ओणसद्या - संपूर्ण आहार जो आपकी बॉडी डिटॉक्‍स करें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 30, 2016
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Quick Bites

  • केरल में मनाया जाने वाल महत्वपूर्ण त्योहार है।
  • इसे फसलों की कटाई के बाद मनाया जाता है।
  • ओणसद्या भोज केले के पत्ते पर परोसा जाता है।
  • इस पूर्ण भोजन से शरीर को आवश्‍यक पोषक मिलता है।

भारत एक रंग-बिरंगा देश है, यहां की भौगोलिक स्थिति रंगारंग होने के साथ त्‍योहारों में भी विविधता है। यहां मनाये जाने वाले सांस्‍कृतिक त्‍योहारों की रंगीन तस्‍वीर देखते ही बनती है। इसी तरह का एक त्योहार ओणम भी है। ओणम केरल में मनाया जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है। वैसे तो इसे फसलों की कटाई के बाद मनाया जाता है, पर इसका महत्व सामान्य कृषि सबंधित त्योहारों से कहीं ज्यादा है। इस त्योहार की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस दिन लोग मंदिरों आदि में पूजा-अर्चना नहीं करते, घर में ही पूजा करते हैं। मान्यता है कि राजा महाबलि के शासन में रोज हजारों तरह के स्वादिष्ट पकवान व व्यंजन बनाए जाते थे। चूंकि महाबलि साल में एक बार अपनी प्रजा से मिलने आते हैं, इसलिए उनके प्रसाद के लिए कई तरह के लजीज व्यंजनों को बनाए जाते हैं।

onamsadya in hindi

ओणसद्या

केरल में मनाया जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण त्योहार ओणम में हजारों तरह के स्‍वादिष्‍ट व्‍यंजन बनाये जाते हैं जिसे 'ओणसद्या' के नाम से जाना जाता है। ओणसद्या देश भर में प्रसिद्ध और लोकप्रिय है, जिसे कोई भी छोड़ना पसंद नहीं करेगा। इस दावत 'ओणसद्या' में आमतौर पर 18-26 आइटम शामिल होते हैं जो मुंह में अपना स्वाद छोड़ जाता है। केरल के लोग इस भोज को इतना पसंद करते हैं कि एक 'ओणसद्या' भोज के लिए वह कुछ भी कर सकते हैं। परंपरा के अनुसार, ओणसद्या भोज केले के पत्ते पर परोसा जाता है। भोज में 60 तरह के व्यंजन और 20 तरह के मिष्ठान शामिल हैं जो पर्यटकों के बीच बहुत प्रसिद्ध है।


शरीर को डिटॉक्‍स करता है 'ओणसद्या' आहार

सांस्‍कृतिक महत्‍व के अलावा 'ओणसद्या' के आहार फायदे भी है। यह एक पूर्ण भोजन है, जिसमें शरीर को आवश्‍यक पोषक तत्‍व प्रदान करने वाले सभी तरह के खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं। क्‍योंकि ओणम करकीदकम के बाद आता है, (हर साल मलयालम महीने करकीदकम के पहले दिन मनाया जाने वाला यह पर्व दरअसल हाथियों का महाभोज है।) यह मानसून का महीना, जब लोगों को डिटॉक्‍स खाद्य पदार्थों को खाने की सलाह दी जाती है, इसलिए ओणसद्या स्‍वाद बढ़ाने के साथ सभी अंगों को डिटॉक्‍स भी करता है।


पोषक तत्‍वों से भरपूर ओणसद्या के पकवान

ओणसद्या में न केवल सभी प्रमुख खाद्य समूहों को शामिल किया जाता है, बल्कि इसमें स्‍वाद को बढ़ाने सभी चीजों को शामिल किया जाता है। यह आमतौर पर शाकाहारी होते हैं, जो पोषक तत्‍वों और आहार फाइबर से भरपूर होते हैं और स्‍वाद और पोषक तत्‍वों के संतुलन को बनाने के लिए विशेष क्रम के अनुसार सर्व किया जाता है। यहां ओणसद्या में शामिल कुछ आइटम की विशिष्‍ट सूची दी गई है।

