क्‍यों और कैसे होती हैं हृदय समस्याएं

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Mar 18, 2015
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Quick Bites

  • हृदय को स्वस्थ रखने के लिए देखभाल है जरूरी।
  • शरीर में रक्त प्रवाह को आगे धकेलता है हृदय।
  • जंक फूड, व्‍यायाम न करने से पड़ता है बुरा असर।  
  • हृदय की विफलता, पेरिकार्डियल बहाव हो सकते हैं।

दिल सेहतमंद तब रहेगा, जब आप करेंगे इसकी खास देखभाल। आपको ऐसी दिनचर्या अपनानी होगी जो आपके दिल को माफिक आए। हृदय सम्बन्धी समस्या पर चर्चा करने से पूर्व दिल और उसकी कार्य प्रणाली पर थोड़ी नजर डाल ली जाए।

क्या होता है हृदय

हृदय हमारे शरीर का महत्त्वपूर्ण अंग है। इंसानों में यह छाती के मध्य में, थोड़ी सी बाईं ओर स्थित होता है। हमारा दिल एक दिन में लगभग एक लाख बार धड़कता है। यानी हर मिनट में 60-90 बार। और यह हर धड़कन के साथ शरीर में रक्त को आगे धकेलता है। हृदय को पोषण एवं ऑक्सीजन, रक्त के द्वारा मिलता है जो कोरोनरी धमनियां इसे प्रदान करती हैं।


हमारा ह्रदय दो भागों में विभाजित होता है, दायां (सीधी तरफ) एवं बायां (उल्टी ओर)। हृदय के दाएं एवं बाएं दोनों ओर एट्रिअम एवं वेंट्रिकल नाम के दो चैम्बर होते हैं। कुल मिलाकर हृदय में चार चैम्बर होते हैं। दाहिना भाग शरीर से दूषित रक्त प्राप्त करता है एवं उसे फेफडों में पम्प करता है और रक्त फेफड़ों में शुद्ध होकर ह्रदय के बाएं भाग में वापस लौटता है। यहां से रक्त शरीर में वापस पम्प कर दिया जाता है। चार वॉल्व, दो बाईं ओर (मिट्रल एवं एओर्टिक) एवं दो हृदय की दाईं ओर (पल्मोनरी एवं ट्राइक्यूस्पिड) रक्त के बहाव को निर्देशित करने के लिए एक-दिशा के द्वार की तरह कार्य करते हैं।

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क्या और कैसे होती हैं हृदय समस्याएं

कितनी रफ्तार है आजकल की जिंदगी में। हमारे दिल को भी इस रफ्तार के साथ कदमताल करनी पड़ती है। अनियमित और असंतुलित आहार, सही तरह से आराम न कर पाना, फास्ट फूड, जंक फूड, व्‍यायाम न करना आदि से हमारे शरीर पर बुरा असर पड़ता है।  इससे हमारे शरीर में कोलेस्ट्रोल की मात्रा बढ़ जाती है, जिसे आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में (एल.डी.एल, वी.एल.डी.एल) कहा जाता है। कोलेस्ट्रोल के बढ़ जाने से इसकी परत धमनियों और शिराओं में जम जाती है, जिसके कारण धमनियों और शिराओं को क्षति पहुंचती है। इसके साथ ही उनकी दीवारों पर थ्रोम्बोसाइट (बिंबाणु) जाकर चिपक जाते हैं, जिसके कारण धमनियां और शिराएं सिकुड़ जाती हैं। इससे शरीर के महत्त्वपूर्ण अंग जैसे हृदय, फेफड़े और किडनी, मस्तिष्क इत्यादि में रक्त संचार की कमी के कारण इन अंगो में स्थाई क्षति हो सकती है। जिन्हें आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में स्ट्रोक, एन्जायना, स्चिमिया, मायोकार्डियल इन्फैक्शन इत्यादि के नाम से संबोधित किया जाता है। इन सभी स्थितियों में अल्पायु में ही आप दवाओं पर निर्भर हो जाते हैं, इसके बाद आपको सलाह दी जाती है अधिक श्रम न करें, भार न उठायें, भाग दौड़ न करें।

आयुर्वेद में हृदय रोग के कारण

आयुर्वेद के अनुसार ह्रदय रोग का सबसे बड़ा कारण अपच (इनडायजेशन) हो सकता है। क्योंकि जिन लोगों को भोजन ठीक से पचता नहीं उन्ही के रक्त में खराब कोलेस्ट्रोल की मात्रा बढ़ती है। ह्रदय रोग का एक कारण है शरीर में वात दोष का बढ़ना तथा रक्त की अम्लता (ऐसिडिटी) भी हो सकता है। जन्मजात हृदय रोग, जन्म के समय हृदय की संरचना की खराबी के कारण होता है। जन्मजात हृदय की खराबियां हृदय में जाने वाले रक्त के सामान्य प्रवाह को बदल देती हैं। जन्मजात हृदय की खराबियों के कई प्रकार होते हैं जिसमें मामूली से गंभीर प्रकार तक की बीमारियां शामिल हैं।

ह्रदय समस्‍याओं के कई कारण हो सकते हैं जिनमें आपकी उम्र, आपका लिंग, धूम्रपान, अनियंत्रित खान-पान, उच्च रक्त चाप, उच्च रक्त कोलेस्ट्रोल स्तर, मधुमेह, मोटापा, अस्वछता और मानसिक तनाव मुख्य हैं। ह्रदय समस्याओं के कारण आको कुछ गंभीर परिस्थितियों जैसे कि हार्ट फेल्योर, हार्ट अटैक, परिधीय धमनी रोग, कार्डियक अरेस्ट आदि।हृदय में कई प्रकार के रोग जैसे हृदयाघात, रुमेटिक हृदय रोग,जन्मजात खराबियां, हृदय की विफलता, पेरिकार्डियल बहाव हो सकते हैं।

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हृदय को ऐसें रखें स्वस्थ

इन समस्याओं से बचाव के यूं तो अनेकों उन्नत चिकित्सकीय उपचार मौजूद हैं लेकिन कुछ नियमों और सावधानियों का पालन कर व अपनी दिनचर्या में थोडा सा बदलाव कर आप ह्रदय समस्याएं के होने से पहले ही इनसे बच सकते हैं और इनसे ग्रसित होने पर इनको गंभीर होने से रोक सकते हैं। कुछ युक्तियां निम्न प्रकार से हैं।

धूम्रपान न करें, अपने रक्त चाप को नियंत्रित रखें, अपने कोलेस्ट्रोल की नियमित जांच करें। मधुमेह को भी नियंत्रित रखें, पौष्टिक आहार लें, अपने वजन को ज्यादा ना बढने दें। तनाव पर नियंत्रित रखें तथा स्वछता पर विशेष ध्यान दें।

ImageCourtesy@Gettyimages

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टिप्पणियाँ
  • pradeep02 Oct 2015

    Very very thanks for important information or knowledge to given me

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