प्रोस्‍टेट कैंसर के उपचार के लिए सर्जरी

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Feb 27, 2013
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Quick Bites

  • प्रोस्‍टेट कैंसर की समस्‍या उम्रदराज लोगों को अधि‍क होती है।
  • पेशाब करने में दिक्‍कत होना प्रोस्‍टेट कैंसर का प्रमुख लक्षण है।
  • प्रोस्टेट ग्रंथि को हटाने की प्रक्रिया को प्रोस्टेक्टोमी कहा जाता है।
  • कुछ मामलों में आपरेशन के द्वारा अंडकोष को हटा दिया जाता है।

प्रोस्टेट पुरुषों में पाई जाने वाली एक ग्रंथि है, जो में कई छोटी ग्रंथियों से मिलकर बनी होती है। यह ग्रंथि पेशाब के रास्‍ते को घेर कर रखती है और उम्र बढ़ने के साथ प्रोस्टेट ग्रंथि के ऊतकों में गैर-नुकसानदेह ग्रंथिकाएं विकसित हो जाती है।

जिसके कारण धीरे-धीरे ग्रंथि के आकार में वृद्धि होने लगती है, और समस्या तब उत्पन्न होती है जब प्रोस्टेट का आकार इतना बढ़ जाता है कि मूत्रमार्ग पर दबाव पड़ने लगता है। दबाव से अक्सर पेशाब करने के बाद भी ऐसा महसूस होता है कि पूरा पेशाब बाहर नहीं आ रहा है और बार-बार पेशाब करने की इच्छा होती है। दबाव पड़ने से पेशाब के साथ रक्त भी निकल सकता है। इसलिए प्रोस्‍टेट कैंसर में सर्जरी करना जरूरी हो जाता है, आइए जानें कि प्रोस्टेट कैंसर के लिए इस्तेमाल की जानी वाली सर्जरी के विभिन्न प्रकार। आपका डॉक्टर कौन सी सर्जरी आपके लिए चुनते है वह कई बातों पर निर्भर करता है जैसे कैंसर का आकार, फैलाव, स्‍टेज, लक्षण, स्‍वास्‍थ्‍य और कोशिकाएं माइक्रोस्कोप में कैसी दिखती है आदि।

 prostate cancer in Hindi

प्रोस्टेट ग्रंथि हटाना

प्रोस्टेट ग्रंथि को हटाने की प्रक्रिया को प्रोस्टेक्टोमी या रेडिकल प्रोस्टेक्टोमी भी कहा जाता है। इस सर्जनी में आपके सर्जन आपके पेट में कट करके प्रोस्टेट निकालता है, इस सर्जरी को छेद सर्जरी के रूप में किया जाता है। प्रोस्टेट हटाने से कैंसर का इलाज हो जाता है लेकिन अगर यह प्रोस्टेट ग्रंथि से बाहर फैल नही गया हो तो।

 

अंडकोष हटाना

इस आपरेशन में दोनों अंडकोष हटा दिया जाता है जिससे वे टेस्टोस्टेरोन का उत्पादन नहीं कर सकते। टेस्टोस्टेरोन एक हार्मोन है, जो प्रोस्टेट कैंसर को विकसित करने मे मदद करता हैं। अंडकोष निकालना स्थानीय रूप से उन्नत कैंसर को हटने या बढ़ने से रोकता हैं। स्थानीय रूप से उन्नत कैंसर प्रोस्टेट ग्रंथि के आसपास के क्षेत्र में फैलने लगता है। अंडकोष हटाना प्रोस्टेट कैंसर का इलाज नहीं करता है, लेकिन इसे नियंत्रित किया जा सकता है कई महीनों या कभी-कभी वर्षों के लिए।

 

ट्रांस्‍यूरेथरल रिजेक्‍शन

ट्रांस्‍यूरेथरल रिजेक्‍शन के दौरान आपके सर्जन मूत्रमार्ग के आसपास से प्रोस्टेट ग्रंथि के भीतरी क्षेत्र के हिस्से को हटा देते है। सर्जन इस प्रक्रिया को करने के लिए मूत्रमार्ग के माध्यम से आपके लिंग के ऊपर एक पतली ट्यूब गुजर देता है। इस आपरेशन से मूत्र त्याग करने में असमर्थ होने वाले इस तरह के लक्षण से दूर हो जाते है।

इसके अलावा अब प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित पुरुषों के लिए खुशखबरी है। इस रोग से ग्रस्त व्यक्ति अब पारंपरिक सर्जरी और रेडियोथेरेपी की जरूरत नही है, यह सब हाई इंटेंसिटी फोकस्ड अल्ट्रासाउंड (एचआईएफयू) या प्रोस्टेटिक आर्टरी इबोलाइजेशन (पीएई) के जरिए संभव है। आजकल यह तकनीके प्रोस्टेट कैंसर से ग्रस्त रोगियों का इलाज करने में सबसे अधिक कारगर है, क्योंकि इसके साइड इफेक्ट भी नहीं हैं।

 

हाई इंटेंसिटी फोकस्ड अल्ट्रासाउंड

इस विधि से इलाज के लिए सबसे पहले प्रोस्टेट कैंसर से ग्रस्त व्यक्ति का एमआरआई कराया जाता है। फिर अल्ट्रासाउंड तरगों से बढ़ी हुई कैंसरग्रस्त प्रोस्टेट ग्रंथि को गर्म कर खत्म कर दिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में सामान्यत: सिर्फ एक दिन का समय लगता है। इस प्रकार मरीज को अस्पताल में रहने की जरूरत नहीं होती, लेकिन अगर ग्रंथि अनुमान से अधिक बढ़ी है तो दो दिन भी लग सकता है।

prostate cancer in Hindi 

प्रोस्टेटिक आर्टरी इबोलाइजेशन

बढ़ी हुई प्रोस्टेट ग्रंथि के इलाज के लिए एक नयी सर्जरी विकसित हुई है, जिससे ओपेन सर्जरी की तुलना में बेहतर परिणाम हासिल हो रहे हैं। इस तकनीक को प्रोस्टेटिक आर्टरी इबोलाइजेशन (पीएई) कहा जाता है। इंबोलाइजेशन का आशय है कि जहां प्रोस्टेट ग्रंथि की आर्टरी विकारग्रस्त होती है, उसे एक खास दवा (पीवीए) के द्वारा बंद कर दिया जाता है। इबोलाइजेशन को लोकल एनेस्थीसिया देकर किया जाता है। यह प्रकिया एंजियोग्राफी की ही तरह है। इसमें फीमोरल आर्टरी के द्वारा एक पतला कैथेटर प्रोस्टेटिक आर्टरी तक ले जाते है। इस प्रक्रिया की समाप्ति के 6 से 8 घंटे के बाद रोगी अपने को ठीक महसूस कर सकता है।

 

Image Source - Getty Images

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