जानें किसी महिला के सेक्‍स जीवन को कैसे प्रभावित करती है आध्‍यात्मिकता

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 27, 2016
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Quick Bites

  • आध्यात्मिक होने का सेक्स पर क्या असर होता है?
  • आध्यात्मिकता का यौन जीवन पर बड़ा प्रभाव पड़ता है।
  • एक ताज़ा अध्ययन से सामने आए कई रोचक परिणाम।
  • 353 अंडरग्रेजुएट (61 प्रतिशत महिलाएं) पर हुआ अध्ययन।

एक ताज़ा अध्ययन से पता चला कि वे महिलाएं जिन्होंने माइंडफुलनेस और योग की तकनीकों का ठीक से अभ्यास किया उनमें बेहतर ओर्गाज़्म के साथ-साथ कामोत्तेजना और इच्छा के स्तर में सुधार आया। चलिए विस्तार से जानें क्या कहता है शोध -

क्या कहता है शोध

आध्यात्मिक होने का सेक्स पर क्या असर होता है? इसका जवाब ढूंढा है एक नए शोध ने! शोध के अनुसार आध्यात्मिकता का युवा वयस्कों (खासतौर पर महिलाओं) के यौन जीवन पर बड़ा प्रभाव पड़ता है, यहां तक कि धर्म, आवेगे और शराब आदि के प्रभाव से भी ज्यादा।  

अध्ययन के शोधकर्ताओं में से एक केंटकी विश्वविद्यालय की जेसिका बुरिस के मुताबिक, हम सभी इ स बात से वाकिफ हैं कि धार्मिक और आध्यात्मिक मामलों का हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में बहुत और लंबे समय के लिए प्रभाव होता है। लेकिन आमतौर पर अनुसंधान साहित्य में धर्म से अलैदा आध्यात्मिकता के अद्वितीय गुणों को शामिल नहीं किया जाता है।

 

 

Spirituality Impacts a Woman's Sex Life in Hindi

 

 

स्प्रिचुअल ट्रांस्केंडेंस स्केल नामक एक शोध के मुताबिक, ये गुण संयुक्तता, सार्वभौमिकता, और प्रार्थना पूर्ति करते हैं। लेकिन डेटा कहता है कि संयुक्तता (connectedness) आध्यात्मिक कामुकता में सबसे बड़ी भूमिका निभाती है, और ज्यादा सहयोगियों के साथ अधिक सेक्स को प्रेरित करती है (कभी कभी तो बिना कंडोम के भी)। जेसिका बुरिस लिखती हैं कि, विश्वास एक दूसरे इंसान से जुड़ा हुआ है और ये आंतरिक जुड़ाव और सौहार्द, किसी व्यक्ति को अंतरंगता और अपने आप में एक दिव्य या उत्कृष्ट गुणवत्ता पर विश्वास करने के लिए प्रेरित कर सकता हैं।

किस पर हुआ शोध

353 अंडरग्रेजुएट (जिनमें से 61 प्रतिशत महिला थीं) अध्ययन के प्रतिभागी वास्तव में विश्वविद्यालय के छात्र ही थे, जिन्होंने एक प्रश्नावली का जवाब दिया जिसमें उनके शराब के सेवन, आवेग, धर्म, अध्यात्म, और यौन व्यवहारों के बारे में जानकारी पूछी गई थीं। शोध में पाया गया कि आध्यात्मिक पुरुष यौन रूप से  प्रभावित नहीं होते हैं, बल्कि वास्तव में सेक्स की उनकी आवृत्ति कम हो जाती है।



शोधकर्ताओं के आंकड़ों में पुरुषों को यौन रूप से आध्यात्मिकता से जुड़ा नहीं देखने के पीछे संभवतः यह कारण है कि जैविक रूप से वे सेक्स को भावनात्मक अंतरंगता का माध्यम नहीं मानते है, जबकि महिलाओं के लिए सेक्स भावनात्मक जुड़ाव का बड़ा माध्यम साबित होता है। आध्यात्मिकता यौन साथियों की संख्या, सेक्स की आवृत्ति और बिना कंडोम के यौन संबंध के लिए के लिए सबसे मजबूत कारक था।   



जेसिका बुरिस के मुताबिक, "लेकिन हर बार सवाल ये खड़ा होता है कि क्या वाकई आध्यात्मिकता महिलाओं को ज्यादा सेक्सुअल बनाती है या फिर आध्यात्मिकता सिर्फ एक ग्रहणशीलता है कि सेक्स के माध्यम से भी प्रकट होती है। शोध बताते हैं कि आध्यात्मिकता, ईमानदारी, बहिर्मुखता और खुलेपन जैसे लक्षण के ऊपर एक खुलापन प्रदान करती है।"
 

हालांकि आध्यात्मिकता माइंफुलनेस और विचारों को एक खुलापन जरूर देती है, लेकिन यह पूरी तरह नहीं कहा जा सकता है कि महिलाएं ज्यादा सेक्सुअल बनाती हैं।

 

 

Image Source - Getty

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