मधुमेह रोगियों का दुश्मन है मोटापा

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 09, 2012
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Madhumeh ka dushman ha  motapa

 

मधुमेह रोगियों का दुश्मन है मोटापा


यूं तो मोटापा कई बीमारियों एवं परेशानियों का सबब बनता है। लेकिन मधुमेह रोगियों के लिए मोटापा कई और समस्याएं लेकर आता है। आइये जानें मोटापा एवं मधुमेह का आपस में कितना गहरा संबंध है। आज भारत में 4.5 करोड़ व्यक्ति मधुमेह के शिकार हैं। और ज्यादातर मधुमेह रोगी मोटापे की समस्या से भी ग्रस्त होते हैं।

मधुमेह रोग में क्या होता है
 
डायबिटीज रोग में कार्बोहाइड्रेट और ग्लूकोज का ऑक्सीकरण पूर्ण रूप से नहीं हो पाता है। इसका मुख्य कारण है, 'इंसुलिन की कमी'। हमारी पैंक्रियाज इंसुलिन नामक हार्मोन बनाती हैं, जिससे , ग्लूकोज को ठीक प्रकार से शरीर के सभी भागों पहुंचता है रक्त में ग्लूकोज की मात्रा सामान्य से ज्यादा तथा सामान्य से कम होना दोनों ही स्थितियाँ घातक सिद्ध होती हैं। 

हमारी जीवनशैली मोटापे व मधुमेह का कारण  

अत्याधुनिक संसाधनों के आ जाने से हमारा जीवन काफी आसान हो गया है। जिसके कारण मोटापा एवं मधुमेह की शिकायतें बढ़ रही हैं। शारीरिक परिश्रम कम करना तथा फास्ट फूड्स के बढ़ते चलन के कारण लोगों में मोटापा बढ़ रहा है। आज की भागती जिन्दगी में लोगों के पास नियमित व्यायाम करने एवं फिटनेस पर ध्यान देने का वक्त ही नहीं है। पेट के आसपास जमा यह अतिरिक्त वसा इन्सुलिन रेजिस्टेंट स्थिति को पैदा करता है जो कि मधुमेह होने का एक बड़ा कारण बनता है।

इंसुलिन रेजिस्टेंस क्या है

इंसुलिन रेजिस्टेंस एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर इंसुलिन नामक हार्मोन का ठीक से इस्तेमाल करने में विफल रहता है। इंसुलिन ही हमारे शरीर की कोशिकाओं के अन्दर ग्लूकोज प्रदान करता है जिसके कारण मेटाबॉलिज्म की प्रक्रिया से ऊर्जा उत्पन्न होती है और हम काम कर पाते हैं। 

टाइप 2 डायबिटीज से ग्रस्त वैसे मरीज जो मोटापे के शिकार हैं वे प्रायः इन्सुलिन रेजिस्टेन्ट हैं। इसका मतलब है कि ऐसे मधुमेह रोगियों को इंसुलिन की अधिक मात्रा की जरूरत होगी ताकि उनकी कोशिकाओं में पर्याप्त मात्रा में शुगर पहुंच सके। इस तरह मोटापे के कारण उत्पन्न इंसुलिन रेजिस्टेन्ट के दीर्घकालिक प्रभाव की वजह से मोटे व्यक्तियों में खासकर मोटी महिलाओं में मधुमेह की आशंका बढ़ जाती है। 

मोटापे पर नियंत्रण मधुमेह से बचाव

मोटे व्यक्ति 10 से 15 प्रतिशत वजन कम कर डायबिटीज से बच सकते हैं। साथ ही वैसे मोटे व्यक्ति जो मधुमेह से ग्रस्त हैं वे यदि अपने शरीर का 10 से 15 प्रतिशत वजन कम कर दें तो उनके मधुमेह वाली दवाओं का डोज कम हो सकता है, एवं इसके साथ ही मधुमेह से जुड़ी जटिलताएँ जैसे अंधापन, स्ट्रोक एवं दिल का दौरा पड़ने की आशंका भी कम हो सकती है। इसलिए मधुमेह के खतरे को कम करने के लिए मोटापे पर नियंत्रण जरूरी है।


