चीनी ज्य़ादा खाने से बेचैनी और अवसाद की समस्या

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 13, 2017
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Quick Bites

  • मीठी चीजे खाने-पीने से अवसाद जैसी समस्या
  • यह खतरा खासतौर पर पुरुषों को होता है
  • पुरुषों में मानसिक विकार पैदा होने का खतरा है

अखिल भारतीय अयुर्विज्ञान संस्‍थान (एम्स) दिल्ली की न्यूट्रिशनिस्ट डॉक्टर वसुंधरा सिंह के मुताबिक, ज्य़ादा चीनी खाने से शरीर में विटमिन बी खासतौर पर विटमिन बी6 की कमी हो जाती है। विटमिन बी 6 सेरोटोनिन केमिकल प्रोड्यूस करता है, जो हमारे मूड को खुशनुमा रखता है। अगर उसकी मात्रा शरीर में कम हो जाए तो इससे घबराहट और डिप्रेशन की समस्या हो सकती है।

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अधिक मात्रा में मीठी चीजे खाने-पीने से अवसाद और बेचैनी जैसी समस्या हो सकती है। यह खतरा खासतौर पर पुरुषों को होता है। शोधकर्ताओं ने एक नए अध्ययन के नतीजों को देखते हुए यह चेतावनी दी है। शोधकर्ताओं ने पाया कि चीनी के अधिक सेवन से पुरुषों में मानसिक विकार पैदा होने का खतरा बढ़ सकता है।

यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन की शोधकर्ता अनिका के मुताबिक, चीनी की अधिकता वाले आहार और पेय पदार्थ स्वास्थ्य पर कई प्रकार के नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। इसका बुरा असर ब्रेन पर पड़ता है, जिससे मानसिक विकार पैदा हो सकते हैं। विशेष रूप से यह पुरुषों के लिए $खतरे का संकेत है। वैसे, मानसिक विकारों का खतरा पैदा करने के लिए कई चीजें जिम्मेदार हो सकती हैं लेकिन शोध में पाया गया है कि चीनी की अधिकता वाले खाद्य और पेय पदार्थ इसके अहम कारक हो सकते हैं। शोधकर्ताओं ने बताया कि जो पुरुष प्रतिदिन 67 ग्राम से अधिक मात्रा में चीनी का सेवन कर रहे थे, पांच साल बाद उनमें अवसाद और बेचैनी जैसे विकार पैदा होने का खतरा सामान्य लोगों के मुकाबले 23 फीसदी ज्य़ादा बढ़ गया।

इम्युनिटी में कमी से माइग्रेन

माइग्रेन यानी सिर के आधे हिस्से में अचानक तेज दर्द होने की बीमारी प्रतिरक्षा प्रणाली में किसी गड़बड़ी का नतीजा हो सकती है। अमेरिका में हुए एक अध्ययन में इसके संकेत मिले हैं, जिसके बाद शोधकर्ताओं को इस रोग का प्रभावी उपचार खोजे जाने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। शोध में पाया गया है कि माइग्रेन का तंत्रिका तंत्र से विशेष संबंध नहीं है बल्कि यह सूजन या इन्फ्लेमेशन की सामान्य प्रक्रियाओं से जुड़ा हो सकता है। इसलिए सूजन संबंधी रोगों के लिए विकसित किए गए उपचारों के जरिये माइग्रेन को शांत किया जा सकता है।

अध्ययन से इसके संकेत भी मिले हैं कि आईबीएस, सिस्टाइटिस व यूरेथ्राइटिस जैसे रोगों के पनपने में प्रतिरक्षा तंत्र के एक घटक की भूमिका होती है। शोध में 1.30 लाख परिवारों के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया, जिसके बाद वे इस नतीजे पर पहुंचे।

सोर्स- सखी

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