डायबिटीज़ के साथ गर्भावस्था की योजना

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 18, 2011
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diabetesडायबिटीज़ के मरीज़ को अपने स्वास्थ्‍य और खान–पान पर बहुत ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता होती है ऐसे में एक डायबिटीक महिला अगर गर्भवती होना चाहती है, तो उसे अपने स्वास्थ्‍य का खास ख्याल रखने की आवश्यकता होती है। गर्भावस्था की दूसरी ज़रूरतों के साथ डायबिटीज़ से प्रभावित महिलाओं को लगातार रक्त के स्तर की जांच और समय–समय पर डायबिटीज़ की दवाएं लेनी होती है। कुछ महत्वपूर्ण बातें जिन्हें ध्यान में रखकर गर्भवती महिला और होने वाला बच्चा दोनों ही सुरक्षित रह सकते हैं।


गुड़गांव के आर्टेमिस अस्पताल के एन्डोक्राइनालाजिस्ट धीरज कपूर के अनुसार डायबिटीक महिलाओं में गर्भावस्था से सम्बन्धी जटिलताओं के होने की सम्भावना अधिक रहती है। यह जटिलताएं मां और होने वाले बच्चे दोनों में ही हो सकती हैं। लेकिन आज चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में प्रगति के साथ अधिकतर डायबिटीक महिलाएं सामान्य गर्भावस्था के दौर से गुज़रते हुए सामान्य बच्चे को जन्म देती हैं।

 

तैयारी :

गर्भवती होने से पहले चिकित्सक से सम्पर्क करें। रक्त जांच के द्वारा चिकित्सक आपको यह बता सकता है कि आप अगले 8 से 12 हफ्तों में डायबिटीज़ को कितना नियंत्रित कर सकती हैं या ऐसे में गर्भनिरोधक गोलियां लेना सुरक्षित है या नहीं। यूरिनोलिसिस, कालेस्ट्रारल की जांच, गलूकोमा, मोतियाबिंद या रेटीनोपैथी के लिए आंखों की जांच करायें। इस जांच से चिकित्सक गर्भावस्था के दौरान होने वाली जटिलताओं का समाधान निकालता है या आप चिकित्सक से काउंसलिंग भी कर सकते हैं।

रक्त में शुगर :


रक्तत में शुगर की मात्रा पर नियंत्रण का अर्थ है रक्त  में ग्लूकोज़ के स्तसर को खान-पान और व्यांयाम के द्वारा नियंत्रित करने के तरीके अपनाना। महिलाओं को गर्भ का पता तबतक नहीं चलता जबतक कि बच्चा 2 से 4 हफ्तों का ना हो जाये। गर्भावस्था के दौरान शुगर के स्तिर के बढ़ने से बच्चे4 को जन्मन के दौरान समस्याएं हो सकती हैं। यहां तक कि गर्भपात भी हो सकता है।

 

बच्चे पर डायबिटीज़ का प्रभाव :


डायबिटीक महिलाओं के बच्चों  में मेक्रोासामिया जैसी बीमारी के होने का अधिक खतरा रहता है। मां के रक्त में अधिक शुगर होने से, होने वाले बच्चेर के शरीर में भी शुगर की मात्रा के बढ़ने की सम्भाअवना रहती है। प्रसव के दौरान बच्चोंं में यह अतिरिक्तन शुगर वसा में बदल जाती है और ऐसे बच्चे  जन्म‍ के समय मोटे होते हैं। कभी–कभी होने वाले शिशु का आकार इतना बड़ा हो जाता है कि वैजाइनल डिलीवरी नहीं हो पाती और ऐसे में सिजे़रियन डिलीवरी करनी पड़ती है। अगर गर्भावस्था के दौरान आपके रक्त  में शुगर का स्तर अधिक है, तो ऐसे में प्रसव के बाद बच्चेर में खतरनाक रूप से ब्लड शुगर लो हो जाता है। बच्चे में कैल्शीयम, मैग्नीशियम की मात्रा भी असंतुलित होती है लेकिन इसे दवाओं से ठीक किया जा सकता है।

