कहीं जान न ले ले दुबले होने की सनक

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Feb 04, 2011
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Quick Bites

  • वजन नियंत्रित करना है अच्‍छी सेहत के लिए जरूरी।
  • सही वजन के लिए व्‍यायाम और आहार का सही मेल होना चाहिए।
  • कई बार मित्रों के दबाव में जरूरत से ज्‍यादा कम करते हैं वजन।
  • कम वजन से हो सकती हैं कई स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍यायें।

 

विभा का पूरा पाचन-तंत्र बिगड़ चुका है और अब उसका लंबे समय तक इलाज चलेगा। कुछ भी खाने-पीने के बाद उसे पचा पाना उसके लिए संभव तो नहीं ही रह गया है, निकट भविष्य में अभी यह संभव हो पाने की उम्मीद भी नहीं की जा सकती। क्योंकि जिस हद तक उसकी हालत बिगड़ चुकी है, इसके बाद उसके सुधरने में समय लगेगा। यह जानकारी भी तब हुई जब उसे अस्पताल में दाखिल कराना पड़ गया। पहले जब उसने खाना छोड़ा था तब परिवार के लोगों को यह लगा कि बच्ची है।

 

नया-नया शौक लगा है डाइटिंग का, धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा। पर यह क्या? एक बार लगे इस शौक ने तो छूटने का नाम ही नहीं लिया। लोग इसे तब तक मजाक में ही लेते रहे, जब तक उसे बेहोशी के दौरे नहीं पड़ने लगे। जब परिवार के लोग गंभीर हुए तब तक उसकी स्थिति काफी गंभीर हो चुकी थी। वह एनीमिया और कोलाइटिस की गंभीर मरीज हो चुकी थी। विभा ऐसी अकेली लड़की नहीं है। पिछले दिनों इसी झक के चलते एक मॉडल को अपनी जान गंवानी पड़ चुकी है। तब यह घटना खास तौर से चर्चा का विषय बनी थी। यही नहीं, तमाम लड़कियां इससे कुपोषण की शिकार हो चुकी हैं जिसके कारण क्या-क्या बीमारियां हो सकती हैं, इसकी गणना करना मुश्किल है।

 

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सामाजिक दबाव है कारण 

यह झक सिर्फ झक नहीं है। असल में यह एक रोग है। इसका नाम है एनरेक्सिया। यह एक ऐसा रोग है जिसका शिकार स्वयं को भूखा रखता है। दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में मनोचिकित्सक डॉ. अनु गोयल के अनुसार, 'मूल रूप से यह एक मनोरोग है, जिसकी शिकार किशोर उम्र की लड़कियां होती हैं। उन्हें बेवजह ऐसा लगने लगता है कि वह जरूरत से ज्यादा मोटी हो रही हैं। अब इससे बचने का एक ही उपाय है और वह यह कि खाना छोड़ दिया जाए। फिर होता यह है कि वे खाना छोड़ देती हैं।' कई बार तो यह रोग बिना किसी खास तार्किक कारण के होता है, लेकिन कई बार इसकी वजह सामाजिक दबाव होता है।

डॉ. गोयल के अनुसार, 'असल में टीनएजर्स अपनी फ्रेंड सर्किल को लेकर बहुत सतर्क होते हैं और वे एक-दूसरे की शारीरिक स्थितियों को लेकर आपस में हंसी-मजाक भी खूब करते हैं। इनमें ही कुछ ऐसे लड़के-लड़कियां जो भावनात्मक रूप से थोड़े कमजोर होते हैं, इसे दिल से लगा लेते हैं। उनके लिए यह ग्रंथि जैसा बन जाता है। ऐसा लगने लगता है कि सचमुच वह बहुत मोटी हो गई हैं और फिर वे खुद को दुबला करने के लिए भूखी रहने लगती हैं। इसे ही एनरेक्सिया कहते हैं। कुछ मामलों में तो ऐसा होता है कि अगर भूख लगने पर उन्होंने कुछ खा भी लिया तो उसे तुरंत उल्टी करके बाहर निकाल देती हैं। यह स्थिति होने पर उसे बुलिमिया कहा जाता है।' यह स्थिति खतरनाक है। क्योंकि बिल्कुल न खाने का नतीजा यह होता है कि लोग जल्दी ही कुपोषण के शिकार हो जाते हैं। यह कुपोषण जहां एक तरफ उनके शारीरिक-मानसिक विकास में बाधक बनता है, वहीं कई रोगों की जड़ भी बन जाता है।

