लड़कियों के लिए सेक्स शिक्षा

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Dec 04, 2012
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ladkiyon ke liye sex shiksha

किशोरावस्था में लड़कियों को सेक्स शिक्षा देना बहुत जरुरी हो जाता है, क्योंकि इस समय लड़कियों के कई लड़के दोस्त होते हैं जिनके साथ वे स्कूल, ट्यूशन में ज्यादा समय बिताती हैं। ऐसे में अक्सर वे दोनों एक दूसरे की तरफ आकर्षित होने लगते हैं इसलिए उन्हें सेक्स शिक्षा देना बहुत ही जरूरी है। क्योंकि इसके बिना उनसे कई तरह की गलतियां हो सकती है। लड़कियों को  सेक्स शिक्षा देने में उनकी माताओं का अहम रोल होता है। अक्सर लड़कियां इस उम्र में अपनी मां से हर बात शेयर करती है जिससे मां को सेक्स शिक्षा देने का मौका मिल जाता है।

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एक लड़की का शरीर किशोरावस्था में विकसित होना शुरु हो जाता है, लेकिन वह अपने अंदर होने वाले जैविक व भावनात्मक बदलावों को समझ नहीं पाती हैं। और वो इसका जिक्र अपनी सहेलियों से करती हैं लेकिन वे भी इसी दौर से गुजरती हैं इसलिए उनके द्वारा बताई गई बातें उसके समस्याओं को हल नहीं कर पाती हैं। इस उम्र में लड़कियों को सही गाइडलाइन की जरूरत होती है। जो उन्हें उनके स्कूल व अभिभावक से मिल सकती है।   

लड़कियों को सेक्स शिक्षा देने में उन्हें सबसे पहले मासिक धर्म के बारे में बताना चाहिए। कई बार माता-पिता के लिए यह काफी मुश्किल भरा होता है लेकिन यह जरूरी है कि लड़कियों को इसकी शिक्षा समय पर दी जाए। लड़कियों को सीधे व सरल ढ़ंग से सेक्स की शिक्षा दी जानी चाहिए। कठिन व भारी शब्दों के प्रयोग से वह समझ नहीं पाएगी कि आप उसे क्या समझाना चाहते हैं। आईए जाने कैसे दें लड़कियों को सेक्स शिक्षा। 

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सही सूचना दें

लड़कियों को सेक्स की शिक्षा देते समय डरे नहीं उन्हें उनकी समझ के अनुसार समझाने की कोशिश करें। बच्चों को सही बातें बताएं क्योंकि गलत बातों से उनका तो नुकसान होगा ही साथ ही उनके साथियों का भी जिनसे वे ये बातें शेयर करेंगी।

 

मासिक धर्म के बारे में बताएं

लड़कियों को मासिक धर्म के बारे में पूरी जानकारी दें। यह क्या है, क्यों होता है, कब होता है आदि। आपके द्वारा बताई गई बातों से उन्हें इस दौरान होने वाली समस्याओं में मदद मिलती है। लड़कियां जब पहली बार इस समस्या से गुजरती हैं तो वे काफी परेशान हो जाती है ऐसे में उन्हें आपके प्यार व सहयोग की जरूरत होती है।

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भावनात्मक बदलाव

लड़कियों में किशोरावस्था के शारीरिक बदलाव के साथ भावनात्मक बदलाव भी होते हैं। यह बहुत ही सामान्य प्रक्रिया है क्योंकि शरीर में नए हार्मोन्स बनते हैं जिसका असर लड़कियों के मूड व स्वभाव पर होता है। ऐसे में अभिभावक को उनसे संभावित समस्याओं के बारे में बात करनी चाहिए जिसके कारण उनका मूड बदलता रहता है।

 

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