 

यूं तो मोटापा कई बीमारियों एवं परेशानियों का सबब बनता है। लेकिन मधुमेह रोगियों के लिए मोटापा कई और समस्याएं लेकर आता है। आइये जानें मोटापा एवं मधुमेह का आपस में कितना गहरा संबंध है। आज भारत में 4.5 करोड़ व्यक्ति मधुमेह के शिकार हैं। और ज्यादातर मधुमेह रोगी मोटापे की समस्या से भी ग्रस्त होते हैं।

 

मधुमेह रोग में क्या होता है

 

डायबिटीज रोग में कार्बोहाइड्रेट और ग्लूकोज का ऑक्सीकरण पूर्ण रूप से नहीं हो पाता है। इसका मुख्य कारण है, 'इंसुलिन की कमी'। हमारी पैंक्रियाज इंसुलिन नामक हार्मोन बनाती हैं, जिससे , ग्लूकोज को ठीक प्रकार से शरीर के सभी भागों पहुंचता है रक्त में ग्लूकोज की मात्रा सामान्य से ज्यादा तथा सामान्य से कम होना दोनों ही स्थितियाँ घातक सिद्ध होती हैं। 

 

हमारी जीवनशैली मोटापे व मधुमेह का कारण  

 

अत्याधुनिक संसाधनों के आ जाने से हमारा जीवन काफी आसान हो गया है। जिसके कारण मोटापा एवं मधुमेह की शिकायतें बढ़ रही हैं। शारीरिक परिश्रम कम करना तथा फास्ट फूड्स के बढ़ते चलन के कारण लोगों में मोटापा बढ़ रहा है। आज की भागती जिन्दगी में लोगों के पास नियमित व्यायाम करने एवं फिटनेस पर ध्यान देने का वक्त ही नहीं है। पेट के आसपास जमा यह अतिरिक्त वसा इन्सुलिन रेजिस्टेंट स्थिति को पैदा करता है जो कि मधुमेह होने का एक बड़ा कारण बनता है।

 

इंसुलिन रेजिस्टेंस क्या है

 

इंसुलिन रेजिस्टेंस एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर इंसुलिन नामक हार्मोन का ठीक से इस्तेमाल करने में विफल रहता है। इंसुलिन ही हमारे शरीर की कोशिकाओं के अन्दर ग्लूकोज प्रदान करता है जिसके कारण मेटाबॉलिज्म की प्रक्रिया से ऊर्जा उत्पन्न होती है और हम काम कर पाते हैं। 

 

टाइप 2 डायबिटीज से ग्रस्त वैसे मरीज जो मोटापे के शिकार हैं वे प्रायः इन्सुलिन रेजिस्टेन्ट हैं। इसका मतलब है कि ऐसे मधुमेह रोगियों को इंसुलिन की अधिक मात्रा की जरूरत होगी ताकि उनकी कोशिकाओं में पर्याप्त मात्रा में शुगर पहुंच सके। इस तरह मोटापे के कारण उत्पन्न इंसुलिन रेजिस्टेन्ट के दीर्घकालिक प्रभाव की वजह से मोटे व्यक्तियों में खासकर मोटी महिलाओं में मधुमेह की आशंका बढ़ जाती है। 

 

मोटापे पर नियंत्रण मधुमेह से बचाव

 

मोटे व्यक्ति 10 से 15 प्रतिशत वजन कम कर डायबिटीज से बच सकते हैं। साथ ही वैसे मोटे व्यक्ति जो मधुमेह से ग्रस्त हैं वे यदि अपने शरीर का 10 से 15 प्रतिशत वजन कम कर दें तो उनके मधुमेह वाली दवाओं का डोज कम हो सकता है, एवं इसके साथ ही मधुमेह से जुड़ी जटिलताएँ जैसे अंधापन, स्ट्रोक एवं दिल का दौरा पड़ने की आशंका भी कम हो सकती है। इसलिए मधुमेह के खतरे को कम करने के लिए मोटापे पर नियंत्रण जरूरी है।

 

 

 

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