जानिये कैसे भुजंगासन शरीर को रखता है एनर्जेटिक

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 17, 2015
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Quick Bites

  • भुजंगासन में शरीर की स्थिति सर्प के जैसी हो जाती है।
  • भुजंगासन करने से शरीर मजबूत और सुडौल बनता है।
  • यह आसन फेफड़ों और कब्‍ज की शिकायत दूर करता है।
  • इसे करते वक्‍त तेजी से पीछे की तरफ बिलकुल न झुकें।

शरीर को स्‍वस्‍थ रख बीमारियों को दूर करने का सबसे प्रभावी तरीका है योग, योग में हर रोग का न सिर्फ इलाज छिपा है बल्कि यह आपको ऊर्जा भी प्रदान करता है। योग के कई आसनों में से एक है भुजंगासन। इस आसन में शरीर की आकृति फन उठाए हुए भुजंग अर्थात सर्प जैसी बनती है इसीलिए इसको भुजंगासन या सर्पासन कहा जाता है। यह आसन पेट के बल लेटकर किया जाता है। इस आसन से शरीर को सुडौल बनाता है। इसके बारे में विस्‍तार से जानने के लिए यह लेख पढ़ें।

 

 

 

कैसे करें यह आसन

भुजंगासन करने के लिए उल्टे होकर पेट के बल लेट जाए। एड़ी-पंजे मिलाकर रखें, ठोड़ी फर्श पर रखें, कोहनियां कमर से सटी हुई और हथेलियां उपर की ओर होनी चाहिए। अब धीरे-धीरे हाथ को कोहनियों से मोड़ें और हथेलियों को बाजूओं के नीचे रख दें। फिर ठोड़ी को गरदन में दबाते हुए माथा भूमि पर रखे। उसके बाद नाक को हल्का-सा भूमि पर स्पर्श करते हुए सिर को आकाश की ओर उठाए। जितना सिर और छाती को पीछे ले जा सकते है ले जाए किंतु नाभि जमीन से लगी रहे। 20 सेकंड तक इसी स्थिति में रहें। बाद में श्वांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे सिर को नीचे लाकर माथा जमीन पर रखें। छाती भी भूमि पर रखें। पुन: ठोढ़ी को जमीन पर रखें।

भुजंगासन के लाभ

इस आसन के नियमित अभ्‍यास से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है और पीठ में लचीलापन आता है। यह आसन फेफड़ों की शुद्धि के लिए भी बहुत अच्छा है और जिन लोगों का गला खराब हो, दमा हो, पुरानी खांसी अथवा फेंफड़ों संबंधी अन्य कोई बीमारी हो, उनको यह आसन करना चाहिए। इस आसन से पित्ताशय की क्रियाशीलता बढ़ती है और पाचन-प्रणाली की कोमल पेशियां मजबूत बनती है। इससे पेट की चर्बी घटाने में भी मदद मिलती है और आयु बढ़ने के कारण से पेट के नीचे के हिस्से की पेशियों को ढीला होने से रोकने में सहायता मिलती है।

इससे बाजू मजबूत होते हैं। पीठ में स्थित इड़ा और पिंगला नाडि़यों पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। विशेषकर, मस्तिष्क से निकलने वाले ज्ञान तंतु बलवान बनते हैं। पीठ की हड्डियों में रहने वाली तमाम समस्‍यायें दूर होती हैं। यह कब्‍ज की शिकायत दूर करता है।
Practice Bhujagasana in Hindi

थोड़ी बरतें सावधानी

भुजंगासन करते वक्‍त अकस्मात् पीछे की तरफ बहुत अधिक न झुकें। इससे आपकी छाती या पीठ की मांस-‍पेशियों में खिंचाव आ सकता है तथा बांहों और कंधों की पेशियों में भी बल पड़ सकता है जिससे दर्द होने की संभावना बढ़ती है। पेट में कोई रोग या पीठ में अत्यधिक दर्द हो तो यह आसन न करें।

भुजंगासन का नियमित अभ्‍यास करके आप अपनी मानसिक क्षमता बढ़ाकर अपने शरीर को सुडौल बना सकते हैं।

 

Image Source - Getty

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टिप्पणियाँ
  • cp saini23 Oct 2015

    the best idea for ayurvedic treatment

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