स्‍त्री जीवन का एक अहम पड़ाव है मेनोपॉज

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 19, 2013
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Quick Bites

  • आमतौर पर चालीस वर्ष की आयु के बाद आती है मेनोपॉज की स्थिति।
  • मेनोपॉज एक स्‍वाभाविक प्रक्रिया है, इससे घबराने की जरूरत नहीं।
  • रात में पसीना आना और अनियमित मासिक आदि हैं प्रमुख लक्षण।
  • डॉक्‍टर की सलाह के बिना न लें किसी प्रकार का उपचार।

मेनोपॉज को लेकर समाज में कई तरह की भ्रांतियां मौजूद हैं। इस पर बात की जानी जरूरी है। लेकिन, अक्‍सर ऐसा नहीं हो पाता। मेनोपॉज जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक स्‍वाभाविक जैविक प्रक्रिया है, जिससे लगभग हर स्‍त्री को गुजरना पड़ता है।

मेनोपॉज स्‍त्री के जीवन की स्‍वाभाविक प्रक्रियाभारत में प्रजनन संबंधी स्वास्थ्य और यौन समस्याओं के बारे में बात करना विशेष रूप से निषेध मान लिया जाता है। और शायद यही वजह है कि मेनोपॉज को भारत में अक्‍सर अनदेखा कर दिया जाता है। यह समझना जरूरी है कि मेनोपॉज कुछ विशिष्‍ट नहीं है। यह एक स्वाभाविक जैविक प्रक्रिया है। इस दौरान स्त्री के जीवन में महत्वपूर्ण शारीरिक और मनोवैज्ञानिक बदलाव आते हैं। लेकिन, ऐसा भी नहीं है कि हर स्‍त्री के लिए इसका अनुभव एक समान हो। दरअसल, हर स्‍त्री इसे अलग प्रकार से महसूस करती है।

 

कब होता है मेनोपॉज

अधिकतर स्त्रियों के जीवन में यह 40 से शुरुआती 50 वर्ष की आयु में होता है। 40 की आयु से पहले मेनोपॉज को असामयिक समझा जाता है। भारत में मेनोपॉज के लिए स्त्रियों की औसत आयु 47.5 साल है और औसत जीवन-प्रत्याशा दर 71 साल है जिसके अनुसार मेनोपॉज के बाद दो दशक का जीवन बचता है।



मेनोपॉज के संक्रमण दौर को ‘पेरीमेनोपॉज’ कहा गया है। इस दौरान वाहिका-प्रेरक लक्षणों, जैसे गरम चमक, रात में पसीना और धकधकी होना, मनोवैज्ञानिक लक्षण जैसे कि तनाव, उत्कंठा, चिड़चिड़ापन, मिजाज परिवर्तन, याददाश्त समस्या, और एकाग्रता में कमी होना, और मूत्र-जननांगी अपक्षय प्रभाव जैसे कि योनि का सूखना और बार बार पेशाब लगना, आदि सामान्य लक्षण हैं। मेनोपॉज के समय एस्ट्रोजेन की मात्रा कम होने के कारण स्त्रियों में हड्डियों की कमी भी होती है। यह सभी लक्षण एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोनों के स्तर में अनियमित उतार-चढ़ाव या/और गिरावट के कारण होते हैं।



पेरीमेनोपॉज जीवन की एक स्वाभाविक प्रक्रिया है और इसे कोई बीमारी या गड़बड़ी नहीं समझना चाहिए। अतः यह जरूरी नहीं कि इसके लिए किसी उपचार की आवश्यकता हो ही। बहरहाल, ऐसी स्थिति में, जब पेरीमेनोपॉज के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक प्रभाव आपकी दैनिक गतिविधियों में अत्यधिक व्यवधान उत्पन्न करने लगें और जीवनस्तर को भी घटा दें तब चिकित्सकीय उपचार की सहायता लेना आवश्यक हो जाता है।

 

मेनोपॉज के लक्षण

अत्यंत गरम चमक, रात में पसीना आना, योनि का सूखना, अनियमित मासिक, यौनेच्छा में कमी आना और मिजाज में चिड़चिड़ापन, आदि मेनोपॉज के सामान्य लक्षण होते हैं। हालांकि मुंबई के एक प्रमुख स्त्री-रोग विशेषज्ञ डॉ. दुरु शाह का कहना है कि इसका प्रभावी उपाय संभव है। अतः यह जानना अनिवार्य है कि इस संक्रमण काल के दौरान क्या होता है और ऐसे कौन से उपचार के विकल्प उपलब्ध हैं जिनको अपनाकर इससे निपटा भी जा सकता है और इस दौर को अधिक से अधिक सहज भी बनाया जा सकता है।

