क्‍या होता है जब आप स्‍वास्‍थ्‍य को नजरअंदाज कर जॉब को देते हैं प्राथमिकता

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 18, 2016
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Quick Bites

  • नौकरी को तवज्जो देने वाले अकसर बोझिल रहते हैं।
  • स्वास्थ्य को दरकिनार करने वाले मोटापे का शिकार होते हैं।
  • स्वास्थ्य की अनदेखी कर अवसाद को न्यौता देते हैं।
  • हर समय नौकरी की सोचने वाले तमाम किस्म के दर्द से घिरे रहते हैं।

एक रोज सुबह राजेंद्र जब सोकर उठा तो वह कुछ परेशान था। उसे वजह समझ नहीं आयी। वह उठकर बाथरूम गया और कुछ देर खुद को आयने में देखता रहा। कुछ देर बाद उसने महसूस किया कि वह पिछले एक माह से लगातार बीमार चल रहा है, क्लीनिक के सैकड़ों चक्कर लगा चुका है। यही नहीं दोस्तों के साथ मुलाकात और मस्ती के नाम पर उसके पास कुछ नहीं था। मतलब यह कि उसकी सामाजिक और पारिवारिक जिंदगी का पूरी तरह से खात्मा हो चुका था। अब आलम यह था कि न तो उसे दोस्त फोन करते थे और न ही वह किसी के पास जाना पसंद करता था।

राजेंद्र अकेला ऐसा व्यक्ति नहीं है जो इस तरह की सामाजिक, पारिवारिक और स्वास्थ्य सम्बंधी समस्या से रूबरू हो रहा था। मौजूदा समय में हर व्यक्ति इसी तरह की स्थिति से दोचार है। हालांकि कुछ लोगों को इसके परिणाम देर से मिलते हैं तो कुछ इस चक्रव्यूह में ऐसे फंस चुके हैं कि निकलने का रास्ते खोजने में उलझे हैं। दरअसल प्रतिस्पर्धा का स्तर इतना ज्यादा बढ़ चुका है कि हम अपने स्वास्थ्य को भी तरजीह नहीं देते हैं। जबकि ऐसा करना अपने आप से बेमानी करने जैसा है। अपने आपको धोखा देने जैसा है। अपने आपसे नफरत करने जैसा है। जी, हां! इस लेख में हम यही चर्चा करेंगे कि यदि आप स्वास्थ्य से बड़ी नौकरी को समझ रहे हैं तो समस्याओं के समंदर में डूब रहे हैं।

 

बोझिल

जब आप स्वास्थ्य से ज्यादा अपनी नौकरी को तरजीह देते हैं तो हमेशा बोझिल रहते हैं। बोझिल सिर्फ काम के चलते नहीं वरन स्वास्थ्य के चलते भी ऐसा महसूस करते हैं। वास्तव में आपके पास अपने लिये समय नहीं होता। आप न तो खानपान पर ज्यादा ध्यान देते हैं और न ही अपने बिगड़े स्वास्थ्य पर। ऐसी स्थिति में हम चैबीस घंटे बोझिल महसूस करते हैं। नतीजतन शरीर में ऊर्जा की भरसक कमी बनी रहती है।

 

मोटापा

काम के बोझ के चलते आपका खानपान और जीवनशैली तो बिगड़ ही गई है। ऐसे में मोटापा आपसे ज्यादा दिनों तक दूर नहीं रह पाता। आपकी तमाम कोशिशों के बावजूद मोटापा आपको घेर लेता है। असल में स्वास्थ्य से ज्यादा नौकरी को तवज्जो देने वालों के साथ ऐसा ही होता है। मोटापा से पार पाना हो तो व्यायाम और जीवनशैली में नियंत्रण बेहद जरूरी है। साथ ही काम से ज्यादा खुद से प्यार करना जरूरी है।

 

दर्द

मौजूदा समय में ज्यादातर लोगों का काम कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठने का रह गया है। ऐसे में कई किस्म के दर्द आकर हमें अपनी चपेट में ले लेते हैं। इसमें कमर दर्द, गर्दन दर्द, पीठ दर्द से लेकर हाथ और अंगुलियों के दर्द तक शामिल हैं। यही नहीं घुटने भी इस दर्द से अछूते नहीं हैं। मतलब यह कि यदि आप अपने शरीर को सक्रिय नहीं रखते हैं तो तमाम किस्म के दर्द आपकी जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बन जाते हैं।

 

आंखों की तकलीफ

हमारी आंखें दिनभर कंप्यूटर स्क्रीन देखने के लिए नहीं बनी हैं। बावजूद इसके हम आवेर टाइम करते हैं, ज्यादा से ज्यादा कमाने और दूसरों को पछाड़ने के लालच में कंप्यूटर स्क्रीन को ही अपनी दुनिया बना लेते हैं। हैरानी की बात तो यह है कि कंप्यूटर स्क्रीन मनोरंजन का जरिया भी बन गया है। ऐसे में आंखों में कई किस्म की तकलीफों का होना लाजिमी है मसलन आंखों से पानी, आंखों में सूजन, खुजली आदि।

 

अवसाद

स्वास्थ्य से ज्यादा नौकरी को तवज्जो देने वाले सिर्फ शारीरिक बीमारियों से ही नहीं जूझते। उन्हें मानसिक बीमारी भी घेरे रहती हैं। अवसाद ऐसी ही एक बड़ी समस्या है। वास्तव में जीवन में दोस्तों का न होना, काम के बोझ के तले दबे रहना, सामाजिक जिंदगी का खात्मा होना आदि तमाम चीजें अवसाद को पैदा करती है। ऐसे में जरूरी यह है कि नौकरी से ज्यादा अपनी चाहतों को तवज्जो दें।

 

तनाव

स्वास्थ्य की ओर जब हम ध्यान नहीं देते हैं तो तनाव का हमारे साथ चोली दामन का साथ हो जाता है। दरअसल तनाव एक ऐसी चीज है जो छोटी छोटी चीजों पर हमारे पास आ जाता है। दफ्तर में देर से पहुंचना से लेकर काम समय पर न होना, सहकर्मी का न आना जैसी छुटपुट बातें भी हमें तनाव से भर देती हैं। ऐसी स्थिति तभी आती है जब हम अपने आपसे ज्यादा अपनी नौकरी की चिंता करते हैं। अब वक्त आ गया है कि इस तरह के तनाव से खुद को दूर रखा जाए।

 

कमजोरी

हर समय काम, काम और काम के बारे में सोचने वाली भीतरी रूप से कमजोर रहते हैं। दरअसल उनका खानपान और जीवनशैली के कारण वे अंदर तक कमजोरी का एहसास करते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए उन्हें काम के बजाय अपने स्वास्थ्य को तवज्जो देना चाहिए।

 

 

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