इन्द्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ एंडोक्राइनोलॉजिस्ट एस के वांगडू के अनुसार डायबिटीक महिलाओं के बच्चों में डायबिटीज़ नहीं होता। लेकिन उनमें जन्मं के समय रक्त में शुगर का स्तर कम हो सकता है ा वांगडू का कहना है कि गर्भवती महिलाओं का स्वयं पर ध्यान देना आवश्यतक होता है।

गर्भावस्था  के दौरान डायबिटीज़ की दवाएं :


फीज़ीशियन के निर्देशानुसार आप गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज़ की दवाएं ले सकती हैं ा प्राय: गर्भावस्था के दौरान लोगों को अधिक मात्रा में इन्सुलिन की आवश्यकता होती है। अगर आप दवाएं ले रहे हैं तो आपका फीजी़शियन आपको इन्सुलिन की दवाएं दे सकता है। लेकिन इन दवाओं की सुरक्षा कर अबतक ठीक से पता नहीं चल पाया है।

डायट प्लान :


आप चिकित्सक के निर्देशानुसार रक्त में शुगर की मात्रा पर नियंत्रित पा सकते हैं और अपने बच्चे को उसकी ज़रूरत के अनुसार कैलोरी प्रदान कर सकते हैं।

गर्भावस्था का समय :


वो महिलाएं जिनके डायबिटीज़ का स्तर नियंत्रित है वो आसानी से सामान्या बच्चे को जन्मा दे सकती हैं। लेकिन ज्यादातर फीज़ीशियन डायबिटीक महिलाओं को जल्दी डिलीवरी की सलाह देते हैं जैसे 38 से 39 हफ्तों में।

रक्त जांच लेबर और प्रसव के दौरान:


लेबर के दौरान रक्त में शुगर के स्तर पर नियंत्रण रखना आवश्यक होता है ा अगर आप दवा के रूप में इन्सुलिन ले रहे हैं तो ऐसे में आप इन्सुलिन का इंजेक्शन भी ले सकते हैं , लेकिन प्रसव के तुरंत बाद इन्सुलिन की ज़रूरत नहीं होती। गर्भवती होने से पहले फालिक एसिड के सप्लीमेंट्स लेने से होने वाले बच्चे में न्यूरल ट्यूब दोष नहीं होता। इन तथ्यों को ध्यान में रखने के अलावा आपको धूम्रपान छेाड़ देना चाहिए क्योंकि इससे आपके होने वाले बच्चे पर भी बुरे प्रभाव पड़ सकता है ।डायबिटीक महिला के लिए गर्भवती होना आसान नहीं है लेकिन यह नामुमकिन भी नहीं है ।



राकलैंड अस्पताल की प्रमुख गायनाकालाजिस्ट डाक्टर आशा शर्मा के अनुसार उचित निर्देशों का पालन कर डायबि‍टीक महिला भी सामान्य गर्भावस्था के दौर से गुज़रते हुए स्वास्थ‍ बच्चे को जन्म दे सकती है।

चिकित्सक की सही राय, स्वस्थय आहार, व्यायाम के साथ और परिवार के समर्थन से डायबिटीक महिला भी गर्भास्था का सुख उठा सकती है।

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इस जानकारी की सटिकता, समयबद्धता और वास्‍तविकता सुनिश्‍चित करने का हर सम्‍भव प्रयास किया गया है । इसकी नैतिक जि़म्‍मेदारी ओन्‍लीमाईहैल्‍थ की नहीं है । डिस्‍क्‍लेमर:ओन्‍लीमाईहैल्‍थ पर उपलब्‍ध सभी साम्रगी केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्‍सक से अवश्‍य संपर्क करें। हमारा उद्देश्‍य आपको रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी मुहैया कराना मात्र है। आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है।

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