क्लिनिकल ट्रॉयल के बिना देश में नहीं बिकेगी कोई दवा

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 04, 2014
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clinical trailकेंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने विदेशों में बिक रही दवाओं को देश में बिना क्लिनिकल ट्रायल के बिक्री करने पर पाबंदी लगा दी है। इस फैसले के बाद ड्रग कंट्रोलर जनरल अब ऐसी दवाओं की अनुमति नहीं दे सकेंगे।



मौजूदा नियमों में ड्रग कंट्रोलर को यह अधिकार प्राप्‍त था कि विदेशों में मंजूर किसी दवा को जनहित में बिना क्‍लिनिकल ट्रायल के मंजूरी दे सकता था। लेकिन अब नियमों में बदलाव कर सख्‍त बना दिया गया है।

 

केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार अब केवल अत्‍यधिक आपातकालीन स्थिति, राष्‍ट्रीय आपातकाल, माहमारी फैलने या उस बीमारी के इलाज की कोई दूसरी दवा नहीं होने की स्थिति में सरकार बिना ट्रायल के दवाओं की अनुमति दे सकती है।

इसके लिए यह जरूरी है कि जिस देश में दवा बनी हो, उसे वहां के दवा नियामक की स्‍वीकृति प्राप्‍त हो। अब तक ड्रग कंट्रोलर जनहित में ऐसी दवाओं को मंजूरी दे सकते थे। पिछले दो तीन सालों में ऐसी दर्जनों दवाओं को ड्रग कंट्रोलर ने मंजूरी प्रदान की जिनकी देश में कोई तत्‍काल आवश्‍यकता नहीं थी।

 

मंत्रालय अब दवाओं की मंजूरी की समीक्षा कर रहा है। इनमें से कुछ दवाओं की बिक्री स्‍थगित भी किये जाने की संभावना है।

जानकार मानते हैं कि यदि कोई दवा किसी देश में मंजूर है तो भी भारत में उसकी बिक्री से पहले फेस-3 के क्लिनिकल ट्रायल से गुजरना चाहिये। इससे यह पता चलेगा कि वह दवा भारत में कितनी प्रभावी है।

यह जरूरी नहीं कि जितनी प्रभावी वह दवा अफ्रीका या अमेरिका के लोगों पर हुई हो, उतनी ही भारत में भी हो। इसलिए कम से कम तीन-चार केंद्रों पर सौ-सौ लोगों पर यह परीक्षण होते हैं। लेकिन कंपनियां इस भारी खर्च से बचती हैं।

 

Sources- Agencies

 

Image Coutesy- Getty Images

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