प्राकृतिक चीज भी हो सकती है जहरीली

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 07, 2016
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Quick Bites

  • नैचुरल प्रोडक्ट्स भी हो सकते हैं नुकसानदायक।
  • सुरक्षित नहीं होते रिकमेंडेड और टेस्टेड उत्पाद।
  • इन उत्पादों के  89% इंग्रिडियेंट नुकसानदायक।
  • ये प्रोडक्ट बनते हैं बेस्ट कैंसर का कारण।

क्या आप नैचुरल प्रोडक्ट खरीदने के लिए अपना एक्स्ट्रा समय और एक्स्ट्रा पैसे खर्च करते हैं? ऑर्गेनिक शेम्पू? ऑर्गेनिक टूथपेस्ट? बोटेनिकल शेम्पू? हर्बल फेशवॉश? आदि ऐसे ही कई हर्बल प्रोडक्ट खरीदने में अपना समय बिताते हैं और सोचते हैं कि इससे तो आप नुकसानदायक और दुष्प्रभावी कीटाणुओं से बच जाएंगे। लेकिन आप गलत हैं।

 

क्योंकि हर वो चीज, जिस पर सेफ ( safe) और नैचुरल ( natural) का टैग लिखा होता है, जरूरी नहीं की सुरक्षित हो।


फुड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कहता है कि इस तरह के टैग, जैसे की नैचुरल(natural), सेफ (safe), रिकमेंडेड (recommended) और टेस्टेड (tested), पूरी तरह से मार्केंटिंग के शब्द है जिसका मतलब होता है कुछ भी या कुछ भी नहीं। साधारण सी बात है कि इन प्रोडक्ट को बनाने वालों को ऐसा दावा करने के लिए किसी भी प्रूफ की जरूरत नहीं होती। बल्कि इन शब्दों से उनकी बिक्री ही बढ़ती है जिस कारण इन शब्दों का इस्तेमाल आजकल हर प्रोडक्ट में किया जाता है।  

निजी केयर प्रोडक्ट

निजी केयर प्रोडक्ट जैसे की शेम्पू, शेविंग क्रीम, टूथपेस्ट आदि अन्य मेकअप के सामान कॉस्मेटिक में आते हैं। कॉस्मेटिक शब्द का मतलब हम समझते हैं हेल्दी और हाईजीन प्रोडक्ट। जबकि फुड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) इनको रेग्युलेट नहीं करती और ना ही इन प्रोडक्ट को ऐसा कोई लेबल देती है।


एफडीए कहता है कि , “ कटस्मेटिक बनाने वाली कंपनी किसी भी तरह की सामग्री या कच्चा मटेरियल इस्तेमाल करती है। और इन बने हुए प्रोडक्ट को बिना किसी सरकारी अप्रूवल के बेचती है।


ऐसे में आब आपके दिमाग में ये सवाल आ रहा होगा कि फिर इन्हें खरीदने लायक सुरक्षित होने का अफवाह कौन उड़ाता होगा?

 

ऐसा इंडस्ट्री करती है।  

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89% सामग्री सुरक्षित नहीं

कॉस्मेटिक इंग्रिडियेंट रिव्यु ( सीआईआर) पेनल वर्तमान में कॉस्मेटिक प्रोडक्ट का चार्ज ली हुई है। एनवायरमेंटल वर्किंग ग्रुप ने पाया है कि पर्सन केयर के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट में जो 10,500 तरह के इंग्रिडियेंट मिले होते हैं उनमें से में 89% इंग्रिडियेंट को सीआईआर और एफडीए से कोई अप्रूवल नहीं मिला होता। यहां तक की इन प्रोडक्ट में मिले इन इंग्रिडियेंट को किसी भी तरह की सार्वजनिक एकाउंटेबल इंस्टिट्यूशन से भी प्रमाणित नहीं किया गया है।

 

फेयरनेस क्रीम्स

अब सबसे सामान्य कॉस्मेटिक के तौर पर किसी फेयरनेस क्रीम को ही लें। अब तो कई डर्मटॉलजिस्ट भी कह चुके हैं कि इन प्रोडक्ड्स में ब्लीच का इस्तेमाल किया गया होता है जिसके कारण ये इंसान को गोरा लुक प्रदान करते हैं। ये सच भी है। ज्यादा पिंग्मेंटेशन की समस्या है इन क्रीम से तभी ठीक होती है जब इसमें ज्यादा कैमिकल मौजूद होते हैं। लेकिन ये केमिकल्स हमारी स्किन को अंदर तक नुकसान पहुंचाते हैं।


ऐसा ही शेम्पू के साथ है। केमिकल्स से भरे ये शैम्पू बालों को काफी नुकसान पहुंचाते हैं।

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कई प्रोडक्ट्स से होता है ब्रेस्ट कैंसर

कई कॉस्मेटिक उत्पादों से ब्रसेट् कैंसर की समस्या भी उत्पन्न हो जाती है। हाल ही में बर्कले की यूनीवर्सिटी ऑफ कैलोफोर्निया के एक रिसर्चर ने ये बात कही की अधिकतर कॉस्मेटिक्स में पैराबेन मौजूद होते हैं जो औरतों के शरीर के उन हार्मोन्स को एक्टिवेट कर देता है, जिनका ताल्लुक ब्रेस्ट कैंसर से होता है। इस स्टडी में इस बात की पुष्टि हुई है कि और इसे लेकर चिंता भी जाहिर की गई कि लंबे समय तक इन पैराबेन का हमारी बॉडी से कॉन्टेक्ट प्यूबर्टी और प्रेग्नेसी के दौरान नुकसान पहुंचाते हैं।

 

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