लकवाग्रस्‍त मरीजों के लिए उम्‍मीद की नयी किरण

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 20, 2012
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lakwagrast marijo ke liye umeed ki nayi kiranलंदन। लकवा या पक्षाघात होने के बाद व्‍यक्ति का जीवन दुभर हो जाता है। अपने हर छोटे बड़े काम के लिए उन्‍हें आमतौर पर दूसरे से निर्भर रहना पड़ता है। लेकिन, अब इस तरह के मरीजों के लिए एक उम्‍मीद की किरण नजर आई है। लंदन के वैज्ञानिकों ने ऐसा तरीका खोज निकालने का दावा किया है, जो लकवाग्रस्‍त मरीजों को सामान्‍य जीवन में लौटने में मदद कर सकता है। दिलचस्‍प बात यह है कि कुत्तों पर किए गए शोध के बाद वैज्ञानिकों को यह रास्‍ता मिला है।

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वैज्ञानिकों ने लकवाग्रस्त कुत्तों में उनकी नाक के अंदरूनी हिस्से से तैयार की गई कोशिकाएं इंजेक्शन के ज़रिये प्रविष्ट कराईं और उनमें सुधार देखा गया। अब वैज्ञानिक मानते हैं कि यही तकनीक लकवा पीडि़त मनुष्‍यों के भी काम आ सकती है।

ब्रिटेन स्थित कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि यह तकनीक मनुष्यों के इलाज में भी मददगार साबित होगी। इसके लिए उन्होंने कुत्तों की नाक के अंदरूनी हिस्से से कोशिकाएं निकालीं। इन्हें प्रयोगशाला में कई सप्ताह तक विकसित किया गया।

34 कुत्तों में से 23 में चोट वाली जगह पर इन कोशिकाओं का प्रत्यारोपण किया गया। शेष को मौजूदा इंजेक्‍शन ही दिए गए। प्रत्यारोपण वाले ज्यादातर कुत्तों में लगातार सुधार देखा गया और वह मामूली सहारे से चलने भी लगे। अध्ययन के नतीजे न्यूरोलॉजी जर्नल ब्रेन में प्रकाशित हुए हैं।

वैज्ञानिक यह भी दावा करते हैं कि यह तकनीक रीढ़ की हड्डी की चोट से ग्रस्त उन मरीजों के इलाज के लिए भी मददगार साबित होगी जो यौन क्रिया की क्षमता खो देते हैं या आंत तथा ब्लैडर पर जिनका नियंत्रण नहीं रहता।

जिन कुत्तों पर यह प्रयोग किया गया, वह सभी रीढ़ की हड्डी की बीमारी से ग्रसित थे इसके चलते वे अपने पिछले पैरों का उपयोग नहीं कर पाते थे।

 

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