मधुमेह से लड़ने के प्राकृतिक तरीके

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 22, 2013
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madhumeh se ladne ke prakritik tareeke

डायबिटीज को यूं तो 'मीठी बीमारी' कहा जाता है, लेकिन इसके परिणाम बहुत 'कड़वे' होते हैं। एक बार अगर यह रोग आपको अपनी गिरफ्त में ले ले, तो फिर इससे बाहर निकलना नामुमकिन है। इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि इस बीमारी को होने ही न दिया जाए। और संतुलित जीवन मधुमेह से लड़ने का सबसे ताकतवर हथियार है।

 

डायबिटीज की शुरुआत ही असंयमित खानपान, मानसिक तनाव, मोटापा और व्यायाम की कमी से होती है। पहले जहां इसे बड़ी उम्र के लोगों की बीमारी समझा जाता था, लेकिन अब हर युवा और यहां तक कि बच्चे भी इसके शिकार हो रहे हैं। नये दौर में यह बीमारी हमारे देश में काफी गहरी पैठ जमा चुकी है। भारत को डायबिटीज की राजधानी कहा जाता है। स्थिति में कोई सुधार होता भी नजर नहीं आ रहा। ऐसे में इस बीमारी के होने से पहले ही थोड़ी सावधानी बरतना जरूरी है।

क्यों होता है डायबिटीज

जब शरीर में अग्नाशय द्वारा इंसुलिन का स्राव कम होता है अथवा बिलकुल नहीं होता, तो शरीर में ग्लूकोज की मात्रा आवश्यकता से अधिक हो जाती है। इसी कारण डायबिटीज होता है। साथ ही ऐसे व्यक्तियों में रक्त कोलेस्ट्रॉल, वसा के अवयव भी असामान्य हो जाते हैं। शरीर में इंसुलिन का स्तर सामान्य रहने के लिए रोगियों को दवाओं पर निर्भर रहना पड़ता है। लेकिन, दवाओं के साथ ही कुछ अन्य उपाय अपनाकर भी वे रक्त शर्करा के स्तर को सामान्य रख सकते हैं।

 

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बढते वजन पर काबू पाएं

अधिक वजन एक बड़ी समस्या है। इससे कई अन्य समस्याएं पैदा होती हैं। नियमित व्यायाम, योग व मेडिटेशन के जरिये आप अपने वजन पर काबू पा सकते हैं। अगर आप जिम नहीं जाना चाहते हैं, तो जॉगिंग, रनिंग और स्ट्रेचिंग जैसे व्यारयम घर भी कर सकते हैं। मधुमेह में वजन को बेकाबू होने से रोकना बहुत जरूरी है। डायबिटीज और मोटापे में सीधा संबंध होता है। एक्सरसाइज करने से हमारा मैटाबॉलिजम भी अच्छा रहता है जो की डायबिटीज के रिस्क को भी कम करता है।


ट्रांस फैट से दूर रहें

मधुमेह रोगियों को ट्रांस फैट से दूर रहना चाहिए। इससे हमारा शरीर प्रोटीन की सही मात्रा ग्रहण नहीं कर पाता। इसके चलते शरीर में इन्सुलिन की कमी हो जाती है। और हमारे शरीर में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है। मधुमेह में केक, पेस्ट्री, चिप्स और फास्ट फूड का सेवन ना करें क्योंकि इनमें ट्रांस फैट का इस्तेमाल होता है।


रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट नुकसानदेह

अगर आपको मधुमेह है तो रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट युक्त चीजें भी आपके लिए नहीं बनीं।  इनसे ब्लड शुगर का स्तर अनियंत्रित हो जाता है। सफेद चावल, पास्ता, पॉपकॉर्न, राइस पफ और वाइट फ्लोर जैसी चीजों को दूर से ही सलाम करें। मधुमेह के दौरान शरीर कार्बोहाइड्रेट्स को पचाने में समस्या होती है जिससे शरीर में शुगर का स्तर बढ़ने लगता है।

 

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फाइबर युक्त आहार फायदेमंद

डायबिटीज रोगियों को जल्दी पचने वाला आहार लेना चाहिए। उनके आहार में वे तत्वे शामिल होने चाहिए जिनमें घुलनशील फाइबर मौजूद हो। स्ट्राबेरी, तरबूज, पपीता, बेर जैसे फल आदि जल्दी पच जाते हैं इसलिए वो आंत में आसानी से अवशोषित हो जाते हैं। डॉक्टर्स भी डायबिटीज मरीजों को ऐसे फाइबर युक्त फल खाने की ही सलाह देते हैं जो आंत को साफ रखने का काम करते हैं। फाइबर युक्त आहार ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है।


हरी सब्जियों को सेवन

ताजी हरी सब्जियों में आयरन, जिंक, पोटेशियम, कैल्शियम और अन्य कई आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते है। इसकी वजह से हमारा हृदय और नर्वस सिस्टम भी स्वस्थ रहता है। इससे शरीर जरूरी इन्सुलिन बनाता है। आपका शरीर आवश्यक इंसुलिन बनाता है। मधुमेह में लाल मांस का सेवन भी नहीं करना चाहिए। लाल मांस में फोलिफेनोल्स पाया जाता है जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ा देता है जिससे हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है।  

नियमित जांच करवाएं

मधुमेह रोगियों को नियमित रुप से जरूरी जांच करवानी चाहिए। रोगियों को ब्लड ग्लूकोज मॉनिटर खरीद लेना चाहिए जिससे वे घर पर ही आसानी से ब्लड ग्लूकोज की जांच कर सकें। इसका प्रयोग काफी आसान होता है। इसमें आपके रक्त की कुछ बूंदे चाहिए होती है जिससे आप ये जान सकते है की आपका ब्लड शुगर सामान्य है या नहीं।

 

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