इस नई सेक्स ट्रांसमिटेड डिजीज के बारे में भी जानें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Dec 24, 2015
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Quick Bites

  • नए प्रकार के यौन संक्रमण रोग के बारे में जानकारी आई है सामने।
  • इंटरनेशनल जर्नल ऑफ़ एपिडेमियोलॉजी में प्रकाशित हुआ शोध पत्र।
  • 4507 पुरुषों और महिलाओं के मूत्र के नमूने की जांच के परिणाम।
  • यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन के शोधकर्ताओं ने किया यह शोध।

यूं तो पहले से ही कई प्रकार के यौन संक्रमण रोगों (सेक्स ट्रांसमिटिड डिजीज) के बारे में लोगों के सचेत व जागरूक किया जाता रहा है, लेकिन इसी बीच एक नए प्रकार के यौन संक्रमण रोग के बारे में जानकारी सामने आई है। इस यौन संक्रमण रोग को माइकोप्लाज्मा जेनेटीलियम (mycoplasma genitalium, or MG) के नाम से जाना जाता है। चलिये विस्तार से जानें कि माइकोप्लाज्मा जेनेटीलियम क्या है और इससे बचाव व उपचार के क्या विकल्प मौजूद हैं -    

यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन का शोध

हालांकि विशेषज्ञों को अस्सी के दशक से ही एमजी की जानकारी थी, इंटरनेशनल जर्नल ऑफ़ एपिडेमियोलॉजी में प्रकाशित नए पेपर से पता चला कि ये जीवाणु संक्रमण जो मूत्र और जननांग आदि जगहों पर रहता है, यौन संपर्क के माध्यम से फैलता है। निष्कर्षों तक पहुंचने के लिए, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने 18 से 44 वर्ष की उम्र के बीच की उन 4507 पुरुषों और महिलाओं के मूत्र के नमूने की जांच की, जोकि जो कम से कम एक साथी के साथ यौन रूप से सक्रिय थे। इन लोगों में से 48 महिलाओं और 24 पुरुषों में माइकोप्लाज्मा जेनेटीलियम संक्रमण देखा गया। हालांकि जब शोधकर्ताओं ने लगभग 200 किशोरों से मूत्र के नमूने का परीक्षण किया, जिन्होंने कभी सेक्स नहीं किया था, तो किसी को भी यह संक्रमण नहीं था।

 

New STD in Hindi

 

इसके लक्षण क्या हैं?

न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी लांगोने’स जॉनन एच. टिस्क के सेंटर फॉर वीमेन’स हेल्थ में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. डार्डिक कहते हैं कि बाकी के यौग संक्रमण रोगों की ही तरह 'एमजी' भी स्पर्शोन्मुख होता है। यहां तक कि यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन ने शोध में पाया कि 'एमजी' से पीड़ित 94.4 प्रतिशत पुरुषों और 56.2 प्रतिशत महिलाओं को कोई भी लक्षण दिखाई नहीं दिये। हालांकि डॉ. डार्डिक कहते हैं कि इसके कुछ संकेत हैं, जैसे महिलाओं में जलन, पेशाब करते समय जलन और सेक्स के बाद रक्तस्राव आदि। वहीं पुरुषों में सबसे सामान्य लक्षण हैं, पेशाब करते समय दर्द, लिंग से चिपचिपा पदार्थ निकलना।   


'एमजी' को गर्भाशय ग्रीवा में सूजन (गर्भाशयग्रीवाशोथ) तथा श्रोणि में सूजन की बीमारी (pelvic inflammatory disease, PID) जैसी गंभीर बीमारियों से जोड़ कर देखा जाता है, जोकि अक्सर क्लैमाइडिया और सूजाक (chlamydia and gonorrhea) जैसे अन्य एसटीडी की वजह से होते हैं।
डॉ. डार्डिक के अनुसार पीआईडी से पिड़ित 10 प्रतिशत महिलाएं (जिसके कारण पेट में दर्द, बुखार, गर्भाशय ग्रीवा, या सेक्स के दौरान रक्तस्राव या दर्द होता है), में 'एमजी' अंतर्निहित कारण होता है।

क्या इसका परीक्षण किया जा सकता है?

डॉ. डार्डिक कहते हैं कि, आप अपने डॉक्टर से इसका परिक्षण करने के लिये कह सकते हैं, खासतौर पर यदि लक्षण जाने-पहचाने लगें। हालांकि क्योंकि इस रोग के बारे में हाल ही में जाना गया है, इसका परिक्षण बाकी के यौग संचरित रोगों जैसे, क्लैमाइडिया आदि के जितना सरल नहीं है। लेकिन जल्द ही इसके भी अच्छे टेस्च मौजूद होंगे।
 

क्या इसका इलाज है?

डॉ. डार्डिक कहते हैं कि, शुक्र है, कि इसका इलाज मौजूद है। एंटीबायोटिक अज़िथ्रोमाइसिन (azithromycin, ठीक वैसे ही जब गले का संक्रमण होने पर “Z-pack” ली जाती है), 'एमजी' के इलाज में प्रभावी है।


वे बेहद ज़ोर डालकर कहते हैं कि इससे बचाव के लिये कंडोम का इस्तेमाल ज़रूर करें। यह एक बैक्टीरिया है, और कंडोम बैक्टीरिया के खिलाफ बहुत प्रभावी होते हैं।



Image Source - Getty

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