जितनी कैलोरीज बर्न कर सकते हैं, उसेस कम कैलोरीज लें। अगर दो किलो वजन कम करना हो तो लगभग 500 कैलोरीज घटानी होंगी या इतना व्‍यायाम करना होगा कि 500 कैलोरीज बर्न कर सकें। डायट में ऐसे खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दें, जिनसे कैलोरीज तो घटें लेकिन सेहत पर बुरा असर न पड़े। अच्‍छे और बुरे फैट के अंतर को समझना भी जरूरी है। रेड मीट के बजाय बींस, फैट-फ्री मिल्‍क प्रोडक्‍ट्स लेने से सैच्‍युरेटेड फैट कम होगा। ओमेगा-3 फैटी एसिड के लिए फिश, वॉलनट्स, सोयाबीन ऑयल का प्रयोग दिन में एक बार जरूर करें। भोजन में ताजी हरी सब्जियां और फ्रूट्स की मात्रा बढ़ा दें। डायट से चार फूड 'सीआरएपी' कट करें। ये हैं कैफीन, रिफाइंड शुगर, एल्‍कोहल और प्रोसेस्‍ड फूड।


चेकलिस्‍ट

  • नतीजे देखें, परखें और अपने फीडबैक से सीखें। देखें कि एक सप्‍ताह में ऐसी क्‍या गलती की जिससे वजन बढ़ा या किस प्रकार की डायट से वजन कम हुआ।
  • एक-दो महीने में पांच दस किलो वजन घटाने का सपना न देखें। ऐसा लक्ष्‍य बनायें जिसे हासिल कर सकें। पिछले दस वर्षों में वजन बढ़ने की प्रक्रिया के बारे में सोचें। हर साल कितने किलो वजन बढ़ा। जीवनशैली में आए बदलावों के बारे में भी सोचें। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठकर काम न करें। तनाव और दबाव घटायें।
  • 30 की उम्र के बाद नियमित वजन चैक करें। जैसे ही वजन एक-दो किलो बढ़े तुरंत उसे संतुलित करने के प्रयास में जुट जाएं।
  • डायटिंग के बजाय, सेंसिबल ईटिंग प्‍लान' के बारे में सोचें। इसे जीवनशैली का हिस्‍सा बनायें। एक सी ईटिंग हैबिट्स रखें।
  • डायरी नोट्स लिखें। अगर डार्क चॉकलेट का एक बड़ा पीस मुंह में डाला है, तो अगले मील में कितनी कैलोरी घटानी है, इसे भी ध्‍यान में रखें।

 

साभार- सखी

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