एसिडिटी को दूर करने के असरकारी उपाय

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 26, 2013
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Quick Bites

  • एसिडिटी की बड़ी वजह हमारा खानपान।
  • व्‍यायाम की कमी और तैलीय भोजन है बड़ा कारण।
  • माइग्रेन तक हो सकता है एसिडिटी के कारण।
  • संतरा और पपीते जैसे फल होते हैं लाभकारी।

कई स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याएं ऐसी होती हैं, जिन्‍हें हम खुद ही न्‍योता देते हैं। हमारे आहार और रोजमर्रा की बुरी आदतें ही कई बार हमारी बिगड़ती सेहत की वजह होती हैं। एसिडिटी भी एक ऐसी समस्‍या है, जिसकी बड़ी वजह हम खुद होते हैा।


एसिडिटी से बचने के उपायएसिडिटी की बड़ी वजह हमारा आहार होता है। यदि हम अपने भोजन के प्रति सावधानी बरतें तो काफी हद तक इस समस्‍या से बच सकते हैं। आम बोलचाल की भाषा में एसिडिटी को समझें तो यह केवल आंतों में उत्‍पन्‍न होने वाली अम्‍ल की अधिकता है।

 

तेज रफ्तार भागती जिंदगी, खाने-पीने का वक्‍त तय न होना और देर रात तक जागते रहने जैसे ऐेसे तमाम कारण हैं, जो पेट में एसिडिटी पैदा करते हैं। गरमी के मौसम में यह कुछ ज्‍यादा ही परेशान करती है।

एसिडिटी कई बार कुछ ही देर में स्‍वत: ठीक हो जाती है तो घबराने की कोई बात नहीं। लेकिन, इसके लगातार बने रहने पर अल्‍सर, पेट की गड़बड़ी जैसी कई परेशानियां स्‍थायी तौर पर रह सकती हैं।

 

इसके साथ ही व्‍यक्ति को भोजन के प्रति अरुचि, अनिद्रा और यहां तक कि माइग्रेन जैसी तकलीफें भी हो सकती हैं। कई बार ऐसा भी देखा गया है कि लोग एक-दो दिन नहीं, बल्कि बरसों तक इस बीमारी से पीड़ित रहते हैं।

आमतौर पर हम एसिडिटी के मूल कारणों की ओर ध्‍यान ही नहीं देते। एसिडिटी आंतों में किसी तरह का संक्रमण, अल्सर या लिवर की समस्‍या के कारण हो सकती है।

 

कैसे निपटें एसिडिटी से


संतुलित आहार और व्‍यायाम को अपने जीवन का हिस्‍सा बनाकर आप एसिडिटी को काफी हद तक काबू कर सकते हैं। हमें पर्याप्‍त नींद लेनी चाहिए। साथ ही नियत समय पर सोने व जागने से भी आप एसिडिटी को रोक सकते हैं। तेज दौड़ती जिंदगी में अपने जीने का अंदाज बदलना भी आपके लिए मुफीद रहेगा।

 

भोजन के तुरंत बाद न सोएं

वक्‍त की कमी के चलते हमारा भोजन और नींद दोनों पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। आहार-विशेषज्ञ मानते हैं कि हमारे रात के भोजन और सोने के बीच सही अंतर होना जरूरी है। इससे पाचन क्रिया को पूरा होने का वक्‍त मिलता है। लेकिन, हम अक्‍सर भोजन करते ही सो जाते हैं। इससे खाना पूरी तरह पच नहीं पाता और पेट में अम्‍ल बनने लगता है। इसलिए आपको चाहिए कि सोने से कम से कम दो घंटे पहले रात का भोजन कर लें।


तीन नहीं छह बार खायें

तीन बार भरपेट खाने की जरूरत नहीं। जब आप दिन में तीन बार भोजन करते हैं, तो आपका पेट लंबे समय तक खाली रहता है। ऐसे में पेट में अम्‍ल बन सकता है। जरूरत इस बात की है कि आप दिन में तीन के बजाय छह बार भोजन करें। आपका भोजन संतुलित और सुपाच्‍य ही होना चाहिए और इसमें तैलीय खाद्य पदार्थ न ही हों, तो अच्‍छा। इससे आपका पेट भी सही रहेगा और साथ ही आपको अतिरिक्‍त वजन कम करने में मदद मिलेगी।


एरोबिक्‍स और व्‍यायाम

व्‍यायाम सेहत की कुंजी है। अगर आप नियमित व्‍यायाम करते हैं, तो इससे आपका चयापचय अच्‍छा बना रहता है। नियमित रूप से एरोबिक्‍स व्‍यायाम करने से पाचन क्रिया दुरुस्‍त होती है। खाना अच्‍छे से पचता है और पेट संबंधी तकलीफें नहीं होतीं। साथ ही आप शारीरिक रूप से भी अधिक स्‍वस्‍थ रहते हैं।

 

आहार जो करे एसिडिटी पर वार


टमाटर

कैल्शियम, फास्फोरस व विटामिन-सी भरपूर टमाटर शरीर से जीवाणुओं को बाहर निकालने में मदद करता है। एसिडिटी में टमाटर खाने से लाभ मिलता है। इसका नियमित सेवन एसिडिटी से लंबे समय तक राहत दिलाता है। स्‍वाद में खट्टा होने के बावजूद टमाटर शरीर में क्षार की मात्रा बढ़ाता है। इसीलिए इसके सेवन से एसिडिटी नहीं बढ़ती।

 

संतरा

संतरे में मौजूद फ्रक्टोज, डेक्स्ट्रोज, खनिज एवं विटामिन शरीर में पहुंचते ही ऊर्जा प्रदान करने लगते हैं। संतरे का नियमित सेवन एसिडिटी से राहत पाने का उत्तम उपाय है।

 

पपीता

पपीता पचने में आसान है। इससे आमाशय तथा आंत संबंधी विकारों में बहुत लाभ मिलता है। पपीता कब्ज, गैस, एसिडिटी व कफ जैसे रोगों में लाभकारी होता है।

 

अमरूद

अमरूद कब्ज और एसिडिटी दोनों के लिए लाभकारी है। इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन, फाइबर व मिनरल होते हैं। फाइबरन की अधिकता के कारण यह कब्‍ज दूर करने में सहायक होता है।

 

जामुन

जामुन को दवा के तौर पर खाया जा सकता है। पेट के रोगों में जामुन का सेवन काफी लाभकारी होता है। खाली पेट जामुन खाने से गैस व एसिडिटी की समस्या से निजात मिलती है।

बड़े बुजुर्ग कहते हैं कि जीभ का स्‍वाद कई बीमारियों की जड़ होता है। अच्‍छी सेहत के लिए जरा से स्‍वाद को दरकिनार करना महंगा सौदा नहीं। फिर भी अगर आपको लगता है कि स्‍वाद सेहत से ज्‍यादा कीमती है, तो मर्जी आपकी है...

 

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