50 की उम्र के बाद हो सकती हैं ये मनोवैज्ञानिक समस्यायें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 18, 2015
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Quick Bites

  • 50 के बाद पुरूषों को होने लगती है मनोवैज्ञानिक समस्यायें।
  • शरीर में बदलते और असंतुलित होते हार्मोंस है इसका कारण।
  • महसूस होने लगती है असुरक्षा, हो जाते है काफी संवेदनशील।
  • बढ़ती उम्र के साथ नए शौक पालना सीखें, दोस्त बनाएं।

ऐसा देखा गया है कि अकसर काम और जिम्मेदारी से मुक्त होने के बाद लोग अपने भविष्य को लेकर तरह -तरह की दुशचिंताओं में पड़ जाता है और उसे कई तरह की मानसिक या मनोवैज्ञानिक समस्याएं घेर लेती है। उम्र के दूसरे पड़ाव में होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं एक बहस का मुददा हो सकती है। इस उम्र में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और उसकी प्रकृति के अनुसार उससे लड़ने के लिए डॉक्टर बहुत सारे सलाह दे सकते है। मध्य उम्र में  होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं 30 की उम्र पार करने और 50 के पहले तक शुरू हो सकती है। यह स्थित कई तरह की  बीमारियों के लक्षण को प्रकट होने का संकेत देती है लेकिन यह निश्चिंत करना बड़ा कठिन होता है कि ये समस्याएं शरीर में हार्मोंस के असंतुलित होने से होता है या मानसिक स्थिति से।

क्या होते है इसके कारण

रिटायरमेंट के बाद पुरूषों का अपने दैनिक जीवन और दिनचर्या में काफी बदलाव करना पड़ता है। अपनें जीवन में होने वाले इस बदलाव से वह काफी विचलित हो जाता है। जीवन के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण इसे इस बदलाव के अनुकूल उसे ढालने में मदद करता  है।जिन लोगों की पहचान उनकी नौकरी या व्यवसाय से जुड़ी रहती है वैसे लोगों को सेवानिवृति के बाद मानसिक तौर पर अस्वस्थ्य होने की संभावना अधिक रहती है। जिन लोगों में बढती उम्र का एहसास कुछ ज्यादा होता है और वह देखने में भी बुढे लगने लगते है उनमें स्वंय को लाचार और असहाय समझने जैसी हीन भावना आ जाती है। जो लोग अपनी उम्र बढने के साथ अपनी नौकरी पेशा से रिटायर होने के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं होते है, उन लोगों में सेवानिवृति के बाद  खास तौर पर भावनात्मक समस्याएं और प्रकट होने लगती है।

इससे होने वाले खतरे

उम्र बढने के साथ ही पुरूषों में जीवन के प्रति अनिशचित्ता, भ्रम और एक नाकारात्मक भाव पैदा होने लगता है जो कई तरह की बीमारियों का वाहक बनता है।  इस के कई कारण हो सकते है। उम्र बढने के साथ अचानक मरने का विचार मन में आने लगना। अपने जीवन में होने वाले बदलावों के प्रति असंतुष्ठि का भाव और कुछ अधुरे सपने और दमित इच्छाओं को पानेे की अपेक्षाएं। अपने परिवार में पत्नी, बच्चे या किसी अन्य इष्ट की मौत हो जाने या किसी सहकर्मी की मौत से भी व्यक्ति व्यथित हो जाता है।  बढती उम्र में पत्नी से तलाक आदि की स्थित पैदा होने पर भी व्यक्ति इस तरह के मानसिक  पीड़ा का अनुभव करता है। रिटायमेंट के बाद अपनी जिम्मेदारी और पहचान के संकट से उत्पन्न खतरे के कारण भी आदमी मानसिक रूप से दुखी हो जाता है।परिवार में बच्चों द्वारा अपने माता पिता  को घर में अकला छोड़ कर खुद अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रहने की बढती प्रवृति के कारण भी बूढे लोगों में एक तरह से असुरक्षा का भाव पनपने लगता है। वह भावनात्मक रूप से काफी संवेदनशील हो जाता है। इसी कमी को दूर करने के लिए अकसर वृद्ध लोग अपनी उम्र के लोगों के साथ समय गुजारने लगते है और अपनी परेशानी और दुशचिंताओ को एक दूसरे से शेयर करते है।



उम्र बढने  के बाद अपनी नौकरी पेशा से रिटायरमेंट होने के लिए समय रहते ही खुद को मानसिक रूप से तैयारी करना शुरू कर दे। आप अपने रिटायरेमेंट के कुछ माह पहले से ही अपने काम को करने में मजा लेने और काम के प्रति थोड़ा कंम गंभीर या कहे तो लापरवाह बन कर पहले से सेवानिवृति की प्रेक्टिस कर सकते है।

 

Image Source-Getty

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टिप्पणियाँ
  • A.C.Verma10 Feb 2013

    My elder daughter is a doctor and now working in a government hospital. She got married 8 month ago. Her husband is also MBBS doctor, he belongs a rural middle class family and his personality is not impressive. My daughter is very angry-nature, She wants to improvement in his personality but did not discussed with him on this matter. Her behaviour is very abnormal, stopped talking with all relatives and inlaws. She tries to find shortcomings in her husband and inlaws, can you help on this matte

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