  • चावल (केरल लाल चावल)
  • शर्करा उपारी (गुड़ के साथ कच्‍चे केले गुड़ के चिप्स)
  • काया वरूथाथू - Kaaya Varuthathu (कच्‍चे केले के चिप्‍स)  
  • परिप्‍पु (दाल की गाढ़ी ग्रेवी, आमतौर पर घी के साथ परोसी हुई)
  • साम्बार (सब्जियों की एक किस्म के साथ एक मसालेदार, मोटी मसूर रस)
  • अवियल (एक हल्का मसालेदार, उबली हुई सब्जियों और नारियल के साथ बनी ड्राई डिश)
  • कालन (एक हल्‍का खट्टा, गाढ़ा दही आधरित ग्रेवी, जो आमतौर पर आधे पके केले से बनती है)
  • ओलन (मसालेदार नारियल का दूध, जिसकी ग्रेवी दाल आधरित होती है)   
  • कूट्टूकरी (सूखे भुने हुए नारियल और कच्चे केले और काले चने के साथ बना हल्का मसालेदार पकवान)
  • वेल्लरिक्का खिचड़ी (दही, नारियल और खीरे से तैयार का एक हल्का मसालेदार पकवान)
  • पाइन-एपल मधुर पच्चडी (नारियल बेस के साथ अनानास, अंगूर और पके केले से बना मीठा पकवान)
  • पझम पुलिस्सेरी (अदरक, इमली और गुड़ से बना खट्टा मीठा पकवान)
  • तोरन (बारीक कटी हुई और पकी सब्जियों से बना हल्का मसालेदार सूखा पकवान)
  • अचार (मसालेदार अचार जो आमतौर पर कम से कम दो विभिन्न किस्मों कच्चे आम और नींबू में सर्व होता है)
  • पाल पायसम (मिठाई, आमतौर पर कम से कम दो अलग-अलग किस्मों में सर्व होती हैं। एक दूध आधारित है, और दूसरी गुड़ आधारित)
  • रसम (टमाटर, धनिया, अदरक, लहसुन और जीरा के साथ खट्टी मीठ्ठी और मसालेदार इमली आधारित रसम)
  • मोरू (मसालेदार छाछ
  • थिरु (गाढ़ा दही / योगर्ट)

 

ओणसद्या सेवन का तरीका

सेवन के अनुसार आइटम को अधिक या कम के क्रम में सूचीबद्ध किया जा सकता है। हल्‍की भूख के लिए (चिप्‍स), शुरुआत के लिए (मसूर + घी के पकवान), मुख्य पकवान में (सभी हल्के मसालेदार व्यंजन के साथ चावल), (ओलन/कालन जैसे नर्म पकवान), मिठाई (पाल पायसम) पाचन के लिए  (रसम, मोरू) और गैस्ट्रिक को आराम पहुंचाने के लिए (दही और चावल जो आमतौर जठरांत्र अंगों को शांत करने के लिए खाया जाता है) पर खत्‍म होता है। आमतौर पर ओणसद्या में पानी भी दिया जाता है, जो तुलसी और जीरे के साथ उबला हुआ होने के कारण त्यधिक पाचन और औषधीय गुणों से भरपूर होता है।

 

ओणसद्या के पोषक महत्व

ओणसद्या के पोषण के महत्व को व्यंजन को देखकर ही समझा जा सकता है: चावल और दाल हमारे शरीर के लिए आवश्यक कार्बोहाइड्रेट प्रदान करते हैं। सांभर मौसमी सब्जियों से भरपूर होने के कारण हमारे शरीर की विटामिन आवश्यकताओं को पूरा करता है। अवियल भी मौसमी सब्जियों और नारियल से भरपूर होने के कारण आहार फाइबर से भरपूर होता है और पाचन को दुरुस्‍त रखता है। रसम, मेरु और जीरे का पानी भी पाचन में सुधार करता है। कालन और पचडी में दही होता है, यह एक ऐसा घटक है जो पेट को शांत करता है। पप्पडम और अचार शरीर की सोडियम की आवश्‍यकता को पूरा करता है। पायसम में मौजूद चीनी कार्बोहाइड्रेट की आवश्‍यकता को पूरा करता है।

इस तरह जो भी मूल्‍य और परंपराएं हमारे पूर्वजों ने हमारे लिए बनाई है, उसके अंतर्निहित कारण मौजूद होते हैं, जो हमारे लिए फायदेमंद होते हैं और जिसमें हमारी भलाई शामिल होती है।  

हम अपने सभी पाठकों के लिए खुशहाल, समृद्ध और स्‍वस्‍थ ओणम की कामना करते हैं!

Image Source : Getty

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