नई लेजर तकनीक से पता चलेगा सांस की बीमारी का

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Feb 04, 2014
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वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नई लेजर तकनीक का विकास किया है जिससे सांसों से संबंधित बीमारी का पता लगाने में आसानी होगी। भौतिकी से जुड़े विशेषज्ञों द्वारा खोजी गई इस तकनीक से बेहद निम्न सांद्रता का भी पता लग सकता है।

New Laser Technologyइस लेजर तकनीक की मदद से दूर संवेदी महत्वपूर्ण ग्रीनहाउस गैसों और उत्सर्जित सांस में मौजूद गैसों से बीमारी का सही सही पता लगाने में मदद मिल सकेगी।



ऑस्ट्रेलिया के एडीलेड यूनिवर्सिटी के भौतिकशास्त्र के विशेषज्ञों ने एक नई लेजर तकनीक विकसित की है, जो समान तरंगदैर्ध्य की लेजर तकनीकों से 25 गुणा अधिक प्रकाश का उत्सर्जन करती है।



इस यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट फॉर फोटोनिक्स एंड एडवांस सेंसिंग के अध्‍ययनकर्ता ओरी हेंडरसन स्पायर ने बताया कि, "नई लेजर तकनीक ज्यादा शक्तिशाली है और यह पहले से मौजूद मध्य अवरक्त आवृत्ति रेंज में काम करने वाली दूसरी लेजर तकनीकों से कहीं अधिक सक्षम है।"



नई लेजर तकनीक मिड इंफ्रारेड फ्रीक्‍वेंसी रेंज में समान तरंगदैर्घ्‍य में काम करती है, जहां पर कई तरह की महत्वपूर्ण हाइड्रोकार्बन गैसें प्रकाश का अवशोषण करती हैं।


यह तकनीक सर्जरी के दौरान निकलने वाली सांस में मौजूद गैसों के विश्लेषण को संभव बनाएगी। उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति मधुमेह का मरीज है तो, उसके द्वारा छोड़ी गई सांस में एसेटोन का पता इस तकनीक से चल सकेगा।

 

 

source - sciencedaily.com

 

 

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