पर्फेक्ट एंटी-एजिंग वर्कआउट के बारे में जानें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 19, 2016
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Quick Bites

  • तमाम बीमारियों को दूर रखता है।
  • नए सेल्स का निर्माण करता है।
  • घुटनों के दर्द से निजाद दिलाता है।
  • इस परफेक्‍ट ऊर्जा बढ़ाता है।

संभवतः हम सब अच्छी जीवनशैली के सभी नुस्खे जानते हैं। मसलन चहलकदमी करना, एक्सरसाइज करना, योगा करना वगैरह-वगैरह। लेकिन क्या आप ऐसे किसी एक्सरसाइज के विषय में जानते हैं जो न सिर्फ अच्छी देह दे बल्कि उम्र को भी घटा दे? तमाम विशेषज्ञों का दावा है कि चहलकदमी या ट्रेडमिल पर मेहनत से कई गुना बेहतर है ऐसी एक्सरसाइज की जाए तो मूड फ्रेश रखे, शरीर को आराम दे और मन भी शांत रहे। इसे हम ताई ची के नाम से जानते हैं।

कोलम्बिया यूनिवर्सिटी के एसिस्टेंट प्रोफेसर जोसेफ फ्यूरेरस्टीनन के मुताबिक, ’शरीर में संतुलन और लचीलेपन के लिए ताई ची बेहतर एक्सरसाइजों में से एक है।’ इस लेख में ताई ची के कुछ लाभों के विषय में जानेंगे ताकि आप भी अपनी बढ़ती उम्र को कम कर सके और लम्बी जिंदगी स्वास्थ्य देह के साथ जी सके।

tai chi in hindi

जलन

चोट लगने पर जलन होना आम बात है। जलन होने से यह भी पता चलता कि चोट ठीक होने की कगार पर है। लेकिन जलन के अलग मायने भी हैं। कई बार पूरी नींद न होने की वजह से, अस्त व्यस्त जीवनशैली के कारण भी जलन होती है। ये जलन आसानी से हमारा पीछा नहीं छोड़ती। इसके कारण तनाव हो सकता है, हृदय सम्बंधी बीमारियां हो सकती हैं, स्ट्रोक के खतरे बढ़ सकते हैं, डायबिटीज, आटोइम्यून डिजीज और यहां तक कैंसर जैसी बीमारी के लिए भी यह जिम्मेदार हो सकती है। कहने का मतलब यह है कि ताई ची का सहारा लेकर हम बड़ी से बड़ी बीमारी को आने से टाल सकते हैं और अपनी जिंदगी को लम्बा कर सकते हैं।


घुटने का दर्द

हड्डियों की दर्द की समस्या तेजी से बढ़ रही है। आदम 35 साल की उम्र पार करता है और हड्डी से सम्बंधित बीमारी उसे आकर जकड़ लेती है। खासकर घुटने का दर्द। आंकड़ोंपर विश्वास करें तो 65 साल की उम्र से ज्याद बुजुर्गों में 50 फीसदी बुजुर्ग घुटनों की बीमारी से त्रस्त हैं। हैरानी की बात ये है कि अधेड़ावस्था भी इससे अछूती नहीं है। हालंाकि घुटनों के दर्द से निजात पाने के लिए फिजीकल थैरेपी का सहारा लिया जा सकता है। लेकिन ताई ची घुटनों के दर्द को न सिर्फ कम करता है बल्कि चलने फिरने में सहजता भी लाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक जो लोग यांग-स्टाइल ताई ची सप्ताह में कम से कम दो बार करते हैं, उन्हें घुटनों में कम दर्द होता है। इसके अलावा ये एक्सरसाइज मूड को भी रिफ्रेश कर सकता है। इससे आप सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं कि यांग-स्टाइल ताई ची से जब बुजुर्गावस्था की बीमारियों को मात दिया जा सकता है तो भला उम्र को क्यों नहीं? ताई ची के कारण बढ़ती उम्र अपने आप थमने लगती हैं।


ऊर्जा

युवा की तुलना में बुजुर्गों में ऊर्जा कम होगी, इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन अगर बुजुर्ग में युवा जितनी ही ऊर्जा हो तो आप क्या कहेंगे? निःसंदेह हंस पड़ेंगे। क्योंकि यह सुनने में किसी मजाक की तरह लगता है। लेकिन यकीन मानिए ताई ची को अपनी जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बनाकर हम आसानी से ऊर्जा हासिल कर सकते हैं। आलस भगा सकते हैं। इतना ही नहीं शारीरिक बल हासिल कर सकते हैं। नतीजतन हम शारीरिक ही नहीं मानसिक रूप से भी अपने आप पर भरोसा करने लगते हैं। ताई ची सिर्फ बुजुर्गों के लिए ही कारगर नहीं है वरन युवा भी अपनी जीवनशैली में आजमा सकते हैं। इसका महत्वपूर्ण कारण है मौजूदा समय में युवा शारीरिक काम कम करते हैं। जिससे उनके शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यही नहीं वे युवास्था में ही अधेड़ बन जाते हैं। जबकि ताई उनकी ओर आती अधेड़ावस्था को रोकने का काम करती है।


जवां रहना

तमाम बीमारियों को तो ताई ची दूर भगाने में सहायक है। इसके अलावा वैज्ञानिक दृष्टि से भी ताई ची का कोई जवाब नहीं है। ताई ची की मदद से हमारे सेल्स मजबूत होते हैं और नए सेल्स का निर्माण होता है। मतलब यह कि ताई ची हमें शारीरिक रूप से तो स्वस्थ रखता है साथ ही सेल्स की मदद से हमेशा जवां रखता है।

इस लेख से संबंधित किसी प्रकार के सवाल या सुझाव के लिए आप यहां पोस्‍ट/कमेंट कर सकते है।

Image Source : Getty

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