अब बैक्टीरिया खुद रोकेंगे दांतों की सड़न

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 28, 2015
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Quick Bites

  • दांतो की सड़न पूरे शरीर को कर सकती है प्रभावित।  
  • एंजाइम बायोसिंथेस एम की वजह से सड़ते है दांत।
  • जींस को बदलकर अब इसी से किया जाएगा बचाव।
  • दांतो की सड़न के लिए डॉक्टर से जरूर ले सलाह।

दांतों की सड़न से मसूड़े भी प्रभावित होते हैं और इनसे मसूड़ो की बीमारी जिन्जिवाइटिस भी होती है। इसमें मसूड़े लाल हो जाते है और फूल भी जाते है जिससे खाने में परेशनी होती है।मुंह की देखभाल इसलिए भी ज़रूरी हो जाती है क्योंकि हमारे शरीर का प्रत्येक भाग दूसरे भाग पर निर्भर होता है। दांतों में किसी भी प्रकार की परेशानी होने से हमें खाने, पीने व बात करने में भी परेशानी होती है।

 

Dental Care in Hindi

दांतों की सड़न का बचाव

दांतों में सड़न (कैविटी) पैदा करने वाले जीवाणुओं पर हुई एक शोध से पता चला है कि जो बैक्टीरिया दांतों में सड़न का कारण बनते हैं, वे अब उन्हीं रसायनों से नष्ट हो जाएंगे जिनसे उन्हें पोषण मिलता है।अमेरिका के रोचेस्टर मेडिकल सेंटर के अनुसंधानकर्ताओं ने ऐसे जीन्स की खोज की है जो भोजन से निकलने वाले एसिड पर पलने वाले बैक्टीरिया को जीवित रहने में मदद करता है। अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार इस जीन्स में फेरबदल कर बैक्टीरिया को उनके ही पोषण तंत्र से नष्ट किया जा सकता है।कैविटी का कारण बनने वाले स्ट्रेप्टोकोकस म्यूटंस (एस. म्यूटंस) शरीर से निकलने वाले एंजाइम 'बायोसिंथेस एम' की बदौलत फलते-फूलते हैं। अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार इस एंजाइम की रोकथाम से एस. म्यूटंस बैक्टीरिया के विकास की क्षमता 10 हजार गुना कम हो जाती है।प्रमुख अनुसंधानकर्ता रार्बट जी क्वीवे के अनुसार, 'हमारा सबसे पहला लक्ष्य दातों की सड़न के लिए जिम्मेदार बैक्टीरिया को उसके ही एसिड से मारना है। उम्मीद है इसके बाद हमें ऐसे बैक्टीरिया से लड़ने में भी सफलता मिलेगी जिस पर एंटीबायोटिक का असर नहीं होता है।'

DENTAL CARE IN HINDI

 

कैसे रखें दांतों को सलामत  

दांतों व मसूड़ों की परेशानी से बचने के लिए डेन्टिस्ट के सम्पर्क में रहें। डेन्टिस्ट से ब्रश करने के सही तरीके पूछें और दांतो व मसूड़ो को सही रखने के उपाय जानें। हर रोज़ कम से कम 2 मिनट तक ब्रश करें। सोने से पहले ब्रश ज़रूर करें और ध्यान रखें मीठा खाने के बाद पानी ज़रूर पीयें।
जब हम मीठा खाते हैं तो हमारे मुंह में एसिड बनते हैं, जिनसे इनेमल को नुकसान पहुंचता है। फलोराइड युक्त टूथपेस्ट से दिन में दो बार ब्रश करें।
ध्यान रखें कि टूथब्रश का ब्रश मुलायम हो। हर 3 से 4 महीने पर ब्रश बदलें और हर 6 महीने पर डेन्टिस्ट से सम्पर्क करें।

हमारे दांतो में या मसूड़ों में किसी भी प्रकार की परेशानी से हमारा पूरा स्वास्थ्य और हमारी पूरी पर्सनालिटी प्रभावित हो सकती है।

 

ImageCourtesy@gettyimages

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टिप्पणियाँ
  • vikram27 May 2012

    poor quality of information...?

  • reetu birha19 May 2012

    plz clean teeth for advise

  • bhagchand12 Feb 2012

    how to i make my teeth strong

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