संगीत का मजा चुपके से दे रहा कानों को सजा

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 29, 2013
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Quick Bites

  • हमेशा धीरे आवाज में गाना सुने।
  • यह समस्या किशोरों में ज्यादा होती है।
  • तेज आवाज कानों के साथ-साथ दिमाग पर भी असर डालती है।
  • शोध में भी साबित हो चुका है कि तेज आवाज कानों के लिए सही नहीं।

आजकल किशोरों में आईपाड और एमपी-3 प्लेयरों का चलन काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है। मगर वह यह नहीं जानते कि संगीत का यह मजा उनके लिए ऐसी सजा भी बन रहा है जो आने वाले समय में उन्हें गाना सुनने के लिए तरसा सकता है।

 

लोग हमेशा कानों में ईयरफोन या हेडफोन की मदद से गाने सुनते रहते हैं। तेज आवाज में होने के कारण यह गाने कानों के पर्दे पर विपरीत प्रभाव डालते हैं। कई शोधों में भी यह बात सामने आयी है कि तेज आवाज में गाने सुनना आपको बहरा तक बना सकता है।

ear problem

क्या कहते हैं शोध 

पिछले 15 सालों के दौरान अमेरिकी किशोरों में बहरेपन की समस्या तेजी से बढ़ी है। अब हालत यहां तक आ गई है कि पांच में से एक किशोर उतनी गंभीर श्रवण समस्या से जूझ रहा है जितनी अमूमन 50 से 60 साल की उम्र वाले लोगों को होती है। हार्वर्ड स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ और बर्मिघम एंड वूमेंस हास्पिटल [बीडब्लूएच] के शोधकर्ताओं के अनुसार, 1988-94 के सर्वेक्षण से लिए गए आंकड़ों की तुलना में, 2005-06 में 12-19 साल के अमेरिकी किशोरों में किसी भी तरह के बहरेपन में 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। साथ ही, पिछले 15 सालों के दौरान अमेरिकी किशोरों में 'हल्के या गंभीर रूप से बहरेपन' में 70 फीसदी की बढ़ोत्तरी पाई गई है। शोधकर्ताओं ने पांच में से कम से कम एक किशोर में सुनने की क्षमता में कमी के प्रमाण पाए हैं जबकि 20 में से एक में सुनने की क्षमता में बेहद हल्की कमी पाई है।

बीडब्लूएच में चेनिंग प्रयोगशाला के फिजीशियन इंवेस्टिगेटर और अध्ययन के अगुवा रहे जोसेफ शारगोरोडस्काई ने कहा कि इन किशोरों ने सामान्य फुसफुसाहट, सीटी, कुछ निश्चित संगीत के सुर और उच्च आवृत्ति वाली आवाजों को सुनने में दिक्कतें महसूस की होंगी। उन्होंने कहा, 'किशोरों में सुनाई देने की क्षमता में कमी पिछले अध्ययन को देखते हुए और चिंताजनक हो जाती है।
ear pain
इस अध्ययन में पाया गया था कि किशोर सुनाई देने के महत्व और शोर के खतरों को कम आंक रहे हैं। वह अपनी श्रवण क्षमता बचाने को प्राथमिकता नहीं दे रहे हैं।' अध्ययन में किशोरों के बीच बढ़ते बहरेपन का कोई मुख्य कारण नहीं दिया गया है। हालांकि, शोधकर्ता जांच रहे हैं कि क्या सेलफोन और ईयरफोन से सुना जाने वाला संगी इसका कारण है?

जोसेफ ने कहा, 'बहरेपन के कारण को बेहतर तरीके से समझने के लिए आगे शोध किए जाने बेहद जरूरी हैं। यह इतना व्यापकता के साथ क्यों बढ़ रहा है और यह अन्यों से ज्यादा कुछ जनसंख्या को ही क्यों प्रभावित कर रहा है। साथ ही इससे निपटने के लिए किस तरह से कारगर उपाय किए जा सकते हैं।'

शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि अमेरिका में लड़कियों की अपेक्षा लड़कों में बहरेपन की समस्या ज्यादा है। 2005-06 में करीब 22 फीसदी लड़कों और 17 फीसदी लड़कियों ने कम सुनाई देने की समस्या जाहिर की थी।

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