गर्भावस्था में दर्द निवारक दवाओं का प्रयोग मां और शिशु के लिए हैं नुकसानदेह

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 07, 2011
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Quick Bites

  • दर्द निवारक दवाओं से गर्भस्थ शिशु में नपुंसकता की संभावनायें बढ़ जाती हैं।
  • एंटीबॉयटिक का ज्‍यादा दिन प्रयोग करने से प्रजनन अंग अविकसित रहते हैं।
  • आंकड़े हैं मुताबिक लगभग 50 प्रतिशत महिलाएं दर्दनिवारक दवाएं लेती हैं।
  • इनके ज्‍यादा इस्‍तेमाल से बच्‍चे को बाद में टेस्टीकल कैंसर का खतरा बढ़ता है।

गर्भावस्‍था के नौ महीनों में महिलाएं कई प्रकार की समस्‍याओं से गुजरती है। और उनको किसी न किसी स्‍टेज में दर्द निवारक दवाईयों का इस्‍तेमाल करना ही पड़ता हैं। लेकिन क्‍या आप जानते हैं इस प्रकार की दर्द निवारक दवाओं का इस्‍तेमाल आप और आपके होने वाले शिशु दोनों के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

Pills During Pregnancyगर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिलाओं को कई उतार-चढ़ावों से गुजरना पड़ता है। इस समय हार्मोस में बदलाव का असर सिर पर भी पड़ता है जिसके कारण सिर में दर्द हो सकता है। लेकिन इसके इलाज के लिए आप बाजार में मिलने वाली एंटीबॉयटिक दवाओं का प्रयोग बिलकुल भी न करें। आइए हम आपको इन दवाओं से होने वाले नुकसान के बारे में आपको जानकारी दे रहे हैं।

 

गर्भावस्‍था और दर्द निवारक दवायें 

  • बहुत लंबे समय तक दर्द निवारक दवाएं लेने से गर्भस्थ शिशु में नपुंसकता के लक्षण पाए जाने की आशंकाएं बढ़ जाती है।
  • शोधों में भी ये बात साबित हो चुकी है कि पैरासीटामल, एस्प्रिन और आईबूप्रोफेन जैसी दवाओं का गर्भावस्था के दौरान लम्बे समय तक इस्तेमाल करने से होने वाले लड़कों में प्रजनन अंगों के विकास को नुकसान पहुंच सकता है।
  • यह तो सभी जानते हैं गर्भावस्था के दौरान महिलाएं पेनकिलर्स लेती हैं लेकिन चौंकाने वाले आंकड़े हैं कि लगभग 50 प्रतिशत महिलाएं गर्भावस्था के दौरान सिरदर्द से निजात पाने के लिए दर्दनिवारक दवाएं लेती हैं।
  • दरअसल, इन दर्दनिवारक दवाओं के इस्तेमाल से गर्भस्थ शिशु में बनने वाले शुक्राणुओं की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
  • सिर्फ प्रजनन अंगों में ही नहीं वरन ऐसे होने वाले शिशु को अपने जीवन के अंतिम दिनों में उन्हें टेस्टीकल कैंसर का खतरा हो सकता है।
  • शोधों में ये भी साबित हुआ है कि हाल के समय में पुरुषों में होने वाली प्रजनन संबंधी विकृतियों की मुख्य वजह दर्द निवारक दवाएं हैं। जिनका इस्तेमाल उनकी मांओं द्वारा गर्भावस्था के दौरान किया गया था।
  • गर्भावस्था के दौरान ली जाने वाली दर्दनिवारक दवाओं से मां की सेहत पर तो नकारात्मक प्रभाव बाद में दिखाई देते ही हैं, इसके साथ ही भ्रूण के हार्मोन असंतुलन होने लगते हैं जिससे उसमें विकृतियां बढ़ने की संभावना भी बढ़ जाती है।
  • गर्भावस्था के दौरान एक समय में एक से ज्यादा और अलग-अलग तरह की दर्दनिवारक दवाएं ली जाएं तो ऐसी महिलाओं के बेटों में नपुंसकता का खतरा सात गुना तक बढ़ जाता है।
  • यदि आप गर्भावस्थां के चार से छह महीने के बीच हैं तो आपको कम से कम दर्दनिवारक दवाएं लेनी चाहिए क्योंकि गर्भावस्था के इस समय में दर्दनिवारक दवाएं लेना सबसे ज्यादा खतरनाक होता है।
  • गर्भावस्था के 4 से 6 महीने के बीच केवल एक दर्दनिवारक दवा लेने से भी सामान्य महिलाओं के मुकाबले इन महिलाओं के बच्चों में विकृति का खतरा दोगुना हो जाता है।
  • दर्दनिवारक दवाओं से भ्रूण के विकास में बाधा होती है और यह खतरा पैरासीटामोल में जहां दोगुना होता है वहीं एस्प्रिन या आईबूप्रोफेन से चार गुना तक बढ़ जाता है।

 

गर्भवती होने के बाद यदि कोई समस्‍या हो तो चिकित्‍सक से सलाह लेकर ही दवाओं का सेवन करें, यदि हल्‍का सिरदर्द है तब भी एंटीबॉयटिक दवाओं का सेवन करने से बचें।

 

 

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