कैंसर, हार्ट जैसी बीमारियों से भारतियों के होंगे 400 लाख करोड़ रुपये खर्च : डब्लूएचओ

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 11, 2016
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शहरीकरण के दौर में अगले आने वाले सालों में भारतियों को नॉन कम्यूनिकेबल डिज़िज जैसे कैंसर, हार्ट अटैक, डायबिटीज आदि से 400 लाख करोड़ रुपये की चपत लगने वाली है। हाल ही में आई डब्लूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार जिस तरह से ये नॉन कम्यूनिकेबल डिज़िज बढ़ रही है उससे ये बीमरियां आगे आने वाले समय में इंडियन इकोनॉमी के लिए बड़ी चुनौती बनने वाली है।

 

लगने वाली है अरबों की चपत

डब्लूएचओ और यूएन ह्यूमन सेटलमेंट प्रोग्राम की ज्वाइंट स्टडी के अनुसार ये बीमारियां मरीजों के स्वास्थ्य के अलावा इंडियन इकोनॉमी पर बुरा असर डालने वाली है। अगर इन बीमारियों के आंकड़ें इसी तरह बढ़ते रहे तो अगले कुछ सालों में इंडियन इकोनॉमी को अगले कुछ सालों में अरबों का घाटा हो जाएगा। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की स्टडी रिपोर्ट के अनुसार 2012 से 2030 के दौरान इन बीमारियों का इकोनॉमिक खर्च 400 लाख करोड़ रुपए हो जाएगी।

हार्ट डिज़िज

 

घटेगी प्रोडक्टिविटी और बढ़ेगा खर्च

इन बीमरियों के कारण जहां अरबों रुपये खर्च होंगे वहीं इससे प्रोडक्टिविटी भी घटेगी। वर्किंग ग्रुप में समय से पहले इन बीमरियों में से किसी एक की वजह से मौत हो जाने के बाद प्रोडक्टिविटी घटेगी जो इनडायरेक्टली भारत के स्वास्थ्य और इकोनॉमी पर दबाव डालेगी।

 

हार्ट डिज़िज पर सबसे अधिक खर्च

रिपोर्ट के अनुसार हर साल हार्ट डिज़िज पर सबसे अधिक खर्च होता है। आने वाले 18 सालों में केवल हॉर्ट डिजिज की वजह से 2.25 ट्रिलियन डॉलर का दबाव पड़ेगा। हार्ट डिज़िज के बाद कैंसर, मेंटल हेल्थ, डायबिटीज बीमारियों का नम्बर आता है। इन बीमारियों का कारण शहरीकरण है। शहरों की बढ़ती संख्या और कमजोर हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम ने देश के हेल्थ को बिगाड़ कर रख दिया है।

 

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