बेहतर पिता साबित होते हैं आकार में छोटे टेस्‍टिकल्‍स वाले पुरुष

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 11, 2013
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  • शुक्राणुओं से संबंधित है पुरुषों द्वारा की जाने वाली बच्‍चों की देखभाल।
  • इमोर यूनिवर्सिटी के मानव विज्ञानी जेम्‍स रिलिंग ने किया अध्‍ययन।
  • शोध में 1 से 2 वर्ष के बच्‍चों के 70 माता-पिता को किया शामिल।
  • ज्‍यादा सामाजिक होते हैं पिता के संपर्क में रहने वाले बच्‍चे।

man playing with babyनए अध्‍ययन से साफ हुआ है कि जिन पुरुषों के टेस्‍टिकल्‍स (अंडकोष) छोटे होते हैं वे बड़े टेस्‍टिकल्‍स वाले पुरुषों की तुलना में बेहतर पिता साबित होते हैं। अध्‍ययन के मुताबि‍क छोटे टेस्‍टिकल्‍स वाले पुरुष बच्‍चों का ज्‍यादा ध्‍यान रखते हैं और पिता की भूमिका को अच्‍छे से निभाते हैं।

 

अध्‍ययन से यह भी साफ हुआ कि टेस्टिकुलर का संबंध पिता में दिमाग की पालन-पोषण की गतिविधियों से होता है। इमोर यूनिवर्सिटी के मानव विज्ञानी जेम्‍स रिलिंग ने अध्‍ययन के आधार पर बताया कि पुरुषों में बतौर अभिभावक गुण अलग-अलग पाए जाते हैं।

 

शोध का मकसद यह पता लगाना था कि अन्‍य पुरुषों के मुकाबले कुछ पुरुष क्‍यों बच्‍चों का बेहतर तरीके से लालन पालन करते हैं। रिलिंग ने कहा कि यह एक अहम सवाल है क्‍योंकि पहले अध्‍ययनों से यह पता चला है कि जो बच्‍चे पिता के ज्‍यादा संपर्क में रहते हैं वे ज्‍यादा सामाजिक होते हैं और उनका शैक्षिक स्‍तर भी अच्‍छा रहता है।

 

शोधकर्ता जेनिफर माकारो के मुत‍ाबिक अध्‍ययन के माध्‍यम से यह पता लगाया कि मनुष्‍य के श्‍ारीर की रचना और दिमाग की क्रियाशीलता बच्‍चे की परवरिश को किस तरह प्रभावित करती है। इससे पहले शोधों में यह बात सामने आई कि कई आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कारक भी पिता की बच्‍चे की प्रति देखभाल को प्रभावित करते हैं।

 

अध्‍ययनकर्ताओं का मकसद यह पता लगाना था कि बच्‍चे की पिता द्वारा की जाने वाली देखभाल पर शारीरिक रचना का क्‍या असर पड़ता है। मोरोको ने बताया कि शोध में पाया गया कि पिता द्वारा की जाने वाली बच्‍चे की परवरिश शुक्राणुओं की संख्‍या और टेस्‍टोस्‍ट्रोन के स्‍तर से संबंधित होती है।



अध्‍ययन में 70 पुरुषों को शामिल किया गया। इन सभी के एक से दो वर्ष के बच्‍चे थे और ये सभी अपने बच्‍चे व पत्‍नी के साथ रहते थे। सभी माता और पिता से बच्‍चे की देखभाल जैसे डायपर बदलने, दूध पीने, बच्‍चे के नहाने और बच्‍चे की बीमारी के दौरान घर पर रुकने के बारे में अलग-अलग बात की गई। इसके बाद पुरुषों के टेस्‍टोस्‍ट्रोन के स्‍तर की जांच की गई।

 

 

 

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