समय से पहले क्यों होने लगती है प्रसव पीड़ा? जानें वैज्ञानिक कारण

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 04, 2018
Comment

Subscribe for daily wellness inspiration

Like onlymyhealth on Facebook!

Quick Bites

  • भ्रूण की प्रतिरोधी क्षमता के कारण समय से पहले पीड़ा होने लगती है।
  • माना जाता है कि प्रसव पीड़ा दुनिया की सबसे भयंकर पीड़ा होती है। 
  • गर्भवती पूरे नौ महीने तक अपने बच्चे की पैदाइश का इंतजार करती हैं। 

गर्भवती महिलाओं में समय से पहले होने वाली प्रसव-पीड़ा के लिए गर्भस्थ शिशु की प्रतिरोधी क्षमता में विकास एक वजह हो सकती है। इस बात का आकलन एक हालिया शोध के नतीजों में किया गया है। कई ऐसे मामले देखने को मिलते हैं जब गर्भ की परिपक्वता के 37वें सप्ताह के पूर्व गर्भवती महिलाओं को तकलीफ बढ़ जाती है, जिस कारण समय से पहले प्रसव हो जाता है। शोध के नतीजों में पाया गया कि कभी-कभी ऐसा हो सकता है कि भ्रूण की प्रतिरोधी क्षमता जाग्रत हो जाने से वह माता के गर्भ के परिवेश को स्वीकार करना बंद कर देता है, जिसके कारण गर्भाशय में संकुचन पैदा होता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, भ्रूण की प्रतिरोधी क्षमता के कारण गर्भवती महिलाओं में समय से पहले प्रसव-पीड़ा होने लगती है।

इसे भी पढ़ें : इस 1 टीके से होगा प्रोस्‍टेट कैंसर का इलाज, हुआ आविष्‍कार

उनका कहना है कि भ्रूण की प्रतिरक्षी कोशिकाएं माता की कोशिकाओं को लेकर उलझन में रहती हैं और माता की कोशिकाओं से खतरा महसूस करती हैं, जोकि दाह पैदा करने वाली रसायन के रूप में प्रकट उत्पन्न होता है। सैन फ्रैंसिस्को स्थित कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर तिप्पी मैकेंजी ने कहा, एक धारणा है कि भ्रूण की प्रतिरक्षी क्षमता बहुत कमजोर होती है और इसके परिणामस्वरूप लोग गर्भावस्था में इसकी संभावित भूमिका को नहीं समझ पाते हैं। उन्होंने कहा, हमने दिखाया कि समय से पूर्व प्रसव-पीड़ा का अनुभव करने वाली महिला मरीजों में संक्रमण व सूजन की शिकायत होती है, जिसका कारण यह है कि भ्रूण की प्रतिरक्षी क्षमता जाग्रत हो जाती है।

इसे भी पढ़ें : शोध में खुलासा, 6 घंटे खड़े रहने से जल्दी घटता है वजन

प्रसव पीड़ा से कैसे निपटें

माना जाता है कि प्रसव पीड़ा दुनिया की सबसे भयंकर पीड़ा होती है। इस पीड़ा को वही जान सकता है जो उसे महसूस करता है। इस वजह से गर्भवती महिलाएं बहुत डरी हुई रहती हैं कि वो प्रसव के समय कैसे दर्द सहन कर पाएंगी। हालांकि गर्भवती महिला पूरे नौ महीने तक अपने बच्चे की पैदाइश का इंतजार करती हैं। यदि गर्भवती महिला प्रसव के दौरान कुछ खास बातों का ध्यान रखें, और प्राकृतिक तरीके से प्रसव होने दें, तो प्रसव के दौरान मां को कम तकलीफ होती है और साथ ही, बच्चा सरलता से बाहर आ जाता है। ऐसे कई तरीके हैं जिनके द्वारा गर्भावस्था के अंतिम दिनों में प्रसव पीड़ा को प्रेरित किया जा सकता है। वीडियो में हमारी नेचुरल चाइल्डबर्थ स्पेशलिस्ट नूतन पंडित इस बता रही हैं कि किस तरह से महिलाएं प्रसव में यदि सही मुद्रा अपनाएं और साथ ही साथ ब्रीदिंग टेकनीक पर ध्यान दें तो प्रसव कम पीड़ा के साथ और सुरक्षित तरीके से हो सकता है।

ऐसे अन्य स्टोरीज के लिए डाउनलोड करें: ओनलीमायहेल्थ ऐप

Read More Articles on Health News in Hindi

Loading...
Write Comment Read ReviewDisclaimer
Is it Helpful Article?YES574 Views 0 Comment
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर