प्रदूषण की मार जारी, दिल्ली पर केमिकल निमोनिया का कहर

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 09, 2016
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दिल्ली में फैले प्रदूषण ने सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और हवा को इस कदर प्रदूषित किया है कि अब इसका असर नई बीमारियों के रूप मं सामने आ रहा है। अब तक न्यूमोनिया बैक्टीरिया के कारण ही होता रहा है लेकिन अब दिल्ली पर छाई प्रदूषण की धुंध की वजह से लोगों में केमिकल न्यूमोनिटिक्स या केमिकल निमोनिया की समस्या सामने आ रही है। दिवाली में की गई जबर्दस्त आतिशबाजी और दिल्ली पर छाए स्मॉग रूपी प्रदूषण ने लोगों के फेफड़ों को बीमार करना शुरू कर दिया है।

केमिकल न्यूमोनिटिक्स केमिकल निमोनिया के नाम से भी जाना जाता है जिसका मतलब होता है जहरीले तत्वों का सांस द्वारा फेफड़ों में पहुंचना और उसकी वजह से होने वाला न्यूमोनिया, इसी वजह से इसे केमिकल न्यूमोनिया कहा जाता है, जिसके लिए सीधे तौर पर प्रदूषित हवा जिम्मेदार होती है। दिल्ली में प्रदूषण कितने खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है इसका उदाहरण पहली बार सामने आ रहे केमिकल न्यूमोनिया से हो जाता है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के ऑक्यूपेशनल और एनवायरमेंट हेल्थ एंड केमिकल सेफ्टी के सलाहकार डॉ. टीके जोशी के मुताबिक, राम मनोहर लोहिया, सफदरजंग हॉस्पिटल और ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) जैसे सरकारी अस्पतालों ने दिवाली के बाद केमिकल निमोनिया के कई केसों के बारे में रिपोर्ट दी है।

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डॉक्टर जोशी ने बताया कि पिछले कई वर्षों में ये पहली बार है कि केमिकल न्यूमोनिटिक्स के मामले सामने आए हैं। यह डरावनी स्थिति है और इस बात का संकेत है कि पटाखों ने खतरनाक स्तर का प्रदूषण पैदा किया है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय वायु प्रदूषण पर कई स्तरों की बैठक कर रहा है और हम जल्द ही इस स्थिति से निपटने के लिए कोई परिणाम लेकर सामने आएंगे।

डॉक्टर्स का कहना है कि दिवाली के पटाखों और दिल्ली पर छाए प्रदूषण के स्मॉग की वजह से लोगों के फेफड़ों पर बुरा असर पड़ रहा है। उनका कहना है कि स्मॉग में कॉर्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड मैगनीज डाइऑक्साइड, जिंक ऑक्साइड और नाइट्रेट्स मौजूद होते हैं जोकि फेफड़ों में जलन पैदा करके न्यूमोनिटिक्स का कारण बनते हैं।

डॉक्टर्स के मुताबिक स्मॉग में मौजूद पटाखों के केमिकल्स सांस के द्वारा फेफड़ों में पहुंचकर उसकी जकड़न का कारण बनते हैं जिसकी वजह से फेफड़ों के लिए शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई में बाधा पहुंचती है। अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए तो इससे सांस संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, फेफड़ों का कैंसर हो सकता है और यहां तक कि पीड़ितों की मौत भी हो सकती है।

 

दिवाली के पटाखों में सोडियम, मर्करी, बेरियम, कैडमिडम, नाइट्रेट और जैसे घातक हवा को प्रदूषित करने वाले तत्व मौजूद होता हैं, जिनसे बुखार, त्वचा में जलन, उल्टी, अनिंद्रा, दिल की समस्याएं, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं। दिवाली के बाद से ही दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में केमिकल न्यूमोनिटिक्स के कई मामले सामने आए हैं।

 

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