प्रेग्नेंसी का पता लगाने के लिए होती है यूरीन और एचसीजी हॉर्मोन की जांच

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 09, 2012
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Quick Bites

  • एचसीजी हार्मोन के कारण मासिक चक्र बाधित होता है।
  • कई बार यह स्तर बहुत अधिक होता है तो कई बार कम।
  • प्रेग्नेंसी में एचसीजी की मात्रा समय पर घटती-बढ़ती है।
  • यूरीन के नमूने से एचसीजी का पता लगाया जा सकता है।

woman doing pregnancy testप्रेग्नेंसी टेस्ट में एचसीजी नामक हार्मोन की मौजूदगी को जांचा जाता है। यह आमतौर पर गर्भवती महिला में बनने वाला हार्मोन है यही वह हार्मोन है जिससे भ्रूण का विकास होता है। प्रेग्नेंसी में एचसीजी की मात्रा समय-समय पर घटती बढ़ती रहती है। प्रेग्नेंसी की शुरुआत में एचसीजी का स्तर कम होता है, लेकिन जैसे-जैसे समय बढ़ता जाता है, वैसे-वैसे इसका स्तर भी बढ़ जाता है।

 

गर्भावस्था के हार्मोन का महत्व

जब एक बार ब्लास्टोसिस्ट या निषेचित अंडे का गर्भाशय में प्रत्यारोपण हो जाता है तो वह हिस्सा विकसित होकर नाल का रूप ले लेता है जो एचसीजी का निर्माण शुरू कर देता है। इस हार्मोन के कारण गर्भाशय रक्त को बहने नही देता। इसी के चलते महिलाओं का मासिक चक्र बाधित होता है। यह रक्त बाद में बच्चे के विकास और पौष्टिकता के लिए प्रयोग होता है। एचसीजी स्तर में वृद्धि का गर्भावस्था परीक्षण में आसानी से पता लगाया जा सकता है।

कई बार यह स्तर बहुत अधिक होता है तो कई बार कम। गर्भवती महिला में गर्भावस्था की प्रगति के साथ ही उच्च स्तर एचसीजी की आवश्यकता होती है, लेकिन कई महिलाओं में एचसीजी का स्तर कम होने लगता है। इस स्थिति में उन्हें हर सप्ताह एचसीजी का इंजेक्शन तब तक दिया जाता है जब तक उच्च स्तर एचसीजी न हो जाए। ऐसे में गर्भावस्था की जांच समय-समय पर करना जरूरी होता है।

 

गर्भावस्था हार्मोन की पहचान

  • मूत्र परीक्षण प्रेग्नेंसी किट द्धारा घर पर ही गर्भावस्था परीक्षण करके एचसीजी का पता लगाया जा सकता है।
  • जब इस हार्मोन का पता लगाने के लिए प्रेग्नेंसी परीक्षण प्रयोगशाला में किया जाता है, तो खून या मूत्र के नमूने से एचसीजी का पता लगाया जा सकता है। रक्त परीक्षण अधिक संवेदनशील होता हैं और विश्वसनीय परिणाम देता है।
  • परीक्षण जो प्रेग्नेंसी का जल्दी पता लगाने का दावा करता है एचजीसी वेरिएंट का पता लगाने में सक्षम हैं। इन वेरिएंट को एचसीजी एच कहा जाता है।


एचसीजी का प्रयोग प्रेग्नेंसी टेस्ट के लिए भी किया जाता है। पहले ट्राइमेस्टर में उच्च‍ स्तर एचसीजी हार्मोन की आवश्यकता बहुत ज्यादा नहीं होती, लेकिन जैसे-जैसे प्रेग्नेंसी का समय बढ़ता जाता है, एचसीजी का स्तर भी बढ़ता जाता है। प्रेग्नेंसी के प्रारंभिक एचसीजी का स्तर कैसा भी हो लेकिन एचसीजी इंजेक्शन से इसे सामान्य किया जा सकता है। एचसीजी इंजेक्शन गर्भवती महिलाओं के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है। एचसीजी का स्तर यदि गर्भवती महिलाओं में कम होता है तो गर्भपात होने का खतरा भी रहता है। इसीलिए गर्भावस्था में देखभाल सही रूप में होना जरूरी है। दरअसल रक्त जांच से एचसीजी की मात्रा का पता लगाया जा सकता है। शुरूआत में इसकी संख्या 500 यूनिट तक होती है लेकिन बाद में 10 हजार और उससे भी ज्यादा तक हो जाती है। एचसीजी का स्तर

गर्भवती महिलाओं के इम्यून सिस्टम और उनके रहन-सहन पर भी निर्भर करता है। अगर आप गर्भवती हैं और आपका परीक्षण नकारात्मक परिणाम दिखा रहा हैं, तो यह एचसीजी के निम्न स्तर के कारण है। टेस्ट से आप सबसे अच्छे गर्भावस्था के हार्मोन का पता लगा सकते हैं अगर टेस्ट आरोपण के कुछ समय बाद किया हो।

 

 

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