मारफन सिंड्रोम के बारे में कितना जानते हैं आप

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 31, 2014
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Quick Bites

  • मारफन सिंड्रोम एक आनुवंशिक विकार है।
  • फिब्रिलिन-1 नामक जीन में दोष है इसका कारण।  
  • यह स्‍केलेटन को सबसे अधिक प्रभावित करता है।
  • मारफन सिंड्रोम के लिए कोई विशेष उपचार नहीं होता है।

मारफन सिंड्रोम एक अनुवांशिक विकार है। यह शरीर के संयोजी उत्‍तकों को नुकसान पहुंचाता है। संयोजी उत्‍तक शरीर की सभी कोशिकाओं, अंगों और उत्‍तकों को आपस में जोड़े रखते हैं। इसके साथ ही यह शरीर को बढ़ने और उसके विकास में भी महती भूमिका अदा करता है।

संयोजी उत्‍तक प्रोटीन से बनते हैं। मारफन सिंड्रोम में भूमिका निभाने वाले प्रोटीन का नाम फिब्र‍िलिन-1 होता है। जब उन गुणसूत्रों यानी जीन्‍स में किसी प्रकार का विकार आ जाता है, जो शरीर को फिब्र‍िलिन-1 बनाने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है, तब मारफन सिंड्रोम होता है।

 

marfan syndrome in hindi
इस उत्‍परिवर्तन के कारण शरीर में ट्रांसफॉरमिंग ग्रोथ फेक्‍टर बीटा प्रोटीन का निर्माण अधिक होने लगता है। इसे टीजीएफ-बीटा भी कहा जाता है। टीजीएफ-बीटा के बढ़ने से शरीर के सभी संयोजी उत्‍तकों में परेशानी हो जाती है। इससे शरीर में मारफन सिंड्रोम और कुछ अन्‍य संबंधित विकार हो सकते हैं।

 

पूरे शरीर में हो सकता है

संयोजी उत्‍तक हमारे पूरे शरीर में पाये जाते हैं, इसलिए मारफन सिंड्रोम शरीर के अलग-अलग हिस्‍सों को प्रभावित कर सकता है। विकार के अधिकतर लक्षण दिल, रक्‍तवाहिनियों, हड्डियों और आंखों में पाया जाता है। रक्‍तवाहिनियों को नुकसान पहुंचाने वाले कुछ मारफन जानलेवा भी हो सकते हैं। फेफड़े, त्‍वचा और नर्वस सिस्‍टम भी इस मारफन सिंड्रोम से प्रभावित हो सकते हैं। मारफन सिंड्रोम बुद्धिमत्‍ता को नुकसान नहीं पहुंचाता।

 

किसे होता है मारफन सिंड्रोम

पांच हजार में से किसी एक व्‍यक्ति को यह बीमारी हो सकती है। इसमें महिलायें, पुरुष और सभी प्रकार के लोग शामिल हो सकते हैं। करीब 75 फीसदी लोगों को यह बीमारी विरासत में मिलती है। यानी यह बीमारी उन्‍हें अपने माता-पिता से मिलती है। कुछ लोग इस बीमारी से पीडि़त होने वाले अपने परिवार के पहले सदस्‍य भी हो सकते हैं। संतान में यह बीमारी पहुंचने की आशंका 50 फीसदी होती है।

 

मारफन सिंड्रोम के लक्षण बचा सकते हैं जान

मारफन सिंड्रोम जन्‍मजात बीमारी है, लेकिन इस विकार के लक्षण फौरन नजर नहीं आते। कुछ लोगों में जन्‍म के समय ही और थोड़ा बड़ा होने पर ही महाधमनी बड़े होने जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं। कुछ लोगों में व्‍यस्‍क होने पर ही ऐसे लक्षण नजर आते हैं। हृदय और रक्‍तवाहिनियों, हड्डियों अथवा जोड़ों को नुकसान पहुंचाने वाले लक्षण उम्र के साथ-साथ और खराब होते जाते हैं।

 

सही समय पर इलाज है जरूरी

मारफन सिंड्रोम और संबंधित विकारों से पीडि़त लोगों के लिए सही और जल्‍दी इलाज शुरू किया जाना जरूरी होता है। इसके बिना उनके जीवन को संभावित खतरा हो सकता है। इस बीमारी का इलाज जितनी जल्‍दी शुरू कर दिया जाए, परिणाम उतने बेहतर आने शुरू हो जाते हैं।