 

असर विकास पर 

इस बारे में दिल्ली के ही जनरल फिजिशियन डॉ. दीपक अरोड़ा कहते हैं, 'चूंकि इसकी शिकार सबसे ज्यादा किशोर लड़कियां होती हैं और शारीरिक विकास की यह बड़ी महत्वपूर्ण उम्र है, इसलिए सबसे पहली बात तो यह कि इससे शारीरिक विकास प्रभावित होता है। खास तौर से अगर कैल्शियम की कमी हुई तो इससे हड्डियों का विकास प्रभावित होता है और यह ऐसी कमी है जिसे बाद में उम्र भर में भी पूरा नहीं किया जा सकता है। इसके चलते रक्त की कमी और इससे होने वाली बीमारियां भी हो सकती हैं। लड़कियों में मासिक चक्र की गड़बड़ी और फिर गर्भधारण के समय भी समस्याएं हो सकती हैं। फिर चूंकि लगातार भूखे रहने से आपकी खाने की आदत बिगड़ जाती है, इसलिए शरीर की भोजन को पचाने की क्षमता भी खत्म हो जाती है। यहां तक कि इससे दिल की बीमारी भी हो सकती है और आगे चलकर यह ऑस्टियोपोरोसिस का भी कारण बन सकता है।'

 

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है सिर्फभ्रम 

सही पूछिए तो जिस बात के लिए लोग यह सब करते हैं, वह भी इससे होता नहीं है। दुबला होना आखिर किसलिए जरूरी है? इसीलिए न, कि देखने में सुंदर लगें। लेकिन क्या वास्तव में इससे सुंदर होने की लोगों की ख्वाहिश पूरी भी हो पाती है। इसका जवाब देती हैं दिल्ली की कॉस्मेटोलॉजिस्ट सिम्मी घई, 'लोगों को जाने कैसे यह भ्रम है कि दुबले होकर वह सुंदर दिखने लगेंगे। सही बात यह है कि उम्र के बढ़ने का असर एनरेक्सिया के शिकार लोगों पर बहुत जल्दी दिखने लगता है। जिन लोगों के शरीर में पोषक तत्वों की कमी होती है उनकी त्वचा कांतिहीन होने लगती है। ऊतक क्षतिग्रस्त होने लगते हैं और नष्ट ऊतकों को सही करना मुश्किल होता है। अत: सुंदर दिखने के लिए जरूरी है कि सभी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में लिए जाएं।' इसके बावजूद तमाम लोग एनरेक्सिया के शिकार हो रहे हैं। जो नहीं हुए हैं वे होने न पाएं इसके लिए तो जरूरत सामाजिक सतर्कता की है और साथ ही उनका आत्मविश्वास बढ़ाना भी ़जरूरी है। जो हो चुके हैं, इसके लिए क्या किया जाए, इस बारे में डॉ. अनु गोयल कहती हैं, 'इसके लिए थेरेपी की जरूरत है। चूंकि यह मामला मूल रूप से मनोगत होता है, इसलिए इसका इलाज भी उसी तरह करना होता है। सबसे पहले यह समझना होता है कि इस ग्रंथि के बनने का कारण क्या है। फिर उसे धीरे-धीरे उस मुक्त किया जाता है। इसमें परिवार को भी सहयोगी रुख अपनाना चाहिए। इससे इलाज थोड़ा आसान भी हो जाता है।'

 

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