रजोनिवृति के बाद रक्तस्राव

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 21, 2013
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रजोनिवृति के बाद रक्तस्राव की समस्या एक गंभीर समस्या की ओर संकेत हो सकता है। कई मामलों में यह हार्मोन के बदलाव के कारण होता है लेकिन कभी-कभी यह सर्वाइकल कैंसर का संकेत भी हो सकता है। ऐसे में तुरंत से डॉक्टर से संपंर्क करें। शुरुआती अवस्था में इसका इलाज इस रोग को पूरी तरह से खत्म कर सकता है। रजोनिवृति के बाद रक्तस्राव के कारणों को जानें।  

 

 

 

पॉलीप्स

 

यह नॉन कैंसर होता है जो कि यूट्रस में या सर्वाइकल कैनेल में विकसित हो सकता है जिसकी वजह से रक्तस्राव शुरु हो जाता है।

 

एंडोमेट्रियल अट्रोफी

 

एंडोमेट्रीयम एक प्रकार का ऊतक है जो गर्भाशय की सतह पर होता है। रजोनिवृति के बाद यह काफी पतला हो सकता है क्योंकि इस दौरान एस्ट्रोजेन का स्तर गिर जाता है जिसकी वजह से रक्तस्राव हो सकता है।

 

 

 

एंडोमेट्रियल हाइपरप्लासिया

 

इस अवस्था में गर्भाशय की सतह काफी मोटी हो जाती है परीणाम यह होता है कि सामान्यत: एस्ट्रोजेन ज्यादा हो जाता है व प्रोजेस्ट्रोजेन कम हो जाता है। यह भी रक्त रक्तस्राव का एक कारण हो सकता है। साथ ही मोटापा भी इस समस्या की एक वजह है।

 

गर्भाशय के कैंसर

 

रजोनवृति के बाद रक्तस्राव गर्भाशय के कैंसर का संकेत हो सकता है।

 

 

 

अन्य कारण

 

रजोनिवृत्ति के बाद की जाने वाली हार्मोंन थेरेपी, गर्भाशय व सर्विक्स में संक्रमण आदि।

 

रक्तस्राव किस वजह से हो रहा है इसके पीछे क्या कारण है जानने के लिए आपका ड़ॉक्टर कुछ जांच करवा सकता है। जानिए क्या है ये जांच-

 

ट्रांसवजाइनल अल्ट्रासाउंड

 

इस टेस्ट में योनि के अंदर एक ऐसी इमेजिंग डिवाइस डाली जाती है जिससे डॉक्टर पैल्विक अंगों व अन्य समस्याओं को देखकर उसका पता लगा सकें।

 

एंडोमेट्रियल बॉयोप्सी

 

इसमें एक पतली सी ट्यूब गर्भाशय के अंदर डाली जाती और गर्भाशय के सतह का एक छोटा सा सैंपल लेते हैं जिसे लैब में टेस्ट के लिए भेजा जाता है।

 

 

हीस्ट्रोस्कोपी

 

इस टेस्ट के दौरान डॉक्टर एक यंत्र के साथ छोटे व हल्के कैमरे का प्रयोग करते हैं जिससे गर्भाशय में होने वाली समस्याओं का पता लगाया जाता है।

 

इलाज

रक्तस्राव होने के कारण पता चलने के बाद ही इसका उपचार किया जा सकता है। अगर पॉलीप्स की शिकायत होती है तो उसे सर्जरी के जरिए निकाल दिया जाता है। एंडोमेट्रियल हाइपरप्लासिया इलाज के जरिए व प्रोजेस्टेरोन थेरेपी के जरिए ठीक किया जा सकता है।

 

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