मुश्किल समय में कैसे करें बच्चों की देखभाल

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 26, 2014
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Quick Bites

  • बच्चों को दुख से बचा कर रखें।
  • उनके बाल मन पर इसका असर ना होने दें।
  • समझदार हो बच्चा तो उसे स्थिति से परिचित करवाएं।
  • किसी की मदद लेने में संकोच ना करें।

हर किसी के जीवन में सुख-दुख लगा रहता है। ऐसे में खुद को संभालना तो संभव है। लेकिन जब आप एक माता-पिता की भूमिका में रहते हैं तो बच्चों की खास देखभाल करनी होती है। हर परिवार में कभी ना कभी कुछ मुश्किल परिस्थितियां पैदा होती हैं जिनके साथ बच्चों की देखभाल करना मुश्किल हो सकता है। किसी की मृत्यु, बीमारी, तलाक या आर्थिक समस्याएं वो है जिनके बारे में बच्चों को कुछ नहीं बताया या समझाया नहीं जा सकता है। बच्चों के बाल मन पर इसका विपरीत असर ना हो इसलिए आपको खास देखभाल करनी चाहिए। आइए हम आपको बताते हैं ऐसा कैसे संभव हो सकता है।
   
parenting in tough times in hindi

बच्चों को मुश्किलों से बचाएं

अभिभावक होने के नाते आपकी जिम्मेदारी है कि बच्चों को दुनिया की भयानक सच्चाई से बचा कर रखें। आपको हर उस चीज से अपने बच्चे को बचाना चाहिए जो उसे नुकसान पहुंचा सकती है।  लेकिन हम में से ज्यादातर लोग ऐसा नहीं कर पाते हैं। अगर जीवन में दुख, दर्द, निराशा,असफलता है तो इन सबको हरा कर ही आपको खुशी, सफलता और उम्मीद की किरण भी मिलती है। जीवन में दुख-सुख तो लगे ही रहते हैं लेकिन आपको इन परिस्थितियों से लड़ना आना चाहिए। ध्यान रखिए आप अपने बच्चों के सामने जैसा करेंगे वो वैसा ही सीखेंगे। अगर आप दुख की घड़ी में बिना विचलित हुए अपने बच्चे को अच्छी देखभाल करते हैं तो यह गुण उसमें भी जरूर आएगा।

खुद की देखभाल जरूरी है

बच्चों का खयाल रखने से पहले जरूरी है कि आप खुद का खयाल रखें। अगर आप खुद ठीक नहीं रहेंगे तो बच्चों को कैसे संभाल पाएंगे। अकसर ऐसा होता कि कठिन परिस्थितियों के दौरान आप खाना-पीना छोड़ देते हैं जिससे आपको कमजोरी, चिंता, थकान और चक्कर की समस्या होती है। ऐसे में आप अपने बच्चों की देखभाल कैसे कर पाएंगे। इसलिए पहले खुद को संभालना सीखें जिससे आपके बच्चे की परवरिश पर कोई असर ना हो।  

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मदद लेने में नहीं है बुराई

अगर इस दौरान खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं तो किसी से मदद लेने में कोई बुराई नहीं है। आप चाहें तो परिवार में किसी सदस्य या दोस्त की मदद ले सकते हैं। इसके अलावा किसी काउंसलर की मदद लेना भी अच्छा विकल्प है। अगर आपका बच्चा थोड़ा समझदार है तो उसे अपनी समस्या के बारे में बताने में कोई बुराई नहीं है लेकिन अगर बच्चा छोटा है तो उसके साथ हंसने, खेलने से भी आपको दिमागी सूकुन मिलता है।  

बच्चे के साथ समय बिताएं

इस मुश्किल और तनावपूर्ण समय में अपने बच्चे के साथ समय बीताना भी जरूरी है जैसे उसे पार्क में ले जाना या उसकी मनपसंद आइसक्रीम खिलाने के लिए ले जाना। हो सकता है कि यह सब कुछ करने के लिए आप खुद को तैयार नहीं कर पा रहे हो लेकिन बच्चा इस चीज को नहीं समझ सकता है। इसलिए अगर आप कुछ देर के लिए अपना दुख भूलकर उसकी खुशी में खुश होगें तो आपको भी अच्छा लगेगा।

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