मेनोपॉज किसी स्त्री जीवन में उसकी प्रजनन क्षमता के अंत की ओर इशारा करता है। इस दौरान स्त्री का मासिक धर्म पूरी तरह से रुक जाता है। उसी स्त्री को मेनोपॉज के दौर से गुजरा हुआ माना जा सकता है जिसे पूरे एक साल तक मासिक धर्म न हुआ हो। मिड-लाइफ हेल्थ 2010 जर्नल में दर्शाए गए आंकड़े के मुताबिक साल 2026 के अंत तक भारत की विशाल जनसंख्या में करीब 103 मिलियन यानी करीब दस करोड़ से अधिक महिलायें इस दौर से गुजर चुकी होंगी।

 

वाहिका-प्रेरक लक्षण

गरम चमक, पसीना आना, धकधकी होना, चक्कर आना, सिरदर्द, अनिद्रा
मूत्रीय व योनिक लक्षण: योनि का सूखना, उसमें खुजली उयर स्राव होना, बार बार पेशाब आना, दर्द के साथ पेशाब होना, व्यभिचार
मासिक अनियमितता: भारी या बहुत कम मासिक होना, जल्दी या देर से मासिक होना, काफ़ी अंतराल के बाद या रुक-रुक कर मासिक होना, असामान्य मासिक स्राव होना

 

 

मानसिक/भावनात्मक लक्षण

अवसाद, चिड़चिड़ापन, मिजाज परिवर्तन, थकान, कमजोर याददाश्त, एकाग्रता में कमी
अहमदाबाद के एक प्रमुख स्त्री-रोग विशेषज्ञ, डॉ. राजेश सोनेजी का कहना है कि, “मेनोपॉज संबंधी परिस्थितियों के लिए बहुत सारे उपचार के विकल्प मौजूद हैं। इनमें से हार्मोनल थेरेपी सबसे कारगर रही है; यह वयस्क हो रही महिलाओं में हड्डियों की कमी के खतरे को भी कम कर देती है।”

 

मेनोपॉज का उपचार

नॉर्थ अमेरिकन मेनोपॉज सोसायटी (2012) डॉ. राजेश सोनेजी और अन्य विशेषज्ञ मानते हैं कि हारमोन रिप्लेस्मेंट थेरेपी या मेनोपॉजल हारमोन थेरेपी वाहिका-प्रेरक लक्षणों, जैसे कि अत्यधिक तीव्रता और योनि के सूखने हेतु सबसे प्रभावी उपचार है। लेकिन लंबे समय तक इसे अपनाने के कुछ खतरे हैं, जिनके बारे में स्त्रियों को जानकारी अवश्‍य दी जानी चाहिए।


यदि स्त्रियों को केवल योनि के सूखने की ही समस्या है तो दवा द्वारा उनका उपचार होना चाहिए। ऐसी स्त्रियां जिनमें गर्भाशय अब भी मौजूद हो, उन्हें गर्भाशय के कैंसर से बचाने के लिए सही उपचार दिया जाना जरूरी है। इस मिश्रित उपचार की अवधि हेतु सामान्यतः पांच साल या उससे कम की सलाह दी गई है। इसके साथ ही प्रत्येक स्त्री के लिए इसका उपचार अलग तरह से होना चाहिए। जिन स्त्रियों में गर्भाशय को निकाल दिया गया है उनका इलाज भी अलग तरीके से होता है। बहरहाल, थेरेपी लेने से पहले उसके चिकित्सक से उसकी सुरक्षा के बारे में सलाह-मशविरा करना जरूरी है।

 

 

अन्‍य थेरेपी

इसके अलावा अन्य प्रभावी थेरेपी में शामिल हैं तनाव-विरोधी चिकित्सा, क्लोनिडाइन और गाबापेंटिन। वानस्पतिक स्रोतों की पोषक थेरेपी भी कारगर है, जो कि सोयाबीन उत्पादों, मटर, लाल लौंग और बीन्स में फाइटोएस्ट्रोजेन के रूप में भी उपलब्ध है। स्त्रियों को पर्याप्त हड्डियों की कमी से बचने के लिए आहार-संबंधी या कैल्शियम और विटामिन डी को अनुपूरक के रूप में ग्रहण करने की सलाह भी दी जानी चाहिए। हड्डियों के विकास को स्फूर्ति प्रदान करने और अवशोषण को कम करने के लिए तो व्यायाम जरूरी है ही, साथ ही साथ यह हृदय संबंधी स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है।

तो अगली बार, अगर आपको सिर में अचानक ही तीव्र ऊष्मा महसूस हो जो आपके पूरे शरीर में फैल जाए या फ़िर आधी रात को आप अचानक ही नींद से जागते हुए खुद को पसीने से तर-बतर पाएँ, या फ़िर आपका मासिक अनियमित हो जाए तो संभव है कि आप मेनोपॉज से पूर्व के लक्षणों से गुजर रही हों। ऐसे में उसे चुपचाप सहने या नजरअंदाज करने के बजाए अपने परिवार से उसके बारे में बात करें और सबसे महत्वपूर्ण, कि अपने स्त्री-रोग विशेषज्ञ से जल्द से जल्द संपर्क करें।

डॉ. शांतनु डोंडे और डॉ. गणेश उचित

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