पीएमएस और गर्भावस्था के लक्षणों में होते हैं यह अंतर

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 18, 2013
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Quick Bites

  • चिड़चिड़ापन, थकान और सूजन आदि हैं पीएमएस के प्रमुख लक्षण। 
  • अधिकांशतः माहवारी से पहले ही दिखाई देते है पीएमएस के लक्षण। 
  • कार्यशैली, वातावरण और सोच पर निर्भर करते हैं गर्भावस्था के लक्षण।
  • दोनों अवस्थाओं में महिला के शरीर को होती है ज्यादा विटामिन की जरूरत।

प्री मेंस्रूअल सिंड्रोम और गर्भावस्था दोनों ही महिलाओं को होने वाली अवस्थाएं हैं। ये महिलाओं में लगातार होने वाले हार्मोंस परिवर्तन के बाद आरंभ होती है। इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कि पीएमएस और गर्भावस्था लक्षण में क्या अंतर होते हैं।

pms aur garbhawasha lakshan me antarप्री मेंस्रूअल सिंड्रोम या पीएमएस और गर्भावस्था दोनों में ज्‍यादातर लक्षण एक जैसे होते है। आपको गर्भावस्था के शुरूआती लक्षणों को पहचानने के लिए विशेष रूप से संतर्क रहने की आवश्यकता है। क्‍योंकि कभी-कभी महिलाओं में गर्भावस्‍था के लक्षण जैसे चिड़चिड़ापन, स्तन की कोमलता और ऐंठन, पीएमएस के लक्षणों के जैसे होते हैं। इसलिए आपको पता होना चाहिए कि गर्भावस्था के लक्षण को पीएमएस से अलग कैसे करना हैं। आइए जानें पीएमएस और गर्भावस्था के लक्षणों में क्या अंतर हैं। 

 

 

क्या है पीएमएस-

महिलाओं में महावारी से पहले एक से दो सप्ताह के दौरान होने वाला शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक बदलावों को पीएमएस सिंड्रोम यानी प्री मेंस्रूअल सिंड्रोम कहते है। पीएमएस के लक्षण माहवारी से पहले ही दिखाई देते है और माहवारी की शुरुआत होने के बाद ये लक्षण खत्म हो जाते है। दरअसल, पीएमएस पहली बार शुरू होने वाली महावारी के लक्षण है। जब किसी लड़की को पहली बार माहवारी होती है तो उसमें कुछ हार्मानल बदलाव आते हैं जो माहवारी आरंभ होने से लगभग 2 सप्ताह पहले आते हैं। इन आने वाले बदलावों को ही पीएमएस कहा जाता है।

 

पीएमएस के लक्षण-

लड़कियों में प्री मेंस्रूअल सिंड्रोम के लक्षण उनकी प्रकृति और स्वभाव पर निर्भर करते हैं। लेकिन आमतौर पर चिड़चिड़ापन, थकान और सूजन ही पीएमएस के मुख्य लक्षण है। पीएमएस के दौरान और भी कई लक्षण नजर आते है। जैसे-

 

 

•    शारीरिक बनावट से बदलाव आना।

•    अचानक वजन बढ़ जाना।

•    शरीर के विभिन्न हिस्सों जैसे पैर और एडि़यों में सूजन या दर्द होना।

•    गर्भाशय में ऐंठन या दर्द होना।

•    सिरदर्द, चक्कर और हर समय थकान महसूस होना।

•    पीठदर्द, मांसपेशियों में और शरीर के अन्य हिस्सों में दर्द होना।

•    लगातार मूड में बदलाव होना, उदास और चिड़चिड़ापन रहना।

•    इस दौरान अधिक भूख लगना।

•    भूलने की बीमारी होना।

 

 

गर्भावस्था-

गर्भावस्था आमतौर पर नौ माह की होती है। गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में एक नया भ्रूण विकास करता है, और ये भ्रूण गर्भ के भीतर ही गर्भवती के माध्यम से सांस लेता है और अपना भोजन ग्रहण करता है। नौ माह बाद एक परिपक्त शिशु के रूप में जन्म लेता है।

 

गर्भावस्था के लक्षण-   

गर्भवती महिलाओं में लक्षण एक से हो यह जरूरी नहीं। उनकी कार्यशैली, वातावरण और सोच पर गर्भावस्था के लक्षण निर्भर करते हैं।



•    गर्भधारण करते ही माहवारी आनी बंद हो जाती है।

•    जी मिचलाना, उल्टी, बार-बार पेशाब जाना।

•    स्तनों में गर्भावस्था के दौरान दर्द होने लगता है।

•    हार्मोंस के निरंतर बदलाव के कारण तनाव और सिर दर्द होना।

•    मूड लगातार बदलना।

•    अधिक थकान महसूस करना।

•    कब्ज होना।

•    जुकाम रहना, और हर समय कफ जमा रहने की शिकायत रहती है।

•    मुंह के स्वाद का बदल जाना। ये हार्मोंस में हो रहे लगतार बदलाव के कारण होता है।

•    अचानक मोटापा बढ़ने लगना। हर समय गैस बनती है, और खटटी डकारें आनी लगती है।

•    चक्कर आना, बेहोशी होना, नाराजगी दिखाना।

 

अगर यह कहा जाए कि गर्भावस्था की शुरूआत पीएमएस पर निर्भर करती है तो कुछ गलत नहीं होगा। हालांकि इनमें अंतर है, लेकिन माहवारी के बाद ही महिला का गर्भधारण करना सुनिश्चिंत होता है। दोनों ही अवस्थाओं के कुछ लक्षण कुछ हद तक आपस में काफी मिलते-जुलते हैं। दोनों ही अवस्थाओं में महिला के शरीर को ज्यादा से ज्यादा विटामिन की जरूरत होती है, नहीं तो कमजोरी होने का डर बना रहता है।

 

 

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टिप्पणियाँ
  • शिल्पी30 Jun 2013

    मेरी शादी को ५ साल हुए है,मेरा दूसरा माह चल रहा है की मै पीरिएड्स नहीं हुई हु,मैंने ३-४ स्ट्रिप्स एच सी जी चेक किये लेकिन उत्तर नकारात्मक आया..... कुछ डॉक्टर्स ने मना किये की कोई दवा मत लो हो सकता है की तुम प्रेग्नेंट हो.सरे लक्षण वही है मिचली आना,सर दर्द,क्या करू कुछ राय दे,, घर वाले उम्मीद लगा बैठे है..

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