प्रोटीन कैलोरी कुपोषण क्या है

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 02, 2012
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अविकसित देशों में बढ रही मौतों का एक बड़ा कारण प्रोटीन कैलोरी कुपोषण (पीसीएम) है। इसे प्रोटीन ऊर्जा कुपोषण (पीईएम) के नाम से भी जाना जाता है। शरीर को जब पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन और पोषण नहीं मिलता है तब पीसीएम की स्थिति आ जाती है। पीसीएम की दो स्थितियां होती हैं – मारास्मास और क्वाशियोरकोर। प्रोटीन कैलोरी कुपोषण (पीसीएम) मारास्मस (शरीर के आकार में वृद्धि रुकना और शरीर बेकार होना) और क्वाशियोरकोर (प्रोटीन की कमी) जिसमें त्वचा क्षतिग्रस्त होती है। पीसीएम के कारण न्यूमोनिया, चिकेनपॉक्स या खसरा से मौत का खतरा अधिक होता है। यह बीमारी बच्चों में अधिक देखने को मिलती है

पीसीएम के कारण –

क्वाशियोरकोर और मारास्मस शरीर की वृद्धि के लिए जरूरी अमीनो एसिड की कमी के कारण होती है। क्वाशियोरकोर आमतौर पर एक साल तक की उम्र के बच्चों में होती है। बच्चों में यह स्थिति तब आती है जब बच्चे को स्तनपान से अलग कर प्रोटीन की कमी वाला पोषणयुक्त खाद्य-पदार्थ (मांड़ या चीनी-पानी का घोल) दिया जाता है। वैसे यह बीमारी बच्चों के शारीरिक विकास के समय कभी भी हो सकती है। मारास्मस 6 से 18 महीने की उम्र के बच्चों को होती है जिनको स्तनपान नहीं कराया जाता है। बच्चों को जब डायरिया जैसी गंभीर बीमारी होती है तब भी मारास्मस होने की संभावना ज्यादा होती है।


पीसीएम के लक्षण –

  • पीसीएम से ग्रस्त बच्चे अपनी उम्र से कम दिखते हैं क्योंकि उनका शारीरिक और मानसिक विकास नहीं हो पाता है। ऐसे बच्चों को एनोरेक्सिया और डायरिया जैसी बीमारी हमेशा घेरे रहती है।
  • पीसीएम से गंभीर रूप से पीड़ित बच्चे लंबाई में छोटे, सुस्त और रूखी त्वचा वाले होते हैं। उनकी त्वचा ढीली होती है और बाल भी कम उगे होते हैं जो कि भूरे या लाल-पीले होते हैं। उनके शरीर का तापमान हमेशा कम रहता है।
  • पीसीएम से ग्रस्तक बच्चों  की नब्ज की गति धीमी होती है और सांस लेने की रफ्तार भी कम रहती है। ऐसे बच्चे कमजोर, गुस्सैल और हमेशा भूखे होते हैं। हालांकि, उनमें ऐसे बच्चों को जी मिचलाने और उल्टी के साथ अपच की शिकायत हो सकती है।
  • मारास्मस के विपरीत क्वाशियोरकोर में मरीज के शरीर के आकार में वृद्धि तो होती है लेकिन उसकी त्वचा सूखती जाती है क्योंकि उसके शरीर की चर्बी शरीर की ऊर्जा की जरूरतों को पूरा नहीं कर पाती है।
  • पीसीएम में त्वचा का रूखापन, त्वचा का उखड़ना और खुजली जैसी समस्याएं सामान्य हो जाती हैं। जो मरीज दूसरी श्रेणी के पीसीएम से ग्रसित होते हैं उनमें भी मारास्मस जैसे लक्षण होते हैं और उनके शरीर की त्वचा बेकार होने लगती है तथा वे क्रमिक ढंग से सुस्त पड़ जाते हैं।

 

उपचार -
पीसीएम की समस्या से जूझ रहे लोगों को ठोस खाद्य-पदार्थ देने के बजाय प्रोटीन और कैलोरीयुक्त तरल पेय पदार्थ ज्यादा मात्रा में देना चाहिए। ऐसे लोग जिनको डायरिया हो उनको दही ज्यादा मात्रा में प्रयोग करना चाहिए। इसके अलावा किसी चिकित्सक से परामर्श लेकर इलाज कराना चाहिए।


शरीर को जब भरपूर मात्रा में प्रोटीन और कैलोरी नहीं मिलती है तब पीसीएम की समस्या होती है। खास बात यह है कि भारत के कई ऐसे भाग हैं जहां पर बच्चों को भरपूर पोषण नहीं मिलता है और कुपोषण के कारण कई मौते हो रही हैं। शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण अंचलों में मौतों की संख्या ज्यादा होती है।

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