लंग कैंसर से हो सकती है सांस संबंधी समस्‍या

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 16, 2017
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Quick Bites

  • फेफड़े के कैंसर के मरीजों को कफ सामान्य की तुलना में ज्यादा आता है।
  • फेफड़े के कैंसर के मरीजों की सांस फूलने की शिकायत हो जाती है।
  • फेफड़े के कैंसर के मरीजों का स्वास्थ्य तेजी से गिरने लगता है।

जिस तेजी से प्रदूषण बढ़ रहा हैए उसी तेजी से फेफड़ों से सम्बंधित समस्याएं भी बढ़ रही हैं। यहीं नहीं फेफड़ों के कैंसर भी तेजी से अपने जड़ जमा रहे हैं। फेफड़ों के कैंसर के कारण मरीज को सांस लेने, बातें करने, काम करने आदि तमाम चीजों में समस्याएं आती हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि फेफड़े के कैंसर के मरीज को कैसी सतर्कता बरतनी चाहिए। साथ ही यह भी जानना आवश्यक है कि फेफड़े के कैंसर के बुनियादी लक्ष्ण क्या क्या हैंघ् असल में धूम्रपान भी इसकी एक बड़ी वजह है।


यदि फेफड़े के कैंसर के बारे में शुरुआती चरण में ही पता चल जाए तो इससे निजात पाया जा सकता है। फेफड़े के कैंसर के चलते श्वास लेने में किस किस प्रकार से समस्याएं आती हैं-

कफ

यदि आपको कभी कफ की समस्या नहीं रहती है लेकिन यकायक आपको बहुत अधिक कफ होने लगा है। साथ ही आप धूम्रपान की लत के शिकार हैं तो समझें कि यह लक्षण आपके लिए अच्छे संकेत नहीं है। कफ के कारण आपको सांस लेने में भी परेशानी महसूस होगी। असल में यह लंग कैंसर के ही संकेत हैं। यदि कफ ज्यादा हो और सांस लेने में समस्या आ रही हो तो बेहतर है कि जितनी जल्द हो डाक्टर से संपर्क करें। साथ ही यह भी ध्यान रखें कि एक सप्ताह से ज्यादा कफ की शिकायत न हो। ऐसा होने का मतलब है कि लंग कैंसर आपके शरीर में जड़ जमाने की शुरुआत कर चुका है।

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सांस उखड़ना

हालांकि अस्थमा के मरीज अकसर सांस फूलना या उखड़ने से दो चार होते हैं। लेकिन हर बार सांस उखड़ना अस्थमा की परेशानी होए ऐसा नहीं है। यदि आपकी सांस तेजी से चल रही हैए बार बार फूल रही है या फिर उखड़ रही है तो समझें कि यह फेफड़े के कैंसर की शुरुआत है। ऐसा होने पर तुरंत सतर्क हो जाएं। हालांकि इसे आप अस्थमा के लक्षण भी मान सकते हैं। लेकिन फेफड़े के कैंसर के दौरान भी ऐसा ही होता है। अतः लापरवाही कतईन बरतें।

 

लंग कैंसर

 

शरीर के कुछ हिस्सों में दर्द

फेफड़े के कैंसर के मरीज के शरीर के कुछ हिस्सों में दर्द होने लगता है। कई बार यह दर्द इतना खतरनाक रूप ले लेता है कि सांस लेते हुए भी तकलीफ होने लगती है। यदि ऐसा हो तो इसे भी फेफड़े के कैंसर के लक्षण के रूप में लें। फेफड़े के कैंसर के शुरुआती दौर में छाती, पीठ-कमर और मांसपेशियों में भयानक दर्द होता है। इस दर्द का भयानक असर नर्व सिस्टम पर भी पड़ता है। अतः पीठए छाती या कमर में दर्द महसूस हो तो इसे हल्के में कतई न लें। खासकर यदि सांस लेने के दौरान इन अंगों में दर्द की स्थिति और भी भयावह होती है।

 

लगातार स्वास्थ्य का गिरना

अकसर फेफड़े के कैंसर धूम्रपान करने वालों को ही होता है। हालांकि यह कोई नियम नहीं है। बहरहाल यदि धूम्रपान करने वालों को कैंसर हो तो उनके शरीर का विकास रुक जाता है जिससे उनके स्वास्थ्य में तेजी से गिरावट आने लगती है। उनकी कमजोरी इतनी ज्यादा होती है कि आसानी से उसे महसूस किया जा सकता है। ऐसे लोगों में डिप्रेशनए थकान तो होती ही है। साथ ही उनमें वजन भी तेजी से घटने लगता है।

 

न्यूमोनिया होना

फेफड़े के कैंसर के मरीजों को शुरुआती चरण में न्यूमोनिया होने का खतरा भी होता है। यही नहीं उन्हें ब्रोंकाइटिस भी हो सकता है। अतः यदि आपको न्यूमोनिया हो जाए तो इसे हल्के में न लें। इसके इतर फेफड़े के कैंसर की जांच करवाएं। असल में फेफड़े के कैंसर के मरीज को यदि न्यूमोनिया हो जाए तो उन्हें सांस लेने में भी परेशानी महसूस होने लगती है। ब्रोंकाइटिस होने की स्थिति में भी ऐसा ही होता है। वैसे भी विशेषज्ञों की मानें तो धूम्रपान करने वालों को यदि फेफड़े के कैंसर हो तो उन्हें सबसे पहले न्यूमोनिया या फिर ब्रोंकाइटिस ही होता है। हालांकि ये लक्षण हर प्रकार के कैंसर में नहीं देखे जाते।

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छाती भारी होना

यकायक आपको रात को सोते समय छाती भारी महसूस होने लगे या फिर छाती में घरघराहट होने लगे तो यह भी फेफड़े के कैंसर का ही लक्षण है। यही नहीं सांस लेते हुए मुंह से अलग अलग किस्म की आवाजें तक आने लगती है। ऐसा महसूस होता है कि जबरदस्त ठंड लगी है। जबकि ये फेफड़े के कैंसर के लक्षण होते हैं। कई लोग इसे स्लीपिंग डिसआर्डर मान लेते हैं। लेकिन यदि आपके साथ ऐसा पहले कभी नहीं हुआ तो बेहतर है बिना विलम्ब किये तुरंत डाक्टर के पास जाएं।

 

आवाज बदल जाती है

फेफड़े के कैंसर के मरीजों की आवाज धीरे धीरे बदलने लगती है। काफी हद तक इसे भारी कहा जा सकता है। वास्तव में फेफड़े के कैंसर के मरीजों में सबसे पहले कुछ लक्षणों में एक आवाज का भारी होना भी है। आमतौर पर लोग इसे जुकाम लगने के तौरपर लेते हैं। जबकि ये फेफड़े के कैंसर का लक्षण होता है। अतः ऐसा यदि कुछ भी देखने को मिले तो तुरंत टेस्ट करवाएं।

 

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