जानें लड़कियों में क्‍यों बढ़ रही हैं पीसीओएस की समस्‍या

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 06, 2015
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Quick Bites

  • महिलाओं में होने वाली बहुत ही आम समस्‍या है।
  • मल्टीयसिस्टिक ओवरियन डिजीज भी कहा जाता है।
  • छोटी उम्र की लड़कियों में पीसीओएस की समस्‍या।
  • आहार में हरी-पत्तेदार सब्जियां और फलों को शामिल करें।

पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीसीओएस) महिलाओं में होने वाली बहुत ही आम समस्‍या है। पहले यह समस्‍या 30 साल से ज्‍यादा उम्र की महिलाओं में पाई जाती थी, लेकिन आज यह समस्‍या छोटी उम्र की लड़कियों में भी देखने को मिल रही है। डॉक्‍टरों के अनुसार, पीसोओएस की समस्‍या पिछले 10 से 15 सालों में दोगुनी हो गई है।

पीसीओएस महिला में होने वाली एक ऐसी समस्‍या हैं जिसमें अंडाशय में सिस्ट यानी गांठ आ जाती है। इसे मल्टीयसिस्टिक ओवरियन डिजीज भी कहा जाता है। अंडडिबों और हार्मोंस में गड़बड़ी इस बीमारी के मूल कारण होते हैं। यह बीमारी अनुवांशिक भी हो सकती है।
pcos in hindi

लड़कियों में पीसीओएस की समस्‍या

आजकल अनियमित पीरियड्स की समस्या किशोरियों में बेहद आम हो गई है। यही समस्या आगे चलकर पीसीओएस का रूप ले सकती है। पीसीओएस एंडोक्राइन से जुड़ी ऐसी स्थिति है जिसमें महिलाओं के शरीर में एंड्रोजेन्स या मेल हार्मोन अधिक होने लगते हैं। ऐसे में शरीर का हार्मोनल संतुलन गड़बड़ हो जाता है जिसका असर अंडों के विकास पर पड़ता है। इससे ओव्यूलेशन व मासिक चक्र रुक सकता है। इस तरह से सेक्स हार्मोन में असंतुलन पैदा होने से हार्मोन में जरा सा भी बदलाव मासिक धर्म चक्र पर तुरंत असर डालता है। इस अवस्‍था के कारण ओवरी में सिस्‍ट बन जाता है। इस समस्या के लगातार बने रहने से ओवरी के साथ प्रजनन क्षमता पर भी असर पड़ता है और तो और आगे चलकर यह समस्‍या कैंसर का रुप भी ले सकती है।

यह स्थिति सचमुच में घातक साबित होती है। ये सिस्ट छोटी-छोटी थैलीनुमा रचनाएं होते हैं, जिनमें तरल पदार्थ भरा होता है। अंडाशय में ये सिस्ट एकत्र होते रहते हैं और इनका आकार भी धीरे-धीरे बढ़ता चला जाता है। यह स्थिति पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिन्ड्रोम कहलाती है। और यही समस्या ऐसी बन जाती है, जिसकी वजह से महिलाएं गर्भ धारण नहीं कर पाती हैं।


पीसीओएस की समस्‍या के लक्षण

पीसीओएस के लक्षणों पर अक्‍सर लड़कियों का ध्‍यान नहीं जाता है। चेहरे पर बाल उग आना, अनियमित रूप से माहवारी आना, यौन इच्छा में अचानक कमी, गर्भधारण में मुश्किल होना, आदि कुछ ऐसे लक्षण हैं। इसके अलावा त्वचा संबंधी रोग जैसे अचानक भूरे रंग के धब्बों का उभरना या बहुत ज्यादा मुंहासे भी हो सकते हैं।


छोटी उम्र में पीसीओएस के कारण

मोटापा

आजकल मोटापे की समस्‍या बहुत ही आम हो गई है। हर दूसरा व्‍यक्ति ज्यादा वसा युक्त भोजन, व्यायाम की कमी और जंक फूड का सेवन करने के कारण मोटापे से ग्रस्‍त है। मोटापे के कारण आज छोटी उम्र की लड़कियों में भी पीसीओएस की समस्‍या पाई जाने लगी है। अत्यधिक चर्बी से एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा बढ़ने से ओवरी में सिस्ट बनता है। मोटापा कम करने से इस बीमारी को बहुत हद तक काबू में किया जा सकता है। बीमारी के बावजूद वजन घटाने से ओवरीज में वापस अंडे बनने शुरू हो जाते हैं।


खराब डाइट

जंक फूड शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं इसलिए जंक फूड, अत्यधिक तैलीय, मीठा व फैट युक्त भोजन खाने से बचें। साथ ही डायबिटीज भी इस बीमारी का बड़ा कारण हैं। इसलिए मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें। इसके बजाय अपने आहार में हरी-पत्तेदार सब्जियां और फलों को शामिल करें।


लाइफस्‍टाइल

तनाव और चिंता के चलते आजकल की लड़कियां अपने खान पान पर बिल्‍कुल ध्‍यान नहीं देती। साथ ही लेट नाइट पार्टी में ड्रिंक और स्‍मोकिंग लड़कियों की लाइफस्‍टाइल का हिस्‍सा बन गया है। इसलिए पीसीओएस की समस्‍या से बचने के लिए अपनी दिनचर्या को सही करना बहुत जरूरी है।

हार्मोंन को संतुलित करके पीसीओएस की समस्‍या को ठीक किया जा सकता है। इसके लिए लड़कियों को सही आहार और नियमित एक्सरसाइज को अपनाना होगा।

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Image Source : Getty
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