जानें शराब न पीने वालों को क्‍यों होता है फैटी लीवर डिजीज

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 05, 2016
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Quick Bites

  • फैटी लीवर का एक प्रकार है नॉन-एल्कोहलिक फैटी लीवर।
  • ये लीवर के कोशिकाओं में फैट जमा होने की स्थिति है।
  • अल्कोहल के अलवा अन्य कारणों से लीवर में फैट जमा होता है।
  • 5 से 10 फीसदी से अधिक फैट जमा होना फैटी लीवर का संकेत है।

फैटी लीवर की समस्या तब होती है जब लीवर में फैट अधिक जम जाता है। फैटी लीवर की बीमारी लीवर में अधिक फैट जमने के कारण होती है और लीवर में फैट अमूमन अत्यधिक मात्रा में शराब का सेवन करने से होता है। लेकिन यहां हम नॉन-एल्कोहलिक फैटी लीवर की बात कर रहे हैं। यह भी लीवर में फैट जमा होने के कारण होती है। लेकिन इसमें लीवर में फैट शराब का सेवन करने के बजाय अन्य कारणों से जमा होता है। ऐसे में ये अत्यधिक पेचीदा होता है क्योंकि इसेक लिए आपको सबसे पहले ये जानना पड़ता है कि फैट जमा होने का कारण क्या है। तो आइए इस लेख में इसके बारे में और इसके कारणों के बारे में विस्तार से जानें।

 

क्‍या है फैटी लीवर

फैटी लीवर एक शब्द है जो लीवर में फैट जमा होने का कहते हैं। लीवर में 5 से 10 फीसदी से अधिक फैट जमा होना फैटी लीवर का संकेत है। फैटी लीवर रिवर्सिबल कंडीशन है जिससे लाइफस्टाइल में सुधार कर ठीक किया जा सकता है। इसके ऐसे कोई लक्षण नहीं होते जो स्‍थायी तौर पर लीवर को नुकसान पहुंचा दें।

 

नॉन-एल्कोहलिक फैटी लीवर के कारण

शहरीकरण के दौर में लेगों के लाइफ स्टाइल में कई सारे बदलाव आए हैं जिससे लोगों में ओवरवेट, मोटापा और डायबिटीज की समस्या होने लगी है। ये तीनों कारक ही फैटी लीवर के सबसे बड़े कारक माने जाते हैं। ऐसे में अगर आप अल्कोहल नहीं ले रहे हैं और आपको इन तीनों में से कोई भी समस्या है तो आपको फैटी लीवर होने की पूरी संभावना है।
अगर इसका समय पर इलाज नहीं करवाया गया तो ये सिरोसिस लिवर में बदल सकता है। ये लिवर डैमेज होने की अवस्था है।

इस अवस्था में केवल लीवर ट्रांसप्लांट करके ही इस बीमारी से बचा जा बचता है। लीवर ट्रांसप्लांट काफी महंगा होता है और इसमें सबसे बड़ी समस्या लीवर डोनर को खोजने की रहती है। तो इससे बचने का अच्छा और सस्ता उपाय है अपनी लाइफ-स्टाइल और खान-पान में सुधार करें।

 

ऐसे होता है फैटी लिवर

लीवर शरीर का दूसरा सबसे जरूरी हिस्सा है। इसके सेल में हमेशा फैट जमा होते रहता है। लेकिन जब इसके सेल में बहुत अधिक फैट जमा हो जाता है तो इससे फैटी लीवर की स्थिती उत्पन्न हो जाती है। इस स्थिती में लिवर में सूजन आने लगती है और लिवर सिकुड़ने लगता है।


क्‍या हैं लक्षण

नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर के सामान्य तौर पर कोई लक्षण नहीं दिखते। जब ये होते हैं तो अमूमन ये लक्षण नजर आते हैं-

  • थकान
  • दायें एब्डोमन के ऊपरी हिस्से में दर्द
  • वजन में गिरावट

 

इसके कारण

  • मोटापा
  • हाइपरलीपिडीमा (hyperlipidemia) या फिर खून में हाई लेवल के फैट हों
  • मधुमेह
  • आनुवांशिक कारण
  • किसी विशेष दवाई का साइड इफेक्ट होना

 

इसके अलावा ये दो भी

फैटी लीवर तीन तरह के होते हैं। नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर के अलावा ये अन्य दो तरह के भी होते हैं।

  • नॉन-अल्कोहलिक स्टेटोहेपाटाइटिस  (Nonalcoholic steatohepatitis)
  • नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर डीज़िज-सिरोयोसिस (Nonalcoholic fatty liver disease-associated cirrhosis)

 

रिस्क फैक्टर

  • इन कुछ बीमारियों से इसके खतरे अधिक बढ़ जाते हैं।
  • गैस्ट्रिक बायपास सर्जरी
  • हाई कैलेस्ट्रॉल
  • बल्ड में हाई लेवल के ट्राईग्लिसरीड्स का होना
  • मेटाबॉलिक सिंड्रोम
  • पॉलिस्टिक ओवरी सिंड्रोम
  • स्लीप ऐप्नीआ
  • थायरॉयड

 

फैटी लिवर से ऐसे बचें

  • उचित समय पर डॉक्टर को दिखाएं औऱ इलाज शुरु करवाएं।
  • लाइफ-स्टाइल में बदलाव करें। नियमित व्यायाम और प्राणायाम आदि करें।

 

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