पुरुष भी होते हैं घरेलू हिंसा के शिकार

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 14, 2013
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Quick Bites

  • पुरुषों पर भी होते हैं घरेलू हिंसा के शिकार।
  • सुप्रीमकोर्ट ने धारा 498ए पुनर्विचार की बात की।
  • कई संथाओं ने इसपर कराया है सर्वेक्षण।
  • शारीरिक और मानसिक हिंसा होती है।

अक्‍सर ऐसा देखा जाता है कि महिलाओं पर ज्‍यादा अत्‍याचार होते हैं, जबकि कई मामलों में पुरूष भी घरेलू हिंसा कि शिकार होते हैं और महिलाएं पुरुषों पर अत्‍याचार करती हैं। 'पत्नी सताए तो हमें बताएं' जैसे विज्ञापनों को एक समय अतिरंजना के तौर पर देखा जाता था, लेकिन पिछले कुछ समय के आंकड़ों ने इस धारणा को बदल दिया है कि सिर्फ महिलाएं ही घरेलू हिंसा का शिकार बनती हैं। अब सिक्के का दूसरा पहलू सामने आया है, जिसमें पुरुषों को भी घर या समाज में किसी न किसी प्रकार की शारीरिक, मानसिक या आर्थिक हिंसा का सामना करना पड़ रहा है।
Domestic Violence in Hindi

बढ़ रहे मामले

पिछले कुछ दिनों से ऐसे मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है, जिसमें पुरुषों को घरेलू हिंसा का शिकार होना पड़ रहा है और पुरुषों को इस बात को लेकर मलाल है कि उनकी इन शिकायतों का न तो कहीं निपटारा हो रहा है और न ही समाज उनकी इन शिकायतों को स्वीकार कर रहा है। घरेलू हिंसा के शिकार होने वाले पुरुषों के लिए काम करने वाली संस्था 'सेव इंडियन फैमिली फाउंडेशन' जैसी संस्‍थायें पुरुषों पर हो रहे अत्‍याचार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए ही बनी हैं।

आत्‍महत्‍या भी करते हैं

इस सबसे परेशान होकर कई बार पुरुष बेबसी में आत्महत्या जैसा कदम उठाने को भी मजबूर हो जाते हैं। महिलाओं के पास कानून का कवच है, जिसका खुलकर दुरुपयोग हो रहा है। इस बात को अब स्वीकार भी किया जा रहा है, लेकिन स्थिति यथावत है। शीर्षाधिकारियों के पास जानकारी है, इसलिए वे मान जाते हैं, लेकिन छोटे शहरों में घरेलू हिंसा के शिकार पुरुषों को अपनी शिकायत रखने के लिए कोई मंच नहीं मिलता है।

पुरुषों की बात कोई नहीं सुनता

ज्‍यादातर मामलों की मानें तो पुरुषों की बात कोई सुनता ही नहीं, हर जगह महिला की बात को ही माना जाता है। समाज भी इस बात को स्वीकार नहीं करता कि पुरुषों के साथ महिलाएं हिंसा करती हैं। दहेज के झूठे मामलों की तो छोड़िए, वे तो सबके सामने आ गए हैं। पुरुष तो चारदीवारी के भीतर मारपीट और पैसे छीने जाने के मामलों के भी शिकार हो रहे हैं, समाज में क्या इन बातों को कोई स्वीकार करेगा?
Men Are Also Victims in Hindi

कानून में बदलाव की सिफारिश

सुप्रीम कोर्ट नेएक मामले की सुनवाई के दौरान घरेलू हिंसा के शिकार पुरुषों की स्थिति को समझते हुए कहा कि महिलाएं दहेज विरोधी कानून का दुरुपयोग कर रही हैं और सरकार को इस कानून पर एक बार फिर नजर डालने की जरूरत है। धारा 498 [ए] के दुरुपयोग की बढ़ती शिकायतों के मद्देनजर यह बात की गई थी। इसमें यह भी निर्देश दिया गया कि पुरुषों की प्राथमिकी भी दर्ज की जाये।

एक फाउंडेशन द्वारा कराये गये सर्वे के अनुसार एक लाख पुरुषों में से 98 फीसदी पुरुष किसी न किसी तौर पर घरेलू हिंसा का शिकार हर साल बनते हैं। इसमें आर्थिक, शारीरिक, मानसिक और यौन संबंधों के दौरान जाने वाली हिंसा के मामले शामिल थे।

 

Image Source - Getty

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टिप्पणियाँ
  • gupteshwar sinha02 Feb 2012

    it is really a matter of concer for the society thate the are being made victim of available indian law which needs to be reviewed to ensure justice to menthe women as well as the law enforcing agencies are misusing their authority now this is right time to think to give proper relief to those who are suffering in the hand of those who are taking undue advantages

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