साइकल चलाने वालों के लिये स्ट्रेच एक्सरसाइज

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 29, 2015
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Quick Bites

  • रोजाना साइकलिंग करने वालों के लिये कुछ स्ट्रेच एक्सरसाइज करना जरूरी।
  • स्ट्रेचिंग करने से जोड़ों व मांसपेशियों की सक्रियता, गतिशीलता बनी रहती है।
  • स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज किसी भी एक्सरसाइज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।
  • हिप फ्लैक्सर्स कूल्हों व कमर के ऊपरी हिस्से की मांसपेशियों का समूह होता है।

साइकलिंग करना एक कमाल की फायदेमंद और मज़ेदार एक्सरसाइज है। रोज साइकलिंग करने से आपका शरीर फिट और निरोग रहता है, आपके पैसे बचते हैं, आप खुश रहते हैं और आपका आत्मविश्वास भी बढ़ता है। लेकिन किसी भी एक्सरसाइज की तरह ही साइकलिंग के दौरान भी सभी सावधानियों का ख्‍याल रखना जरूरी है। साइकल चलाने वालों के लिये स्ट्रेच करना भी बेहद जरूरी होता है। साइकलिंग से पहले स्ट्रेचिंग करने से मांसपेशियों का खिंचाव दूर होता है, साथ ही नियमित रूप से स्ट्रेचिंग करने से जोड़ों व मांसपेशियों की सक्रियता और गतिशीलता बनी रहती है। स्ट्रेचिंग किसी भी एक्सरसाइज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। तो चलिये जानें साइकल चलाने वालों के लिये कुछ बढ़िया स्ट्रेच एक्सरसाइज।

 

क्वाड्रिसेप्स स्ट्रेच करें

जब आप साइकिल चलाते हैं, दौड़ते हैं, एरोबिक्स करते हैं, या फिर शरीर के निचले हिस्से की एक्सरसाइज के लिए किसी मशीन आदि का इस्तेमाल करते हैं तो उस समय आपके क्वाड्रिसेप्स क्रियाशील होते हैं। जब यह मांसपेशियां मजबूत हो जाती हैं, तो घुटनों या कूल्हों के आसपास के क्षेत्र में चोट लगने का जोखिम भी अधिक हो जाता है, इसलिये स्ट्रेच जरूरी हो जाता है। क्वाड्रिसेप्स स्ट्रेच करने के लिये दोनों पैरों पर सीधे खड़े हो जाएं और संतुलन बनाने के लिए किसी मजबूत चीज को पकड़ लें। अब अपनी दाईं एड़ी को पकड़ें और घुटने को पीछे की ओर मोड़ते हुए इसे कूल्हे तक ले आएं। इसके बाद यही दूसरी टांग से दोहराएं।

 

Stretching Exercises For Cyclists in Hindi

 

एब्डॉमिनल स्ट्रेच भी करें

एब्डॉमिनल मसल्स अर्थात पेट की मांसपेशियां, जिनमें सबसे अंदर की मांसपेशियां भी शामिल होती हैं, लगातार एब वर्कआउट करने से सख्त हो जाती हैं। एब्डॉमिनल स्ट्रेच करने के लिये सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं और आपके हाथों को कंधों के नीचे लगा लें। इसके बाद अपने सिर और कंधों को बाजुओं के दम पर ऊपर की ओर उठाएं। ध्यान रहे कि कमर का हिस्सा जमीन पर ही टिका रहे। इस एक्सरसाइज में खिंचाव पेट की सामने वाली मांसपेशियों में महसूस होता है।

 

हिप-फ्लैक्सर स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज

हिप फ्लैक्सर्स कूल्हों और कमर के ऊपरी हिस्से की मांसपेशियों का समूह होता है। हिप फ्लैक्सर्स घुटनों को सीने तक ले जाते हैं और टांगों को आगे से पीछे और दाईं तरफ से बाईं ओर भी ले जाते हैं। आज के दौर में ज्यादातर लोग अब पूरा दिन ऑफिस में बैठ कर काम करते हैं, जिसकी वजह से उन्हें हिप फ्लैक्सर्स के सख्त होने व चोट लगने का खतरा बना रहता है। रनिंग करने वाले और साइकिल चालकों को इन मांसपेशियों को मजबूत रखने की ओर  खास ध्यान देना चाहिए। सख्त हिप फ्लैक्सर्स की वजह से पीठ में भी समस्या हो सकती है, साथ ही कूल्हे के अग्र भाग में झुकाव आ सकता है। हिप-फ्लैक्सर स्ट्रेच करने के लिये आगे की ओर झुकें और अपना बायां पैर आगे ले जाएं व हाथ कमर या जांघों पर रख लें। अब बाएं पैर पर जोर डालें, लेकिन ध्यान रहे कि टांग की मांसपेशियां कड़ी हों और पीठ सीधा रखें। इसके बाद दाएं पैर से इस प्रक्रिया को दोहराएं।

 

जॉइंट्स के लिए स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज

इसमें जॉइंट्स को क्रमशः तीन दिखाओं में घुमाया जाता है, क्लॉकवाइज/एंटीक्लॉकवाइज, अपवर्ड/डाउनवर्ड तथा साइडों में। स्ट्रेचिंग करने के लिये गर्दन से शुरुआत करते हुए कंधों, कलाई, छाती, कमर और फिर घुटनों व टखनों तक जाना होता है। अगर आपको किसी तरह की बैक समस्या हो, तो आगे की ओर ज्यादा न झुकें, और न ही कमर पर बहुत ज्यादा जोर डालने वाली एक्सरसाइज ही करें।



हमेशा ध्यान रखें कि स्‍ट्रेचिंग करने से पहले वार्म अप जरुर करें। वार्मअप करने से मसल्‍स, लीगामेंट और टेंडन पूरी तरह से स्‍ट्रेच हो जाते हैं। वार्म अप करने के लिये 10 मिनट के लिये वॉकिंग या जॉगिंग भी कर सकते हैं। साथ ही स्‍ट्रेच का तभी बेहतर असर होगा जब आप उसे करते समय ठीक तरह से सांस लेंगे।


Image Source- Getty

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