गहरी नींद लेने वाले लोग कर सकेंगे डर का बेहतर सामना

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 25, 2013
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Quick Bites

  • गहरी नींद लेने वाले लोगों के डर का हो सकता है अच्छा इलाज।
  • पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर के इलाज में भी मिल सकेगी मदद।
  • किसी सदमे, यौन दुर्व्यवहार या गंभीर चोट से बैठ सकता है डर।

अब डर आपको नहीं डराएगा। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने डर से पार पाने का एक नया तरीका तलाश लिया है। अमेरिकी शोधकर्ताओं का मानना है कि किसी व्‍यक्ति को नींद में कोई खास गंध सुंघाई जाए, तो उसके डरने की समस्या को दूर किया जा सकता है।
 
Deep Sleep Can Face Fears Wellशोधकर्ताओं ने लोगों को गंध और डर से संबंधित दो छवियों को जोड़ कर देखने के लिए प्रशिक्षित किया। इसके बाद जब उन्हें नींद के दौरान एक छवि से संबंधित गंध सुंघाई गई तो उठने के बाद वे लोग उस गंध से संबंधित छवि से कम डरे हुए थे।

 

ब्रिटेन के एक विशेषज्ञ ने इस अध्ययन की प्रशंसा करते हुए कहा कि इससे लोगों के डरने की समस्या का इलाज करने में मदद मिलेगी और शायद यह पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर अर्थात पीटीएसडी में भी कारगर साबित हो। पीटीएसडी में यौन दुर्व्यवहार, गंभीर चोट और हत्या की धमकी या किसी बड़े सदमें जैसी घटनाएं शामिल होती हैं।

 

अध्ययन दल की प्रमुख 'कैथरीना हॉनर' ने कहा कि "यह एक अद्भुत खोज है। हमने पाया कि डर में थोड़ी लेकिन महत्वपूर्ण कमी हुई।" आमतौर पर इस समस्या से ग्रस्त लोगों का इलाज जागते हुए किया जाता है। इस दौरान विशेषज्ञों की निगरानी में उनसे उनके डर का सामना कराने का अभ्यास कराया जाता है। लेकिन इस अध्ययन के अनुसार यह इलाज गहरी नींद में भी किया जा सकता है। इस अवस्था में भावनात्मक यादों को बदलने का प्रयास किया जाता है।

 

शोधकर्ताओं ने शोध के लिए 15 स्वस्थ लोगों को दो अलग-अलग चेहरों की तस्वीरें दिखाईं। और फिर उसी समय उन्हें हल्का इलेक्ट्रिक शॉक दिया गया। साथ ही उन्हें नींबू, पुदीना, लौंग या चंदन जैसी कोई खास गंध भी सुंघाई। इसके बाद उन्हें एक शयन प्रयोगशाला में ले जाया गया। जब वो गहरी नींद में आ गए तो उन्हें दिखाए गए एक चेहरे से संबंधित गंध सुंघाई गई। इसके बाद जब वो जागे तो उन्हें बिना किसी गंध या झटके के दोनों चेहरे दिखाए गए। उन्होंने उस चेहरे से कम डर महसूस किया, जिससे संबंधित गंध उन्हें सोने के दौरान सुंघाई गई थी।

 

आमतौर पर लोग पांच मिनट से 40 मिनट तक गहरी नींद लेते हैं और इस प्रयोग का असर उन लोगों में अधिक देखा गया जिन्होंने अधिक समय तक गहरी नींद ली। अध्ययन की प्रमुख और शिकागो स्थित नार्थवेस्टर्न यूनीवर्सिटी फिनबर्ग स्कूल ऑफ मेडिसिन की कैथरीना हॉनर ने कहा कि "यह एक अद्भुत खोज है. हमने पाया कि डर में थोड़ी लेकिन महत्वपूर्ण कमी हुई."

उन्होंने यह भी कहा कि "बड़ी बात ये है कि अगर पहले से मौजूद डर पर इसका इस्तेमाल किया जाए तो शायद नींद के दौरान डर का इलाज बेहतर ढंग से किया जा सकेगा।"

 

 

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