मानसिक बीमारी है नाखून चबाना

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 05, 2012
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manshik bimari hai nakhun chabana

हमें बचपन में कितनी बार नाखून चबाने की अपनी आदत को लेकर डांट पड़ी होगी। और आज भी कितनी ही बार हम तनाव के समय में हम नाखून चबाते हुए सोच के सागर में गोते लगाते है। यह जानते हुए भी कि नाखून चबाने की आदत अच्‍छी नहीं है हम इससे पूरी तरह से निजात नहीं पा पाते। ऐसा नहीं है कि आम लोग ही इस आदत के शिकार हैं। आपने क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर को मैदान में अपने नाखून चबाते हुए जरूर देखा होगा। दुनिया भर में करोड़ों लोग इस आदत के शिकार हैं। मगर यह आदत दीवानगी बन जाए तो चिंता की बात है।

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यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के शोधकर्ताओं ने हालिया शोध में इस आदत के आयामों पर चर्चा की गयी है। इसमें दावा किया गया है कि नाखून चबाना सिर्फ एक गंदी आदत ही नहीं है बल्कि एक एक मानसिक बीमारी है। शोध में तो यहां तक दावा किया गया है कि इस आदत से छुटकारा पाना उतना ही मुश्किल है जितना कि धूम्रपान की लत छोड़ना।

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चिकित्‍सा विशेषज्ञ अब नाखून चबाने की आदत को मनोरोग की श्रेणी में रखने जा रहे हैं। अमेरिकन साइकेट्री एसोसिएशन इसे 'सामान्‍य गंदी आदत' की जगह 'सनकी बाध्‍यकारी विकार' यानी ओसीडी की श्रेणी में शामिल करने जा रहा है। अमेरिकी चैनल एनबीसी ने एसोसिएशन के हवाले से बताया कि 'डायोगो‍नेस्टिक एंड स्‍टेटस्टिकल मैनुअल ऑफ मेंटल डिसऑर्डर' के आगामी संस्‍करण में नाखून कुतरने की आदत को ओसीबी श्रेणी में शामिल कर लिया जाएगा।

 

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