क्‍यों होती है स्‍पायडर वेन की समस्‍या

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 28, 2013
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Quick Bites

  • स्‍पायडर वेन की समस्‍या असामान्‍य ब्‍लड सर्कुलेशन के कारण होती है।
  • मोटापा भी स्‍पायडर वेन की समस्‍या का कारण बन सकता है।
  • स्‍पायडर वेन या नसों के दिखाई देने की समस्‍या वंशानुगत भी होती है।
  • खान-पान में बदलाव कर स्‍पायडर वेन की समस्‍या से राहत पाई जा सकती है।

क्‍या आपको भी स्‍पायडर वेन की समस्‍या है और आप अपनी टांगों को दूसरों को दिखाने में शर्म महसूस करती हैं। स्‍पायडर वेन एक ऐसा रोग है जिसमें टांगों, जांघों और पिण्‍डलियों पर रेड, ब्‍लू और परपल कलर की नसें दिखाई देती हैं। आपके शरीर का जो भाग इस समस्‍या से ग्रसित होता है वह देखने में भदृदा लगता है। करीब 50 फीसदी महिलाएं इस परेशानी से ग्रसित होती हैं। कुछ महिलाओं में स्‍पायडर वेन की शुरूआत 20 वर्ष की उम्र में ही हो जाती है, जबकि कुछ को यह परेशानी 40 वर्ष की उम्र में होती है। पुरुषों में भी यह समस्‍या होती है लेकिन उनके बालों के बड़े होने के कारण इस पर ध्‍यान नहीं जाता। इस समस्‍या को दवाईयों के माध्‍यम से ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन कुछ एहतियात से इसमें कमी जरूर की जा सकती है। इस लेख के जरिये हम आपको बताते हैं स्‍पायडर वेन के कारण और बचाव के तरीकों के बारे में।


स्‍पायडर वेन के कारण

स्‍पायडर वेन की समस्‍या का आपको कम से कम सामना करना पड़े, इसके लिए आपको पहले यह जानना होगा कि यह परेशानी क्‍यों होती है। स्‍पायडर वेन की समस्‍या निम्‍नलिखित कारणों से होती है।

बढ़ती उम्र

स्‍पायडर वेन की समस्‍या उम्र के बढ़ने के साथ होती है। नसें टांगों, भुजाओं और शरीर के अन्‍य भागों से खून को हृदय तक ले जाती हैं। उम्र बढ़ने के साथ ही नसों के वॉल्‍व कमजोर होते जाते हैं। वॉल्‍व कमजोर होने से नसों में ब्‍लड इकट्ठा हो जाता है़ इससे आपकी नसें बढ़ी हो जाती हैं और नसें दिखाई देने लगती हैं। यह अधिकतर टांगों पर दिखाई देती है।

वंशानुगत समस्‍या

स्‍पायडर वेन या नसों के दिखाई देने की समस्‍या वंशानुगत भी होती है। जिन लोगों को यह समस्‍या होती है, उनमें से आधे से अधिक लोगों के परिजनों को भी यह समस्‍या होती है। इसका तात्‍पर्य यह हुआ कि इस समस्‍या का उपचार किया जा सकता है लेकिन इसे जड़ से खत्‍म नहीं किया जा सकता।

 


प्रेग्‍नेंसी के दौरान

यह समस्‍या पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ज्‍यादा पाई जाती है। गर्भावस्‍था के दौरान महिलाओं में स्‍पायडर वेन की प्रॉब्‍लम देखने को मिलती है। प्रेग्‍नेंसी में महिलाओं की  नसों पर सामान्‍य दिनों के मुकाबले दबाव बढ़ जाता है और उनकी टांगो व पिण्‍डलियों पर स्‍पायडर वेन दिखाई देने लगती हैं। हालांकि यह बच्‍चे के जन्‍म के कुछ महीनों बाद दिखाई देनी बंद हो जाती हैं।


अधिक बैठना भी है कारण

यदि आप ऑफिस में ज्‍यादा देर तक बैठे रहते हैं यानी आपकी लाइफस्‍टाइल इस तरह की है तो आपको स्‍पायडर वेन की समस्‍या हो सकती हैं। ज्‍यादा देर तक बैठे रहने से बॉडी का ब्‍लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है।


