जांघों के आसपास रेशेज होने के कारण

By  , विशेषज्ञ लेख
May 29, 2014
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Quick Bites

  • बरसात के दिनों में अधिक होती है रेशेज की समस्‍या।
  • बिना देर किये डॉक्‍टर से इलाज करवाना ही बेहतर।
  • जननांगों और आसपास के क्षेत्र की पूरी सफाई रखें।
  • एलर्जी युक्‍त पदार्थों के उपयोग से दूर रहने में भलाई।

जांघों के बीच रेशेज हो जाना असामान्‍य नहीं है। गर्मियों और बारिशों में यह समस्‍या काफी अधिक होती है। लोग अकसर जननांगों और उसके आसपास के क्षेत्र की अनदेखी करते हैं, इस कारण यह समस्‍या और अधिक हो जाती है। इन क्षेत्रों में होने वाले रेशेज से खुजली हो सकती है, जो कई बार आपको असहज परिस्थिति में डाल सकती है।

जांघों की त्‍वचा हमेशा कवर रहती है। और इसके साथ ही यह त्‍वचा के मोड़ों और कपड़ों के लगातार संपर्क में बनी रहती है। इस कारण इस हिस्‍से की त्‍वचा में काफी नमी होती है। यदि अंगवस्‍त्र और कॉस्‍मेटिक अच्‍छी क्‍वालिटी के न हों, तो आपको बहुत समस्‍यायें हो सकती हैं।


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फंगल इफेक्‍शन, कास्‍मेटिक से एलर्जी, कपड़ों से एलर्जी, और अन्‍य उत्‍पादों से एलर्जी होना शरीर के इस हिस्‍से में रेशेज होने का बड़ा कारण होता है। कुछ अन्‍य लेकिन असामान्‍य कारणों में यौन संचारित रोग, और साइक्लिंग और जॉगिंग जैसी गतिविधियां भी शामिल हैं। इसके अलावा सोरायसिस, एक्जिमा और इम्‍पेटिगो जैसी त्‍वचा संबंधी बीमारियों के कारण भी रेशेज हो सकते हैं।

आमतौर पर लोग शरीर के इस हिस्‍से की सफाई पर पूरा ध्‍यान नहीं देते और ऐसे में उन्‍हें संक्रमण हो जाता है। लेकिन, समस्‍या तब अधिक हो जाती है, जब लोग इस बारे में डॉक्‍टर से बात करने में भी संकोच करते हैं। वे अपने आप ही इस परेशानी का निजात पाने की कोशिश करते हैं। अपना इलाज खुद करना कई बार बेहद खतरनाक हो सकता है। ऐसा करने से इस हिस्‍से की त्‍वचा में स्‍ट्रेच मार्क, त्‍वचा का छिलना, त्‍वचा पतली होना और रंग असंगति भी हो सकती है।

फंगल इंफेक्‍शन

बरसात और गर्मियों के दिनों में यह समस्‍या होना काफी सामान्‍य है। यह कैंडिडा अल्‍बीकैन्‍स नामक फंगस के कारण होता है। यह वृत्‍ताकार में फैलता है और इससे त्‍वचा में खुजली होने की आशंका बढ़ जाती है। सही दवाओं के इस्‍तेमाल से इसका इलाज आसानी से किया जा सकता है। हालांकि, इसके इलाज में थोड़ा समय लगता है। लेकिन, इलाज पूरा किया जाना बेहद जरूरी होता है। इसकी पुनरावृत्ति हो सकती है। इसलिए इलाज के बाद भी डॉक्‍टर से बात करना जरूरी होता है।


संक्रमण के अतिरिक्‍त अन्‍य कारण

जांघों पर अतिरिक्‍त चर्बी, नियमित और लंबे समय तक साइकिल चलाने या जॉगिंग करने से इस हिस्‍से में अतिरिक्‍त नमी और रगड़ होने लगती है। लगातार इस रगड़ से त्‍वचा में रेशेज हो सकते हैं। इससे फंगल और अन्‍य संक्रमण हो सकते हैं। कई बार महिलाओं को सेनेटरी पैड से भी जांघों के आसपास संक्रमण हो सकता है।

पाउडर, डियोड्रेंट, अंगवस्‍त्र धोने के लिए इस्‍तेमाल होने वाले डिटर्जेंट पाउडर के एलर्जी के कारण भी जांघों के बीच के ग्रोइन एरिया में रेशेज हो सकते हैं। कई बार हेयर रिमूवर्स, शेविंग क्रीम और सेनेटरी पैड से भी संक्रमण होने की बातें सामने आई हैं।
कई बार बच्‍चों को नैपी रेश हो जाते हैं। जब बच्‍चा अधिक समय तक गीली नैपी पैड के संपर्क में रहता है, तो उसे ऐसी परेशानी हो सकती है। कुछ बच्‍चों को नैपी में इस्‍तेमाल होने वाले पदार्थ से एलर्जी होती है और इस कारण भी उन्‍हें रेशेज हो सकते हैं।

किसी अन्‍य बीमारी के संकेत के रूप में

सोरायसिस और एक्जिमा जैसी त्‍वचा संबंधी बीमारियों के कारण शरीर के कई हिस्‍सों में रेशेज हो जाते हैं। इस बीमारियों के मरीजों को जांघों के अंदरूनी हिस्‍सों पर भी रेशेज हो सकते हैं। यहां रेशेज होना शरीर के अन्‍य भागों में रेशेज होने के समान ही होता है।
बहुत दुर्लभ मामलों में यौन संचारित रोग जैसे हरपस के कारण गुप्‍तांगों में रेशेज हो सकते हैं।

रेशेज से जुड़े अन्‍य लक्षण इस प्रकार हैं

1. प्रभावित क्षेत्र में लालिमा
2. खुजली
3. फफोले होना
4. जलन
5. चलते समय असहजता और दर्द होना

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रेशेज का इलाज उसके कारण पर निर्भर करता है। रेशेज की समस्‍या बढ़ने से पहले ही उसका इलाज किया जाना जरूरी है। इसलिए जैसे ही आपको लक्षण नजर आएं, फौरन डॉक्‍टरी सहायता लीजिए। इस सब लक्षणों का इलाज काफी लंबा चलता है, तो इलाज को बीच में ही बंद नहीं किया जाना चाहिए। रेशेज का कारण जानकर ही इलाज किया जाता है। डॉक्‍टर तय करता है कि आपको एंटी-फंगल, स्‍टेरायड, एंटी-एलर्जी अथवा अन्‍य किस प्रकार के इलाज की जरूरत है।

दवाओं के बिना प्रबंध

इसमें आपको ग्रोइन एरिया की साफ-सफाई पर पूरा ध्‍यान देना चाहिए। इसके अलावा विटामिन ई का ऑइंटमेंट, ऑलिव ऑयल और नीम जैसे तत्‍वों से सफाई आदि का काम भी किया जा सकता है। ये किसी हद तक बहुत कारगर होते हैं। लेकिन, बिना डॉक्‍टरी सलाह के इनका भी इस्‍तेमाल नहीं करना चाहिए।

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