 

marfan-syndrome in hindi

लक्षणों को पहचानें

एक अनुमान के अनुसार मारफन सिंड्रोम से पीडि़त आधे से अधिक लोगों को इसके लक्षणों के बारे में अंदाजा नहीं होता। हालांकि यह बीमारी जन्‍मजात होती है, लेकिन इसके लक्षण उसी समय नजर आएं, यह जरूरी नहीं होता। इस बीमारी के लक्षण किसी भी उम्र में सामने आ सकते हैं। इस बीमारी कुछ लक्षण लगातार बढ़ते रहते हैं, यानी उम्र के साथ-साथ वे और खराब होते चले जाते हैं।

 

आसानी से पहचाने जाने वाले लक्षण

हर व्‍यक्ति में मारफन सिंड्रोम अलग प्रकार से नजर आता है। हर किसी में सभी और समान लक्षण नहीं होते। मारफन सिंड्रोम के कुछ लक्षण आसानी से नजर आ जाते हैं-

 

  • लंबे हाथ-पांव और उंगलियां
  • पतला और लंबा शरीर
  • मुड़ी हुई रीढ़ की हड्डी
  • छाती में गहराई या बाहर की ओर उभार
  • जोड़ों में लचीलापन
  • सपाट पैर
  • दांत के ऊपर दांत चढ़े हुए
  • त्‍वचा पर स्‍ट्रेच मार्क्‍स, जिनका वजन बढ़ने या घटने से कोई लेना देना नहीं होता

अन्‍य लक्षणों को पहचानना है मु‍श्किल

मारफन सिंड्रोम के अन्‍य लक्षणों में दिल की समस्‍या हो सकती है। इसमें हृदय से शरीर के अन्‍य अंगों में रक्‍त ले जाने वाली शाहरग में विकार हो सकता है। इसके साथ ही फेफड़ों की बीमारी, आंखों की समस्‍या जिसमें गंभीर निकट दृष्टि दोष, लैंस का अपने स्‍थान पर नहीं होता, रेटिना संबंधी विकार, ग्‍लूकोमा और कम उम्र में ही मोतिया आदि हो सकता है। इन सब लक्षणों के लिए विशेष जांच करनी पड़ती हैं।

 

कैसा दिखता है मारफन सिंड्रोम

मारफन सिंड्रोम शरीर के कई हिस्‍सों को प्रभावित कर सकता है। हर व्‍यक्ति को यह अलग प्रकार से प्रभावित करता है। एक ही परिवार में प‍ीडि़त अलग-अलग लोगों में भी इसके लक्षण जुदा हो सकते हैं।

 

निदान

पारिवारिक इतिहास और परीक्षण निदान करने के लिए पर्याप्त होते हैं। रोगियों में विशिष्‍ट उपस्थिति और स्‍केलटल विकृति परिवार के इतिहास के साथ होती है।

effect on eyes in hindi

जोखिम कारक

मारफन सिंड्रोम पुरुषों और महिलाओं को समान रूप से प्रभावित करता है और सभी जातियों और जातीय समूहों के बीच होता है। यह एक आनुवंशिक परिस्थिति है, इसलिए मारफन सिंड्रोम के लिए सबसे बड़ा जोखिम कारक आपके माता-पिता का इससे पीड़ि‍त होना है।

 

उपचार

मारफन सिंड्रोम के लिए कोई विशेष उपचार नहीं होता है, पहले चरण में जटिलताओं के निदान के लिए रोगी को आर्थोपेडिक सर्जन और चिकित्‍सक, हृदय रोग विशेषज्ञ और नेत्र देखभाल के तहत करीब अवलोकन में रखा जाता है। कभी-कभी यौवन से पहले स्केलेटन विकृति को सीमित करने के लिए आर्थोपेडिक सर्जरी या उपकरणों का इस्‍तेमाल किया जाता है।

यह बहुत निराशाजनक स्थिति होती है। रोगी को मनोवैज्ञानिक और भावनात्‍मक समर्थन की जरूरत होती है। संभव हो तो रोगी के उपचार में मनोवैज्ञानिक को भी शामिल करना चाहिए। फिजियोथेरेपी और एरोबिक एक्‍सरसाइज फेफड़ों की समस्याओं को दूर करने के लिए उपयोगी होती हैं।

Image Courtesy : getty images and blogspot.com

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