मोटापा से हो सकती है समस्‍या

मोटापा भी स्‍पायडर वेन की समस्‍या का कारण बन सकता है। शरीर का ज्‍यादा वजन होने से नसों पर दबाव बढ़ता है और नसों को ब्‍लड ले जाने में ज्‍यादा मेहनत करनी पड़ती है।


चेहरे पर स्‍पायडर वेन की समस्‍या

नियमित रूप से ज्‍यादा समय तक सूरज की रोशनी में रहना से आपके चेहरे पर स्‍पायडर वेन की समस्‍या हो सकती है। चेहरे पर नसें त्‍वचा के एकदम पास होती है और ये कमजोर होने के बाद दिखाई देने लगती हैं।


स्‍पायडर वेन का उपचार


स्‍पायडर वेन की समस्‍या से ग्रसित लोगों के लिए बेहतर, स्‍थायी और लाभदायक उपचार प्‍लास्टिक सर्जरी है। प्‍लास्टिक सर्जरी से आप अपना खोया हुआ लुक फिर से वापस पा सकती हैं। इसके सा‍थ ही आप अपनी लाइफस्‍टाइल में भी कुछ बातों का ध्‍यान रखकर स्‍पायडर वेन की समस्‍या से बच सकती हैं।


ज्‍यादा समय तक बैठने से परहेज करें

जहां तक हो सके ज्‍यादा समय त‍क बैठे रहने या खड़े रहने से बचें। यदि आपकी जॉब ऐसी है कि आपको पूरे दिन खड़े रहना पड़ता है तो थोड़ी-थोड़ी देर में चहलकदमी करते रहें। लंच के बाद कुछ समय घूमने की कोशिश करें।


शरीर की स्थिति बदलते रहें

स्‍पायडर वेन की समस्‍या असामान्‍य ब्‍लड सर्कुलेशन के कारण होती है। इसलिए शरीर को ज्‍यादा समय तक एक स्थिति में न रहने दें। घंटों तक आलती-पालती मारकर बैठने से बचें। इसके अलावा ज्‍यादा समय तक घुटनों के बल बैठने से भी परहेज करें।


ऊंची हील न पहनें

सामान्‍य हील वाले फुटवियर का ही इस्‍तेमाल करें। यदि जरूरत भी हो तो ज्‍यादा ऊंची हील का यूज करने से बचना चाहिए। ऊंची हील पहनने से आपकी टांगों पर दबाव बढ़ जाता है और इससे आपके शरीर का रक्‍त प्रवाह प्रभावित होता है।


सनस्‍क्रीन का इस्‍तेमाल करें

घर या ऑफिस से बाहर निकलते समय अपने फेस की कोमल त्‍वचा के साथ ही टांगों और हाथों पर सनस्‍क्रीन लोशन का यूज करें। सनस्‍क्रीन लोशन स्‍पायडर वेन की समस्‍या से बचाव करता हैं।


खान-पान में बदलाव से बचाव

खान-पान में बदलाव करके भी स्‍पायडर वेन की समस्‍या से राहत पाई जा सकती है।


शरीर के वजन को मेनटेन रखें

स्‍पायडर वेन की समस्‍या से बचने के लिए जरूरी है कि आप अपने शरीर के वजन को ज्‍यादा न होने दें और मेनटेन रखें। वजन कम रहने से आपकी टांगें और पैर दोनों स्‍वस्‍थ्‍य रहेंगे। इसके लिए आपको खाने में संयमित भोजन लेना चाहिए।


कम नमक खाएं

खाने में कम नमक का इस्‍तेमाल करें और ज्‍यादा फाइबर वाली सब्जियां खाएं। इसके साथ ही परिष्‍कृत किए हुए फलों और पैक्‍ड खाने व जूस आदि के सेवन से भी बचें।

 

उपरोक्त चीज़ों के अलावा यदि आप पैदल नहीं चलते हैं तो नियमित व्‍यायाम आपके ब्‍लड सर्कुलेशन और स्‍वास्‍थ्‍य को बेहतर रखेगा। व्‍यायाम में ऐसी एक्‍सरसाइज का इस्‍तेमाल करें जिनसे आपके पैरों और टांगों का मूवमेंट हो।

 

Image Source - Getty 

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