गर्भधारण में हो समस्‍या, कहीं आप ऑटोइम्‍यून की शिकार तो नहीं

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 25, 2014
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Quick Bites

  • लगभग 8 करोड़ महिलायें एंडोमेट्रिओसिस से पीड़‍ित।
  • प्रतिरक्षा प्रणाली का स्‍वस्‍थ ऊत्तकों पर हमला करना।
  • ऑटोइम्‍यून रोग, पीओए या पीसीओ का भी कारण।
  • ब्‍लड शुगर टेस्‍ट से प्रतिरक्षा प्रणाली पर नियंत्रण।

असामान्‍य प्रतिरक्षा प्रणाली महिलाओं की गर्भधारण की क्षमता पर विपरीत प्रभाव डालती है। इतना ही नहीं इससे गर्भपात का खतरा भी बढ़ जाता है। दुनिया भर में लगभग 40 लाख महिलायें प्रीक्‍लैंपसिया से पीड़‍ित होती हैं। इस रोग में रक्तचाप जानलेवा स्‍तर तक बढ़ जाता है। वहीं लगभग 8 करोड़ महिलायें एंडोमेट्रिओसिस से पीड़‍ित होती हैं। यह एक रोग है जो गर्भावस्‍था के अस्‍तर को प्रभावित करता है।

ऑटोइम्‍यून यानी प्रतिरक्षा प्रणाली का अधिक सक्रिय होकर स्‍वस्‍थ ऊत्तकों पर हमला करने लगती है। इस रोग के लगभग 75 फीसदी मामले महिलाओं में देखने को मिलते हैं। प्रसव के दौरान यह रोग सबसे अधिक होता है। कई अध्‍ययन प्रजनन को एंडोमेट्रिओसिस, पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम (पीसीओ), समय से पहले डिम्बग्रंथि की उम्र बढ़ना(पीओए), इडिओपथिक इनफर्टिलिटी को ऑटोइम्‍यून रोगों के साथ जोड़ते हैं।

autoimmune disease in hindi

जिस स्थिति में इम्‍यून सिस्‍टम शरीर के अंदरूनी अंगों, ऊतकों और अंगों पर हमला करता है, वह शुक्राणु और भ्रूण पर भी हमला कर सकता है। इससे वह गर्भाधान और गर्भावस्‍था में कठिनाई उत्‍पन्‍न करता है। इसके अलावा ऑटोइम्‍यून रोगों से ग्रस्‍त महिला का शरीर उसे अपने ही अंडाशय पर हमला करने और पीओए या पीसीओ का भी कारण बनता है।

ऐसी परिस्‍थ‍िति में शरीर स्‍वयं के ऊत्तकों पर हमला करने लगता है। इससे गर्भावस्‍था की क्षमता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

 

ऑटोइम्यून रोग प्रजनन क्षमता को कैसे प्रभावित करता हैं?

 

कई महिलाओं को फर्टिलिटी से संबंधित मुद्दों का सामना करना पड़ता है, लेकिन उन्‍हें यह नहीं पता कि उनकी समस्‍या ऑटोइम्‍यून आधारित है। इस समस्‍या से जुड़े कुछ लक्षण इस प्रकार हैं।

  • पाचन क्रिया में गड़बड़ी  
  • आवर्ती बीमारियों
  • त्वचा पर चकत्ते
  • रक्त शर्करा से जुड़ी समस्‍याएं (जैसे हाइपोगलेसेमिया)
  • एलर्जी
  • अत्यधिक थकान
  • मांसपेशियों, जोड़ों का दर्द और ध्यान में मुश्किलें

 

प्रतिरक्षा प्रणाली को नियंत्रित करने के उपाय

एंटीबॉडी जांच करें

नियमित रूप से अपने थायरॉयड एंटीबॉडी की जांच करवाइये। इससे आपको ऑटोइम्‍यून थायराइड रोगों की उपस्थिति के बारे में जानकारी मिलती है।

ब्‍लड शुगर टेस्‍ट

आपको नियमित रूप से डायबिटीज की भी जांच करवानी चाहिये। अगर आप टाइप 1 डायबिटीज या पीसीओ जैसी किसी ब्‍लड शुगर संबंधित विकार से पी‍ड़ि‍त हैं, तो ऑटो इम्‍यून का खतरा बढ़ जाता है। यह जानने के लिए आपको फास्टिंग में ग्‍लूकोज और हीमोग्लोबिन ए 1 सी का टेस्‍ट करवाना चाहिए।

सीलिएक एंटीबॉडी टेस्‍ट

यह बात जानना आपके लिए बहुत महत्‍वपूर्ण है। अगर आप एंटीबॉडी नहीं भी ले रहे हैं तब भी आप ग्लूटेन से ग्रस्‍त हो सकते हैं। इसलिए आपके लिए  सीलिएक एंटीबॉडी टेस्‍ट करवाना जरूरी है।

pregnancy and autoimmune in hindi

प्रतिरक्षण के लिए आहार

ऐसे खाद्य पदार्थ को चुनें जो जैविक, पौष्टिक और एंटीऑक्‍सीडेंट युक्त हों और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, सोया उत्पादों और ग्‍लूटेन आदि से बचें।

खुद से प्‍यार करें

खुद के प्रति व्‍यवहार को नोटिस करें और इसे बेहतर करने की कोशिश करें। इसके अलावा अपनी विशेषताओं और गुणों को पहचानें और सराहें। इसके लिए आप ध्‍यान और सांस के अभ्‍यास का सहारा लें। हर सांस के साथ प्‍यार को अंदर लें और नकारात्‍मक भावनाओं को बाहर निकालें।

प्रोबायोटिक्स लें

प्रोबायोटिक्स (पाचन तंत्र में पाया जाने वाला अच्छा बैक्टीरिया) आपके शरीर में अच्छे और बुरे बैक्टीरिया के प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ पाचन में मदद करता है और आपके प्रतिरक्षा को भी बढ़ावा देता हैं।

इन सुझावों को नियमित रूप से उपयोग आपको प्रतिरक्षा प्रणाली के प्रबंधन, समग्र स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता में सुधार करने में बहुत मददगार साबित हो सकता है। यह सुझाव पूर्ण रूप से प्राकृतिक हैं और आपके स्वास्थ्य पर इसका कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ता।

image courtesy : getty images

 

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