सिज़ोफेरनिया क्‍या है

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 10, 2011
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Boy sitting with arms crossedसिज़ोफेरनिया एक दिमाग से जुड़ी परेशानी है जिसमें कि दिमाग कमज़ोर हो जाता है। भारतीय और अमेरिकन्स में यह बहुत ही आम बीमारी है जिसने लगभग एक प्रतिशत लोगों को प्रभावित किया है। यह बीमारी किसी भी उम्र के लोगों में कभी भी हो सकती है। मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के अनुसार यह बीमारी जब बच्चा गर्भ में होता है उस समय न्यूरान में हुई गड़बड़ी से होती है।


अधिकतर लोगों में युवावस्था तक इस बीमारी के लक्षण छिपे होते हैं और इस अवस्था में आकर ही यह लक्षण दिखते हैं। इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति वास्तविक दुनिया से कोसों दूर रहता है और अपने आपको लोगों और घटनाओं से अलग समझने लगता है। मरीज़ो को आवाज़े भी सुनाई देती है और वो इन आवाज़ों को सही मान लेते हैं। ऐसे लोग ठीक प्रकार से सोच नहीं पाते क्योंकि उनके दिमाग में बहुत सी बातें एक साथ आती रहती हैं। उनकी संवेदनाएं और अभिव्यक्ति लगभग शून्य होती है। एक सिज़ोफेरनिया का मरीज़ एक आम इन्सान जितना ही उग्र होता है।


सिज़ोफेरनिया के लक्षण:


सिज़ोफेरनिया के कई प्रकार पाये गये हैं और हर एक प्रकार दूसरे से अलग होता है। जब हम सिज़ोफेरनिया की बात करते हैं तो पहली बात हमारे दिमाग में आती है पैरानायड पर्सनालिटी की। इस प्रकार के मरीज़ एक छोटे समूह में रहना पसन्द करते हैं और उन्हें ऐसा लगता है कि लोग उन्हें पसन्द नहीं करते। अगर इनकी बात कोई नहीं मानता तो यह खिज कर अपने काम में मन लगाना छोड़ देते हैं।


सिज़ोफेरनिया से ग्रसित लोगों की सोच मिली जुली होती है जिससे कि वो अपनी सोच को ना ही सही दिशा में ले जा पाते हैं और ना ही किसी परिणाम तक पहुंच पाते हैं। इस प्रकार की मिली जुली सोच ल्युसिनेशन और डिल्यूज़न को जन्म देती है ।


रेसिडुअल सिज़ोफेरनिया वह स्थिति है जो नार्मल सिज़ोफेरनिया जैसी स्थिति नहीं है लेकिन इस बीमारी से ग्रसित लोग जीवन में अपनी रूचि खो देते हैं। सिज़ोफेरनिया के मरीज़ बहुत ही सुस्त और उदासीन होते हैं ा कभी कभी वो अवसाद के साथ बाइपोलर डिज़ार्डर भी दर्शाते हैं।


सिज़ोफेरनिया की चिकित्सा:


सिज़ोफेरनिया के मरीज़ों को एण्टी साइकाटिक ड्रग्स दिया जाता है ा क्लोज़ापिन ड्रग्स का इस्तेमाल बहुत समय से होता आया है और यह नयी दवाओं से भी ज़्यादा प्रभावी है। रिस्पैरिडोन और ओलैनज़ापाइन ऐसे ड्रग्स हैं जिनसे कि हैल्युसिनेशन और डिल्युज़न से आराम मिलता है।


इन दवाओं को लेने के बाद भी जब बीमारी पूरी तरीके से ठीक हो जाये तब दवाओं का इस्तेमाल धीरे धीरे बंद करना चाहिए। सिज़ोफेरनिया की चिकित्सा में आगे जाकर एण्टी डीप्रेसिव, एण्टी एनज़ाइटी और एण्टी कनवल्सिव दवाओं के इस्तेमाल से प्राथमिक चिकित्सा के अतिरिक्त असर नहीं दिखते और बाई पोलर मानिया से भी बचा जा सकता है।

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टिप्पणियाँ
  • Ankur chopra04 Oct 2012

    i am suffering from depression from last 2 year negetive thinking about life & future

  • sagar14 Feb 2012

    mere papa ko yeh bimari hai mujhe kya karna chahiye wo thik nai horahe me 14 year ka ho plz help me mere papa hamse alag rehte hai mujhe koi to advise dijiye mere is email par sagargajare@yahoo.com please apke samne haat jodta hoo

  • adil31 Dec 2011

    mere bhai ko 16 year se sezopheniya ki metal illness hai medicine chel rahi hai sizopin 100mg

  • ram29 Nov 2011

    this type of patients are live in india my mother is suffering with this problam

  • Satyendra Rajvanshi18 Nov 2011

    Kya is bimari ka ilaz sambhav hai, mairi wife ko yehi bimari hai aur woh 31 age ki hai, plz tell me, Mujhe kya karna chahiye

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