शिशु की कोमल त्‍वचा का इन 5 तरीकों से रखें ख्‍याल

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 23, 2018
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Quick Bites

  • बच्‍चे की त्‍वचा बहुत संवेदनशील होती है इसलिए संक्रमण हो सकता है।
  • नहलाते वक्‍त खुजली से बचाने के लिए माइल्‍ड साबुन का प्रयोग करें।
  • डायपर रैशेज से बचाने के लिए डायपर बदलते वक्‍त विशेष ध्‍यान रखें।

छोटे बच्चों की त्वचा बहुत कोमल होती है, इसलिए उसकी देखभाल में विशेष ध्‍यान देने की जरूरत होती है। बच्‍चे की त्वचा को स्‍वस्‍थ रखने का मतलब केवल चेहरे की त्‍वचा से नहीं बल्कि पूरे शरीर की त्‍वचा से है। आपकी हल्‍की सी असावधानी से बच्‍चे की त्‍वचा में इंफेक्‍शन हो सकता है। बहुत नाजुक होती है बच्‍चों की त्‍वचा। जरा सी नादानी से बच्‍चों को काफी परेशानी हो सकती है। ऐसे में आपको चाहिए अपने छोटे से बच्‍चे की त्‍वचा का पूरा खयाल रखें। उसके नहाने के साबुन से लेकर, उसे पहनाये जाने वाले कपड़ों तक। उसके लोशन और पाउडर से लेकर मालिश के लिए इस्‍तेमाल किये जाने वाले तेल तक। सब चुनते और इस्‍तेमाल करते समय आपको खास सावधानी बरतनी चाहिए।

बच्‍चों को नहलाते वक्‍त ऐसे साबुन का प्रयोग न करें जो हार्ड हों, ऐसे कॉस्‍मेटिक क्रीम का प्रयोग भी न करें जिससे बच्‍चे की त्‍वचा में इंफेक्‍शन हो। सूखे मौसम में नहाने से पहले तेल मालिश करने से उनकी बच्‍चे की त्वचा नर्म और साफ रहती है। चिकित्‍सक की सलाह पर बच्‍चे की त्वचा की नमी बरकरार रखने के लिए हल्‍का मॉइश्चराइजर का प्रयोग कर सकती हैं। इसके अलावा बच्‍चे की त्‍वचा को रैशेज और इंफेक्‍शन से भी बचायें।

नहलाते वक्‍त ध्‍यान रखें

जन्‍म के 10 दिन बाद बच्‍चे को हल्‍के गरम पानी से नहला सकते हैं। जैसे-जैसे बच्‍चा बड़ा होता जाता है वह फर्श पर चलने की प्रैक्टिश करता है ऐसे में उसकी त्‍वचा गंदी हो जाती है और ऐसे में त्‍वचा का संक्रमण फैलने की संभावना भी रहती है। इसलिए बच्‍चे को नहलायें, नहलाने से पहले शरीर की बेबी ऑयल से जरुर मालिश करें। त्‍वचा को हमेशा नमी देती रहें क्‍योंकि साबुन की वजह से बच्‍चे की त्‍वचा रूखी हो सकती है।

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साबुन के प्रयोग के वक्‍त सावधानी

बच्‍चों को साबुन लगाने से परहेज करें, क्‍योंकि इसके कारण बच्‍चे की त्‍वचा पर संक्रमण हो सकता है। हालांकि, कुछ बच्चों की त्‍वचा स्ट्रॉग हो सकती है लेकिन अधिकांशत: बच्‍चों की त्‍वचा बहुत ही नाजुक और संवेदनशील होती है। ऐसे में साबुन में मौजूद डिटर्जेट उसकी त्वचा में खुजली और संक्रमण पैदा कर सकते हैं। इसलिए बच्चे को नहलाते वक्‍त माइल्ड सोप का ही इस्‍तेमाल करें।

त्वचा को रखें सूखी

बच्‍चे की त्‍वचा को सूखी रखने की कोशिश करें, नहीं तो उसे डायपर रैशेज हो सकते हैं। डायपर्स बदलते समय त्‍वचा को अच्छी तरह से सुखाने के बाद ही दूसरा डायपर बच्‍चे को पहनायें। अगर जल्दबाजी में आप ऐसा करना भूल जाती हैं तो त्‍वचा में रह गई नमी से उसे बच्‍चे को रैशेज हो सकते हैं जो संक्रमण का कारण बनते हैं। 

स्‍क्रैच से बचायें

बच्‍चे की त्‍वचा को सुरक्षा की जरूरत होती है। बच्चे हाथों के नाखूनों से खुद को स्क्रैच लगा सकते हैं। इससे बचाव के लिए उसके हाथों को बेबी ग्लव्ज से पहनाकर रखें। इससे आपका बेबी अंगूठे और अंगुलियों को मुंह में भी नहीं लेगा। इससे बच्‍चे को अगूठे चबाने की आदत भी नहीं पड़ेगी।

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मालिश के वक्‍त

बच्‍चों को मालिश बहुत जरूरी है, बच्‍चों की मालिश कीजिए। लेकिन मालिश के वक्‍त तेल का चयन करते वक्‍त ध्‍यान रखें। बहुत ज्यादा सुगंधित तेलों का इस्तेमाल न करें, क्योंकि कुछ सुगंधों से त्वचा में एलर्जी या खुजली हो सकती है। 1 साल तक के बच्‍चों को सरसों के तेल से मालिश न करें।

उबटन लगायें

कुछ बच्चों के शरीर पर घने बाल होते हैं, लेकिन आमतौर पर समय के साथ बाल कम होते जाते हैं। यह तो स्पष्ट है कि बाल हटाने के तरीके बच्चों पर नहीं आजमाए जा सकते, लेकिन बेसन और दूध का उबटन शरीर पर रगड़ने से बालों की बढ़त थम सकती है। इसके अलावा इस उबटन के प्रयोग से बच्‍चे की त्‍वचा में भी निखार आता है। बच्‍चे की त्‍वचा बहुत नाजुक होती है इसलिए उसपर किसी भी तरह का प्रयोग न करे, यदि त्‍वचा में किसी भी प्रकार का संक्रमण दिखे तो तुरंत चिकित्‍सक से संपर्क करें।

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